G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं बल्कि ‘भरोसे के संकट’ (Trust Deficit) से जूझ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देशों के बीच आपसी विश्वास ही भविष्य की सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है और इसके बिना वैश्विक चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है।
फ्रांस में आयोजित G7 आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री सुरक्षा, वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया के समुद्री मार्ग खुले और सुरक्षित रहने चाहिए ताकि वैश्विक व्यापार बिना किसी डर और बाधा के आगे बढ़ सके। प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल के महीनों में समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का “भरोसे के संकट” वाला बयान केवल वैश्विक राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। हाल के वर्षों में व्यापार विवाद, भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और कूटनीतिक मतभेदों ने कई देशों के बीच विश्वास को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में भारत लगातार संवाद और सहयोग की नीति पर जोर देता रहा है।
G7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को लेकर भी काफी चर्चा है। दोनों नेताओं की यह लगभग 16 महीनों में पहली आमने-सामने की मुलाकात मानी जा रही है। सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और औपचारिक बातचीत से पहले संक्षिप्त चर्चा भी की।
भारत और अमेरिका के बीच होने वाली इस बैठक में व्यापार समझौता, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वीजा नीतियां और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे।
हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के संबंध कई मुद्दों को लेकर चर्चा में रहे हैं। व्यापारिक बातचीत, टैरिफ, आप्रवासन नीतियां और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद जारी है। ऐसे में G7 सम्मेलन के दौरान होने वाली यह मुलाकात दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल तकनीक या आर्थिक संसाधनों से नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए देशों के बीच पारदर्शिता, सहयोग और आपसी भरोसे को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक राष्ट्र एक-दूसरे पर विश्वास नहीं करेंगे, तब तक शांति, विकास और स्थिरता के लक्ष्य हासिल करना कठिन रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार देशों की चिंता बढ़ा रहे हैं। ऐसे में भारत की ओर से विश्वास और सहयोग पर दिया गया जोर वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सभी की नजर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली औपचारिक बैठक पर है। उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा करेंगे। G7 सम्मेलन में यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
