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होर्मुज जलडमरूमध्य से अब बिना टोल गुजरेंगे जहाज! अमेरिका-ईरान समझौते में बड़ा ऐलान

पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए शांति समझौते से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी अधिकारियों ने घोषणा की है कि समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of […]

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते तेल टैंकर और मालवाहक जहाज

पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए शांति समझौते से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी अधिकारियों ने घोषणा की है कि समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों को फिलहाल बिना किसी टोल शुल्क के आवाजाही की अनुमति होगी।

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने समझौते के प्रारंभिक दस्तावेज पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होने की संभावना है।

अमेरिका का कहना है कि समझौते के पहले चरण में अगले 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह “टोल-फ्री” रहेगा। इस दौरान जहाजों को किसी प्रकार का पारगमन शुल्क नहीं देना होगा और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की कोशिश की जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि यह व्यवस्था भविष्य के स्थायी समझौते का भी हिस्सा बने।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। फरवरी 2026 में शुरू हुए संघर्ष के बाद इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा।

समझौते के तहत अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर सहमत हुआ है, जबकि ईरान ने व्यापारिक जहाजों के लिए मार्ग खोलने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों पक्षों के बीच अगले 60 दिनों तक तकनीकी और कूटनीतिक वार्ताएं जारी रहेंगी, जिनमें परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

हालांकि अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान भविष्य में ओमान के साथ मिलकर जलडमरूमध्य के प्रबंधन की व्यवस्था चाहता है। वहीं कुछ शिपिंग कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन सुरक्षा स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसलिए समझौते के बावजूद समुद्री यातायात को पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है।

वैश्विक बाजारों ने इस खबर का सकारात्मक स्वागत किया है। समझौते की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कई प्रमुख शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति स्थिर होगी और महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारत के लिए भी यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य उसके लिए प्रमुख समुद्री मार्ग है। ऐसे में इस मार्ग का खुलना भारतीय तेल आयात, व्यापार और शिपिंग लागत पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ईरान को किसी भी आर्थिक लाभ, प्रतिबंधों में राहत या फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच तभी मिलेगी जब वह समझौते की सभी शर्तों का पालन करेगा। यानी शांति समझौते का अगला चरण दोनों देशों की प्रतिबद्धताओं और वार्ताओं की सफलता पर निर्भर करेगा।

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