UP News: CCTV खराबी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, पुलिस की ‘काल्पनिक कहानी’ पर जेम्स बॉन्ड का जिक्र
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने यूपी के पुलिस स्टेशनों में बार-बार खराब हो रहे CCTV कैमरों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की डिवीजन बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे खुद इस मामले की जांच करें और जिम्मेदारी तय करें।
कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस स्टेशनों में लगे CCTV कैमरों के “बार-बार खराब” होने के इत्तेफाक को हल्के में नहीं लिया जा सकता। बेंच ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है मानो अधिकारी CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी से बचने के लिए “काल्पनिक कहानी” गढ़ रहे हों।
जवाबदेही ऊपर से तय हो: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने अपने 7 पन्नों के आदेश में कहा: “अब समय आ गया है कि जवाबदेही गुरुत्वाकर्षण के नियम की तरह ऊपर से नीचे की ओर तय की जाए, न कि केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को बलि का बकरा बनाया जाए।”
कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे यह तय करें कि जिले के शीर्ष पुलिस अधिकारी—जैसे पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त—की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस बनाई जाएं।
जेम्स बॉन्ड फिल्म का हवाला
लगातार हो रहे “इत्तेफाक” पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने जेम्स बॉन्ड फिल्म Goldfinger की मशहूर पंक्ति का हवाला दिया:“एक बार इत्तेफाक, दो बार संयोग, तीसरी बार दुश्मन की कार्रवाई।”इस टिप्पणी ने पूरे मामले को और चर्चित बना दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला 56 वर्षीय दिव्यांग श्याम सुंदर की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 6-7 सितंबर 2025 की रात सुल्तानपुर पुलिस ने उनके साथ मारपीट और हिरासत में प्रताड़ना की।याचिकाकर्ता ने BNS की धारा 109 के तहत दर्ज FIR को चुनौती देते हुए संबंधित पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की थी।
हालांकि, जब हाईकोर्ट ने सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक से फुटेज पेश करने को कहा, तो बताया गया कि 1 जून 2025 से कैमरे बंद थे।
कोर्ट ने इसे “साफ तौर पर अजीब” बताया क्योंकि:
जून से कैमरे खराब होने की कोई GD एंट्री नहीं थी
टेक्निकल सेक्शन को कोई सूचना नहीं भेजी गई
कोर्ट के आदेश के बाद ही कैमरे अचानक ठीक कराए गए
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना?
हाईकोर्ट ने कहा कि यह रवैया सुप्रीम कोर्ट के परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह फैसले की अवमानना है, जिसमें CCTV फुटेज 6 से 18 महीने तक सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था।साथ ही, 20 जून 2025 को यूपी के डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर का भी उल्लंघन बताया गया, जिसमें कम-से-कम ढाई महीने तक फुटेज संरक्षित रखने की बात कही गई थी।
मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश
कोर्ट ने मुख्य सचिव को 23 फरवरी 2026 तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर जांच रिपोर्ट और गाइडलाइंस प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।यदि ऐसा नहीं किया गया तो उन्हें स्वयं कोर्ट में पेश होना होगा।







