खनऊ स्थित KGMU से जुड़े धर्मांतरण और महिला रेजिडेंट डॉक्टर के यौन शोषण के हाई-प्रोफाइल मामले ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। इस केस में गिरफ्तार आरोपी से जुड़े नए इनपुट सामने आने के बाद UP ATS पूरी तरह सक्रिय हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, एटीएस ने लखनऊ पुलिस से आरोपी और उसके पूरे नेटवर्क की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जांच में देश-विदेश से जुड़े संपर्क, संदिग्ध मुलाकातें और संगठित रैकेट के संकेत मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है।
संदिग्ध संपर्क और संवेदनशील कड़ियां
पूछताछ में आरोपी ने एक अन्य डॉक्टर से मुलाकातों की बात स्वीकार की है, जो पहले भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रह चुकी हैं। दोनों के बीच संपर्क कथित तौर पर मेडिकल कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ था, जिसके बाद बातचीत बढ़ी। इस कड़ी को एजेंसियां बेहद संवेदनशील मान रही हैं और पहले से साझा किए गए इनपुट्स के आधार पर नेटवर्क खंगालने की तैयारी की जा रही है।
फरारी के दौरान फैला संपर्क जाल
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तारी से पहले आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और इस दौरान सहारनपुर, मेरठ, शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, शाहीन बाग और दिल्ली तक उसका आना-जाना रहा। इस अवधि में वह कई डॉक्टरों के संपर्क में रहा और कानूनी सलाह भी लेता रहा। एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि ये संपर्क व्यक्तिगत थे या किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा।
विदेशी कनेक्शन जांच के घेरे में
धर्मांतरण और शोषण के आरोपों के बीच आरोपी की विदेश यात्राएं भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस एमबीबीएस के दौरान और नौकरी के समय की यात्राओं, देशों और संपर्कों का पूरा ब्यौरा जुटा रही है।
आगरा से पीलीभीत तक फैला मामला
जांच में यह भी सामने आया है कि पढ़ाई के दौरान धर्मांतरण के बाद एक विवाह कराया गया था, जिसकी प्रक्रिया पीलीभीत में हुई। पुलिस अब निकाह कराने वाले काजी और गवाहों की पहचान कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह व्यक्तिगत मामला था या किसी बड़े रैकेट का हिस्सा।
KGMU के भीतर शक के घेरे
मामले में KGMU के एक अन्य जूनियर डॉक्टर पर भी संदेह है। सूत्रों के अनुसार, हॉस्टल में कराई गई कथित तकरीरों और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। इसके साथ ही एक गोपनीय रिपोर्ट में दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर के नाम भी रडार पर बताए जा रहे हैं।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
सूत्रों का दावा है कि KGMU प्रशासन को पहले भी शिकायतें मिली थीं, लेकिन उन पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। एजेंसियां अब यह भी जांच कर रही हैं कि शिकायतें नजरअंदाज क्यों की गईं और क्या किसी स्तर पर मिलीभगत थी।








