लखनऊ: तालकटोरा कर्बला से चोरी दुलदुल (जुलजनाह) घोड़ा उन्नाव से बरामद, एक आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ के तालकटोरा कर्बला से चोरी किया गया ईरानी नस्ल का दुलदुल (जुलजनाह) घोड़ा पुलिस ने बरामद कर लिया है। यह घोड़ा उन्नाव जिले के मौरांवा गांव से बरामद हुआ है। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। घोड़े की बरामदगी के लिए 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे अब पुलिस टीम को दिया जाएगा।
शिया समुदाय की आस्था से जुड़ा है दुलदुल घोड़ा
इस्लाम धर्म के शिया समुदाय में दुलदुल नस्ल के घोड़े का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन को दुलदुल नस्ल के घोड़े प्रिय थे। मोहर्रम और अन्य धार्मिक आयोजनों में दुलदुल को प्रतीकात्मक रूप से शामिल किया जाता है।
घोड़े की चोरी के बाद से शिया समुदाय के लोग उसकी सकुशल बरामदगी के लिए दुआएं कर रहे थे। बरामदगी की खबर के बाद लोगों में खुशी का माहौल है।
अस्तबल का ताला काटकर की गई थी चोरी
कर्बला राजाजीपुरम के पूर्व मुतवल्ली सैय्यद फैजी ने बताया कि दुलदुल घोड़ा तालकटोरा कर्बला स्थित अस्तबल में बंधा था। 24 दिसंबर की सुबह सूचना मिली कि अस्तबल का ताला कटर से काट दिया गया है और घोड़ा गायब है। आसपास तलाश के बाद पुलिस को सूचना दी गई।
CCTV में कैद हुआ चोर, घोड़ा लेकर जाते दिखा
पुलिस जांच में CCTV फुटेज सामने आया, जिसमें एक चोर घोड़े को लेकर जाता दिखा। चोर घोड़े के पीछे छिपकर चल रहा था, जिससे उसका चेहरा साफ नजर नहीं आया। आशंका है कि चोर अकेला नहीं था और कुछ दूरी पर खड़ी गाड़ी में घोड़े को लादकर ले जाया गया। पुलिस ने आसपास के CCTV और घटना के समय सक्रिय मोबाइल नंबरों की भी जांच की।
50 हजार इनाम की घोषणा, कर्बला में मांगी गई थी दुआ
सैय्यद फैजी ने बताया कि घोड़े की चोरी से शिया समाज बेहद दुखी था। कर्बला में दुलदुल की सलामती के लिए दुआएं मांगी गईं। घोड़े को खोजने वाले के लिए 50 हजार रुपये इनाम की घोषणा की गई थी, जिसे अब पुलिस टीम को दिया जाएगा।
‘औलाद की तरह पालता हूं दुलदुल’
दुलदुल की देखरेख करने वाले गामा ने बताया कि वह इस घोड़े को औलाद की तरह पालते हैं। उसके बिना खाना-पीना तक छूट गया था। अस्तबल सूना देखकर आंखों से आंसू निकल आते थे। अब दुलदुल को सामने देखकर राहत मिली है।
गाय का दूध पीता है दुलदुल, हर माह 30 हजार खर्च
सैय्यद फैजी ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले ढाई लाख रुपये में उत्तराखंड से इस दुलदुल घोड़े को खरीदा गया था। शुरुआत में इसे रोज 5 लीटर गाय का दूध पिलाया जाता था। अब यह दूध के साथ चना, चोकर, भूसी, हरी घास और खली खाता है। घोड़े की देखभाल पर हर महीने करीब 30 हजार रुपये खर्च आता है।
मोहर्रम जुलूस में सबसे आगे चलता था दुलदुल
दुलदुल घोड़ा मोहर्रम और चहल्लुम के जुलूस में सबसे आगे चलता था। सफेद कपड़ा ओढ़ाकर लाल रंग से जख्म दिखाए जाते हैं, जो कर्बला की शहादत का प्रतीक हैं। लोग घोड़े को छूते-चूमते हैं और अगरबत्ती जलाते हैं। मजलिसों और अन्य धार्मिक आयोजनों में भी दुलदुल को विशेष सम्मान मिलता है।








