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AI-Guided Pregnancy: 19 साल बाद बनी उम्मीद

AI-Guided Pregnancy: एआई तकनीक से 19 साल बाद नि:संतान जोड़े को संतान सुख, विज्ञान ने रचा चमत्कार आज की व्यस्त दिनचर्या, तनाव, अनियमित खानपान और प्रदूषण ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डाला है।लाइफस्टाइल डिसऑर्डर और पर्यावरणीय असंतुलन की वजह से अब बांझपन एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन गया है।WHO की रिपोर्ट के अनुसार, हर […]

AI-Guided Pregnancy: 19 साल बाद बनी उम्मीद

AI-Guided Pregnancy: एआई तकनीक से 19 साल बाद नि:संतान जोड़े को संतान सुख, विज्ञान ने रचा चमत्कार

आज की व्यस्त दिनचर्या, तनाव, अनियमित खानपान और प्रदूषण ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डाला है।लाइफस्टाइल डिसऑर्डर और पर्यावरणीय असंतुलन की वजह से अब बांझपन एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन गया है।WHO की रिपोर्ट के अनुसार, हर 6 में से 1 दंपत्ति को प्रजनन संबंधी समस्या  का सामना करना पड़ रहा है।

पुरुषों में स्पर्म काउंट में गिरावट, और महिलाओं में ओवुलेशन डिसऑर्डर, हार्मोनल असंतुलन तथा पीसीओएस जैसी बीमारियों ने संतान सुख को और कठिन बना दिया है।लेकिन अब AI ने उम्मीद की एक नई किरण दिखाई है — जहां एक 19 साल से नि:संतान जोड़े को AI-Guided Pregnancy से संतान प्राप्ति हुई है।

 AI ने बदली नियति: पहली बार एआई से सफल गर्भधारण

 Columbia University Fertility Center के वैज्ञानिकों ने AI-Guided Pregnancy System के जरिए एक ऐसे दंपत्ति को संतान सुख प्रदान किया,जो 19 साल से गर्भधारण की कोशिश कर रहे थे।

इस जोड़े ने कई बार IVF Treatment और सर्जरी कराई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली।AI तकनीक की मदद से अब उनके जीवन में खुशियां लौट आई हैं — और इसे विज्ञान का “चमत्कार” (Science Miracle) कहा जा रहा है।

कैसे काम करती है एआई आधारित स्टार विधि (AI STAR Method)?

इस तकनीक को STAR – Sperm Tracking and Recovery नाम दिया गया है।AI सिस्टम ने 25 लाख से अधिक इमेजेस  को स्कैन किया और सिर्फ 3.5 मिलीलीटर वीर्य सैंपल में से दो स्वस्थ  Sperm Cells की पहचान की।इन्हीं कोशिकाओं का उपयोग IVF प्रक्रिया में किया गया, जिससे गर्भधारण संभव हुआ।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह पुरुष Azoospermia से पीड़ित था, जिसमें वीर्य में बहुत कम या बिल्कुल भी शुक्राणु नहीं होते हैं — जिससे गर्भधारण लगभग असंभव हो जाता है।

AI in Healthcare: विशेषज्ञों ने बताया बड़ा बदलाव

The Lancet जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में  Prof. Zev Williams और डॉ. हेमंत सूर्यवंशी सहित कोलंबिया यूनिवर्सिटी की टीम शामिल थी।प्रो. विलियम्स ने बताया —“एआई ने एजोस्पर्मिया जैसे मामलों में दुर्लभ शुक्राणु कोशिकाओं की पहचान संभव कर दी है।यह उन पुरुषों के लिए आशा की किरण है जो वर्षों से पिता बनने का सपना देख रहे हैं।”

शोधकर्ताओं ने बताया कि AI Imaging Technology ने वीर्य सैंपल में लाखों मलबों के बीच स्वस्थ स्पर्म की खोज को आसान बना दिया है।यह तकनीक भविष्य में Infertility Treatment के क्षेत्र में एक बड़ा Game-Changer साबित हो सकती है।

AI से दुनिया को मिली नई उम्मीद

AI तकनीक न सिर्फ बांझपन का समाधान दे रही है, बल्कि यह भविष्य की Reproductive Medicine को भी नया आयाम दे रही है। AI की मदद से अब डॉक्टरों को दुर्लभ शुक्राणुओं की पहचान करने मेंकम समय, ज्यादा सटीकता और बेहतर IVF सफलता दर मिल रही है।दुनियाभर के मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI-guided Pregnancy Systems आने वाले समय में लाखों दंपत्तियों के लिए आशा की नई किरण  बनेंगे।

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