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Dry Eyes Problem: समय पर ध्यान न दिया तो जा सकती है रोशनी

Dry Eyes Problem: आंखों की नमी घटा रहीं ये आदतें, समय रहते न सुधरे तो जा सकती है रोशनी आज की डिजिटल लाइफस्टाइल हमारी आंखों की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।लंबे समय तक कंप्यूटर, मोबाइल या लैपटॉप पर काम करना, एसी में लगातार रहना और नींद की कमी जैसी आदतें आंखों […]

Dry Eyes Problem: समय पर ध्यान न दिया तो जा सकती है रोशनी

Dry Eyes Problem: आंखों की नमी घटा रहीं ये आदतें, समय रहते न सुधरे तो जा सकती है रोशनी

आज की डिजिटल लाइफस्टाइल हमारी आंखों की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।लंबे समय तक कंप्यूटर, मोबाइल या लैपटॉप पर काम करना, एसी में लगातार रहना और नींद की कमी जैसी आदतें आंखों की प्राकृतिक नमी को घटा रही हैं।इससे Dry Eyes Problem तेजी से बढ़ रही है, जिसमें आंखों में जलन, लालपन, खुजली और धुंधलापन जैसी परेशानियां होती हैं।

ड्राई आइज अब हर उम्र में आम समस्या

कुछ दशक पहले तक माना जाता था कि उम्र बढ़ने के साथ आंखें कमजोर होती हैं,लेकिन अब कम उम्र के लोग और बच्चे भी Dry Eyes Syndrome का शिकार हो रहे हैं।भारत में पिछले कुछ वर्षों में ड्राई आइज के मामलों में 40% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।आंखों की यह स्थिति धीरे-धीरे कॉर्निया डैमेज, इन्फेक्शन और विजन लॉस (दृष्टि हानि) तक ले जा सकती है।

Digital Screen Time बना सबसे बड़ा कारण

National Eye Institute  की रिपोर्ट के अनुसार,शहरी युवाओं में ड्राई आइज का सबसे बड़ा कारण डिजिटल स्क्रीन है।औसतन एक व्यक्ति रोजाना 6 से 8 घंटे मोबाइल, टीवी या लैपटॉप स्क्रीन पर बिताता है।स्क्रीन पर लगातार देखने से पलक झपकाने की दर  घट जाती है —सामान्यतः हम प्रति मिनट 15-20 बार पलकें झपकाते हैं,
लेकिन स्क्रीन पर फोकस करने के दौरान यह घटकर 6-8 बार रह जाती है,जिससे आंखों की नमी कम हो जाती है और उनमें सूखापन बढ़ता है।

एसी की हवा आंखों की नमी को सुखा रही है

AC में लंबे समय तक रहना भी Dry Eyes का एक प्रमुख कारण है। American Optometric Association के अनुसार,Low Humidity वाले वातावरण में ड्राई आइज का खतरा 50% तक बढ़ जाता है।ऐसे में कमरे में ह्यूमिडिफायर का उपयोग करना याथोड़ी-थोड़ी देर में एसी बंद करना आंखों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

नींद की कमी भी आंखों के लिए हानिकारक

कम नींद लेने से आंखों की मांसपेशियां आराम नहीं कर पातीं,जिससे आंखों में थकान, सूखापन और जलन होती है।
शोध बताते हैं कि जो लोग रोज 5 घंटे से कम नींद लेते हैं,उनमें ड्राई आइज होने की संभावना दो गुना तक बढ़ जाती है।

कॉन्टैक्ट लेंस और पोषण की कमी भी बन रहे कारक

आंखों के विशेषज्ञों के अनुसार, कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले 50-60% लोगों में भी ड्राई आइज की समस्या पाई जाती है।साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए और पर्याप्त पानी की कमी भी इस समस्या को बढ़ाती है।ओमेगा-3 फैटी एसिड आंखों की नमी को बनाए रखता है,जबकि विटामिन ए कॉर्निया की सुरक्षा और पुनर्निर्माण में मदद करता है।

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