लखनऊ में 21वें रमजान के मौके पर शिया समुदाय की ओर से पारंपरिक मातमी जुलूस निकाला जा रहा है। नम आंखों के साथ हजारों अकीदतमंद हजरत अली की शहादत को याद करते हुए जुलूस में शामिल हो रहे हैं। इस दौरान लोग हजरत अली के ताबूत की जियारत कर रहे हैं और ‘या अली मौला’ तथा ‘हैदर मौला’ के नारे लगा रहे हैं।
यह जुलूस सआदतगंज स्थित नजफ इमामबाड़ा से शुरू होकर कर्बला तालकटोरा तक जाएगा। जुलूस में शामिल लोग नंगे पांव और काले कपड़े पहनकर मातम कर रहे हैं। महिला-पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं।
ताबूत की जियारत के लिए उमड़ी भीड़
जुलूस में फूलों की चादर से सजे हजरत अली के ताबूत को छूने और चूमने के लिए अकीदतमंदों में उत्साह दिखाई दे रहा है। हजारों लोग ताबूत के आसपास मौजूद हैं और जियारत करने की कोशिश कर रहे हैं।
‘या अली मौला’ के नारों से गूंजा इलाका
जुलूस में शामिल लोग ‘या अली मौला’ और ‘हैदर मौला’ के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। काले कपड़े पहने श्रद्धालु नंगे पांव मातम करते हुए जुलूस के साथ चल रहे हैं। कई बच्चे भी काले कपड़े पहनकर जुलूस में शामिल हुए।
हैदरगंज में परंपरा के अनुसार रोका जाएगा ताबूत
जुलूस के रास्ते में हैदरगंज इलाके में परंपरा के अनुसार कुछ देर के लिए ताबूत को रोका जाएगा। यहां कुएं के पास ताबूत पर काली चादर चढ़ाई जाएगी।
हजरत अली की शहादत की याद में निकलता है जुलूस
शिया समुदाय के अनुसार 19 रमजान को हजरत अली पर नमाज के दौरान हमला हुआ था। इसके बाद 21 रमजान को उनकी शहादत हुई थी। उसी घटना की याद में हर साल यह मातमी जुलूस निकाला जाता है।
जुलूस में बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग
सआदतगंज स्थित नजफ इमामबाड़ा से निकले इस जुलूस में हजारों अकीदतमंद शामिल हुए हैं। जुलूस के रास्ते में कई स्थानों पर लोग इसके इंतजार में खड़े दिखाई दिए ताकि वे भी इसमें शामिल हो सकें।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जुलूस को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के अनुसार जुलूस लगभग 6 किलोमीटर लंबा है और इसमें हजारों लोग शामिल हैं।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत
10 एडिशनल एसपी
30 डिप्टी एसपी
500 अतिरिक्त पुलिसकर्मी
12 कंपनी पीएसी
2 कंपनी RAF
CRPF बलतैनात किए गए हैं।
इसके अलावा 91 स्थानों पर रूफटॉप ड्यूटी लगाई गई है और 52 संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है।








