नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस में अधिकारियों के तबादले को लेकर हुए असामान्य पुलिस प्रदर्शन के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन में शामिल होने और उसका नेतृत्व करने वाले असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई सोमवार को पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर हुए प्रदर्शन के एक दिन बाद की गई। निलंबन की कार्रवाई अनुशासनात्मक आधार पर किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से निलंबन को लेकर तत्काल विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।
सोमवार को दिल्ली पुलिस के करीब 100 से 150 कर्मचारी शुरुआती तौर पर पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे थे। प्रदर्शनकारी ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार के तबादले का विरोध कर रहे थे। उनकी मांग थी कि दोनों अधिकारियों को पुरानी तैनाती पर वापस भेजा जाए। बाद में पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संवाद के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी मुख्यालय पहुंचे।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिस अधिकारी के तबादले का विरोध किया जा रहा था, वही अधिकारी प्रदर्शन में पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद थे। रिपोर्टों के मुताबिक, ACP मनस्वी वशिष्ठ ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया और पुलिसकर्मियों की ओर से अपनी मांगें वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखीं। यही वजह रही कि विभागीय स्तर पर इसे पुलिस बल के अनुशासन से जुड़ा गंभीर मामला माना गया और अगले ही दिन उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई सामने आई।
23 अक्टूबर की घटना से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प से हुई थी। इस घटना में अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी। इसके बाद जिला अदालतों के वकीलों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध शुरू कर दिया था। वकीलों की ओर से ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO अरुण कुमार पर दुर्व्यवहार और धमकी देने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। ये आरोप जांच का विषय हैं और किसी भी पक्ष की जिम्मेदारी अंतिम रूप से सक्षम जांच के बाद ही तय हो सकती है।
वकीलों के विरोध के बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया था। मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर सब-डिवीजन से स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वीमेन एंड चिल्ड्रन (SPUWAC) भेजे जाने की जानकारी सामने आई, जबकि इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सुरक्षा इकाई में स्थानांतरित किया गया। इन तबादलों के बाद वकीलों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया, लेकिन पुलिस विभाग के भीतर इन फैसलों को लेकर असंतोष पैदा होने लगा।
व्हाट्सऐप ग्रुप में संदेश, मुख्यालय पहुंचने की अपील
तबादले के विरोध में पुलिसकर्मियों को एकजुट करने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुपों के जरिए संदेश प्रसारित किए गए थे। पुलिसकर्मियों से पुलिस मुख्यालय पहुंचने और दोनों अधिकारियों की पुरानी पोस्टिंग बहाल करने की मांग उठाने की अपील की गई थी। अधिकारियों को जब इस प्रस्तावित प्रदर्शन की जानकारी मिली तो जिला DCP और विभिन्न यूनिट प्रमुखों को अपने अधीन तैनात पुलिसकर्मियों को मुख्यालय पहुंचने से रोकने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बावजूद सोमवार को बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर पहुंच गए। प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर नारे लगाए और तख्तियां भी प्रदर्शित कीं। मौके पर वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया गया। नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा ने भी पुलिसकर्मियों से विभागीय अनुशासन बनाए रखने और अपनी शिकायतें निर्धारित माध्यम से रखने की अपील की।
पुलिसकर्मियों ने उठाए कई मुद्दे
यह प्रदर्शन केवल दो अधिकारियों के तबादले तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने अदालतों में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित व्यवहार, वकीलों से जुड़े विवादों में पुलिस पर पड़ने वाले दबाव और कर्मचारियों की शिकायतों के लिए प्रभावी तंत्र की जरूरत जैसे मुद्दे भी उठाए। कुछ पुलिसकर्मियों ने वर्दी और पुलिस बल की गरिमा से जुड़े सवाल भी उठाए।
बाद में पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ संवाद किया। इस दौरान सेवा से जुड़े मुद्दों, पदोन्नति, MACP, आवास और अन्य समस्याओं को सुनने तथा उनके समाधान की प्रक्रिया मजबूत करने की बात सामने आई। दिल्ली पुलिस की ओर से बार एसोसिएशन और बार काउंसिल के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त समन्वय समिति बनाने की बात भी कही गई है, ताकि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी से जुड़े विवादों को संस्थागत स्तर पर सुलझाया जा सके।
ACP का प्रदर्शन में शामिल होना बना कार्रवाई की वजह
पुलिस विभाग में किसी अधिकारी का इस तरह खुले तौर पर अपने तबादले के विरोध में पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन में शामिल होना इस मामले को सामान्य स्थानांतरण विवाद से अलग बनाता है। पुलिस बल एक अनुशासित संगठन है और अधिकारियों तथा कर्मचारियों के लिए अपनी शिकायतें रखने की निर्धारित विभागीय प्रक्रिया होती है। ऐसे में प्रदर्शन में ACP स्तर के अधिकारी की मौजूदगी को विभागीय अनुशासन के संदर्भ में गंभीरता से लिया गया।
इसी घटनाक्रम के बाद मंगलवार को ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की जानकारी सामने आई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कार्रवाई सोमवार के प्रदर्शन में उनकी भूमिका को लेकर की गई है। हालांकि, निलंबन आदेश के विस्तृत कारण और उनके खिलाफ आगे की विभागीय प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी आधिकारिक तौर पर सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट होगी।
2019 के पुलिस-वकील विवाद की याद हुई ताजा
दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच टकराव का इतिहास भी इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है। वर्ष 2019 में तीस हजारी कोर्ट विवाद के बाद भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। मौजूदा घटनाक्रम के दौरान 2019 के उस विरोध प्रदर्शन का संदर्भ भी सामने आया। हालांकि, मौजूदा मामले में परिस्थितियां अलग हैं और इस बार तत्काल विवाद 23 अक्टूबर की शाहदरा थाने की घटना तथा उसके बाद हुए अधिकारियों के तबादले से जुड़ा है।
फिलहाल ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद दिल्ली पुलिस में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर पुलिसकर्मियों की ओर से अधिकारियों के तबादले और कार्यस्थल से जुड़ी शिकायतों को लेकर आवाज उठाई गई, वहीं दूसरी ओर विभाग ने अपने अनुशासनात्मक ढांचे के तहत ACP के खिलाफ कार्रवाई की है। अब आगे विभागीय जांच में यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन में उनकी भूमिका को लेकर कौन-कौन से आरोप निर्धारित किए जाते हैं और उनके खिलाफ क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।
यह मामला दिल्ली पुलिस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पुलिसकर्मियों की शिकायतों को सुनने के लिए संस्थागत व्यवस्था और बल के अनुशासन, दोनों सवाल एक साथ सामने आए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से शिकायतों के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद अब उस व्यवस्था के वास्तविक क्रियान्वयन पर भी नजर रहेगी। वहीं ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई इस विवाद की अगली कड़ी होगी।