नेपाल के डोल्पा जिले की जिला जेल से सुरंग खोदकर आठ कैदियों के फरार होने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। शुरुआती खबरों में छह कैदियों के फरार होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन नेपाल से सामने आई बाद की रिपोर्टों के अनुसार अब कुल आठ कैदियों के फरार होने की पुष्टि हुई है। इनमें दुष्कर्म के मामलों में सजा काट रहे पांच कैदी, चोरी के मामले में सजा काट रहा एक कैदी और चोरी के मामलों में विचाराधीन दो बंदी शामिल हैं।
घटना नेपाल के कर्णाली प्रांत के डोल्पा जिले के मुख्यालय दुनई स्थित जिला कारागार की है। रिपोर्टों के मुताबिक कैदी शुक्रवार रात जेल से फरार हुए। शनिवार सुबह करीब 6 बजे नियमित कैदी गिनती के दौरान संख्या कम मिलने पर जेल प्रशासन को घटना की जानकारी हुई। इसके बाद जेल परिसर की जांच की गई तो कैदियों के कमरे से बाहर निकलने के लिए बनाई गई सुरंग का पता चला।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कैदियों ने जेल परिसर के भीतर से बाहरी हिस्से तक करीब चार से साढ़े चार मीटर लंबी सुरंग बनाई थी। नेपाल की अलग-अलग रिपोर्टों में सुरंग की लंबाई लगभग 4 से 4.63 मीटर बताई गई है। सुरंग के जरिए कैदी जेल की बाहरी दीवार के पार निकलने में कामयाब हुए। घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नेपाल पुलिस ने फरार कैदियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। पुलिस संभावित रास्तों, निकास बिंदुओं और आसपास के इलाकों में तलाशी ले रही है। जेल परिसर के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कैदियों ने सुरंग कब और किस तरह तैयार की तथा फरार होने के दौरान उन्हें किसी बाहरी मदद मिली थी या नहीं।
मामले की जांच के लिए नेपाल में तीन सदस्यीय जांच समिति भी गठित की गई है। जांच का एक प्रमुख बिंदु जेल की सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक है। अधिकारियों के मुताबिक यह भी देखा जा रहा है कि जेल में तैनात सुरक्षा कर्मियों को सुरंग खोदने की भनक क्यों नहीं लगी और निगरानी व्यवस्था के बावजूद कैदी इतने लंबे रास्ते तक सुरंग बनाने में कैसे सफल रहे।
फरार कैदियों में पांच दुष्कर्म के मामलों में दोषी ठहराए जा चुके बताए जा रहे हैं। एक कैदी चोरी के मामले में सजा काट रहा था, जबकि दो अन्य चोरी के मामलों में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक विचाराधीन बंदी के तौर पर जेल में रखे गए थे। नेपाल पुलिस ने सभी फरार लोगों की पहचान और तस्वीरों को तलाश अभियान में इस्तेमाल करने की जानकारी दी है।
इस जेल ब्रेक के बाद भारत की सीमा से लगे इलाकों को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी है। भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण फरार कैदियों के नेपाल के अलग-अलग हिस्सों से सीमावर्ती क्षेत्रों की ओर आने की आशंका को देखते हुए सीमा क्षेत्र में निगरानी बढ़ाए जाने की खबरें हैं। महराजगंज से लगे सोनौली-बेलहिया क्षेत्र सहित सीमावर्ती मार्गों और संभावित आवाजाही वाले रास्तों पर विशेष सतर्कता की बात सामने आई है।
महराजगंज जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार जिले की सीमा नेपाल से लगती है और सोनौली भारत-नेपाल सीमा का प्रमुख प्रवेश द्वार है। जिले में सोनौली सहित कई सीमावर्ती थाने हैं। भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और अवैध आवाजाही पर निगरानी की जिम्मेदारी में सशस्त्र सीमा बल की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
फरार कैदियों के भारत में प्रवेश की आशंका फिलहाल एक सुरक्षा चिंता के तौर पर सामने आई है। अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि इनमें से कोई कैदी भारतीय सीमा में दाखिल हुआ है। इसलिए सीमा पर बढ़ाई गई चौकसी को संभावित घुसपैठ या आवाजाही की आशंका के मद्देनजर की जा रही सतर्कता के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि इस रूप में कि कोई फरार कैदी भारत पहुंच चुका है।
सोनौली और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में मुख्य मार्गों के साथ-साथ उन रास्तों पर भी निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है जिनका इस्तेमाल लोग नियमित आवागमन के लिए करते हैं। भारत-नेपाल सीमा पर कई स्थानों पर स्थानीय स्तर पर लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि सामान्य आवाजाही प्रभावित किए बिना संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
नेपाल में जेल से आठ कैदियों के इस तरह फरार होने की घटना ने वहां की जेल सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक घटना के समय जेल में कुल 17 कैदी और विचाराधीन बंदी थे, जिनमें से आठ फरार हो गए। जेल की निगरानी, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, सीसीटीवी व्यवस्था और नियमित निरीक्षण को लेकर जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि सुरंग खोदने के लिए कैदियों ने किन साधनों का इस्तेमाल किया। सुरंग का आकार और लंबाई यह संकेत देती है कि फरारी अचानक लिया गया फैसला नहीं थी, बल्कि इसके लिए पहले से तैयारी की गई हो सकती है। हालांकि कैदियों ने कितने समय तक सुरंग खोदी और इस दौरान उन्हें किसी व्यक्ति से सहायता मिली या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल नेपाल पुलिस फरार कैदियों को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों और रास्तों पर अभियान चला रही है। दूसरी तरफ भारत की सीमा से जुड़े इलाकों में भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। महराजगंज के सोनौली क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना को गंभीरता से लेने और नेपाल से आने-जाने वाले मार्गों पर निगरानी बनाए रखने की जरूरत बढ़ गई है।
यह घटना एक बार फिर भारत-नेपाल की खुली सीमा की सुरक्षा चुनौतियों को सामने लाती है। दोनों देशों के बीच सामाजिक और आर्थिक स्तर पर लगातार आवाजाही होती है, लेकिन किसी अपराधी के फरार होने जैसी स्थिति में यही खुली सीमा सुरक्षा एजेंसियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाती है। ऐसे मामलों में दोनों देशों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना और संभावित निकास मार्गों पर समन्वित निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि डोल्पा जेल से फरार हुए आठों कैदी कहां हैं और क्या उनमें से कोई नेपाल के सीमावर्ती इलाके की ओर बढ़ा है। नेपाल में तलाश अभियान जारी है, जबकि भारत-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी बनाए हुए हैं। जब तक फरार कैदी पकड़े नहीं जाते, सीमा क्षेत्र में सतर्कता बनाए रखना सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।