“उत्तर कोरिया ने स्टैंडर्ड टाइप-2 क्लस्टर बम का सफल परीक्षण किया है। यह बैलिस्टिक मिसाइल से दागा जा सकता है और 12-13 हेक्टेयर क्षेत्र में भारी तबाही मचाने में सक्षम बताया गया है।“
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए घातक क्लस्टर बम का सफल परीक्षण किया है। इस नए हथियार को बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए दागा जा सकता है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के मुताबिक, परीक्षण किए गए क्लस्टर बम की मारक क्षमता काफी अधिक है। दावा किया गया है कि यह एक बार में 12 से 13 हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूद जान-माल को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम है।
इस परीक्षण को उत्तर कोरिया के सैन्य हथियारों के आधुनिकीकरण की कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि बैलिस्टिक मिसाइल के साथ इस्तेमाल किए जाने की क्षमता के कारण यह हथियार उत्तर कोरियाई सेना की मौजूदा मारक क्षमता को बढ़ा सकता है।
क्या होता है क्लस्टर बम और क्यों माना जाता है इतना खतरनाक?
क्लस्टर बम सामान्य बमों से अलग तरीके से काम करता है। इसमें एक बड़े बम के भीतर कई छोटे विस्फोटक बम रखे जाते हैं। जब इसे लक्ष्य के ऊपर छोड़ा जाता है तो मुख्य बम खुलकर अपने भीतर मौजूद छोटे-छोटे बमों को बड़े क्षेत्र में फैला देता है। इसके बाद ये छोटे विस्फोटक अलग-अलग स्थानों पर फटते हैं और व्यापक क्षेत्र में तबाही मचाते हैं।
इनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई छोटे बम जमीन से कुछ ऊंचाई पर ही विस्फोट करते हैं। इससे खुले इलाकों में मौजूद लोगों, सैन्य ठिकानों और आसपास के ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है। कई बार कुछ छोटे विस्फोटक तत्काल नहीं फटते और जमीन पर पड़े रह जाते हैं। ऐसे बम युद्ध समाप्त होने के बाद भी नागरिकों के लिए जानलेवा बने रहते हैं।
अधिकांश देशों ने क्लस्टर बम के इस्तेमाल पर लगाई है रोक
क्लस्टर बमों से होने वाली व्यापक मानवीय तबाही को देखते हुए दुनिया के कई देशों ने इनके इस्तेमाल, उत्पादन और भंडारण पर प्रतिबंध लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते का समर्थन किया है। वर्ष 2008 में क्लस्टर म्यूनिशन कन्वेंशन (Convention on Cluster Munitions) को अपनाया गया था। यह समझौता 2010 में लागू हुआ।
इस संधि के तहत सदस्य देशों ने क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल, विकास, उत्पादन, अधिग्रहण और भंडारण पर प्रतिबंध स्वीकार किया है। हालांकि, सभी देश इस समझौते के सदस्य नहीं हैं। इसलिए दुनिया भर में इन हथियारों के इस्तेमाल पर एक समान कानूनी प्रतिबंध लागू नहीं है।
रूस और इजरायल पर भी क्लस्टर बम इस्तेमाल के आरोप
क्लस्टर बमों के इस्तेमाल को लेकर पहले भी कई युद्ध क्षेत्रों में विवाद सामने आ चुके हैं। यूक्रेन ने रूस पर युद्ध के दौरान क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। इसी तरह गाजा में सैन्य कार्रवाई के दौरान इजरायल पर भी ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को लेकर आरोप लगाए गए हैं।
इन हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चिंता जताई जाती रही है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि इनके विस्फोट से प्रभावित क्षेत्र में लंबे समय तक नागरिकों की सुरक्षा का खतरा बना रह सकता है।
उत्तर कोरियाई सेना में इसी साल शामिल करने की तैयारी
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के अनुसार, परीक्षण किया गया हथियार शक्तिशाली स्टैंडर्ड टाइप-2 क्लस्टर बम है। एजेंसी ने दावा किया है कि इसे चालू वर्ष में सेना के शस्त्रागार में शामिल किया जा सकता है। इससे उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमताओं में और इजाफा होने की संभावना जताई गई है।
हालांकि, इस हथियार की वास्तविक क्षमता और परीक्षण से जुड़े तकनीकी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
दक्षिण कोरिया ने अमेरिका के साथ साझा की परीक्षण की जानकारी
उत्तर कोरिया के इस परीक्षण की जानकारी सामने आने के बाद दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसियों ने घटनाक्रम का आकलन किया। इसके बाद दक्षिण कोरिया ने परीक्षण से संबंधित जानकारी अमेरिका के साथ साझा की।
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने भी परीक्षण की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। ऐसे में उत्तर कोरिया की ओर से नए हथियारों का परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए क्लस्टर बम का परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य गतिविधियों और हथियारों के विकास को लेकर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। आने वाले समय में इस घटनाक्रम पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।
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