अयोध्या में मां सरयू की स्वच्छता और निर्मलता को लेकर 31 अक्टूबर को बड़े स्तर पर जनभागीदारी अभियान आयोजित किया जाएगा। नगर निगम की ओर से सरयू तट पर मां सरयू महा स्वच्छता अभियान की तैयारी की जा रही है। इस अभियान में करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें शहर के अलग-अलग सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक वर्गों के लोग श्रमदान करेंगे।
अभियान में अधिवक्ता, व्यापारी, किसान, संत-महंत, तीर्थ पुरोहित, मांझी समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में युवा शामिल होंगे। उद्देश्य सरयू तट की सफाई के साथ नदी की स्वच्छता के प्रति लोगों में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करना है। नगर निगम इस पहल को जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है।
पांच हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य
मां सरयू महा स्वच्छता अभियान में लगभग पांच हजार लोगों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके लिए शहर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों से संपर्क किया जा रहा है। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधियों से संवाद कर अभियान में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल की है।
इस अभियान में केवल सफाईकर्मियों की भूमिका नहीं होगी, बल्कि आम नागरिक भी श्रमदान करेंगे। अधिवक्ताओं, व्यापारियों, किसानों और युवाओं की भागीदारी से इसे सामूहिक प्रयास बनाने पर जोर दिया जा रहा है। संत-महंत और तीर्थ पुरोहित भी लोगों को सरयू की स्वच्छता के लिए प्रेरित करेंगे।
अयोध्या में सरयू नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में नदी और उसके तटों की स्वच्छता स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य लोगों को स्वच्छता अभियान से सीधे जोड़ना है।
मणि पर्वत पर चला विशेष सफाई अभियान
महा स्वच्छता अभियान से पहले नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को नगर आयुक्त की अगुवाई में मणि पर्वत पर विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस दौरान नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सफाई कार्य में हिस्सा लिया।
मणि पर्वत पर चलाए गए अभियान के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक धरोहरों को स्वच्छ रखने का संदेश दिया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने लोगों से अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की। साथ ही 31 अक्टूबर को होने वाले महा अभियान में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
यह पहल सरयू तट पर प्रस्तावित बड़े स्वच्छता अभियान की तैयारियों का हिस्सा है। नगर निगम की कोशिश है कि सफाई का संदेश केवल एक दिन तक सीमित न रहे। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों और संगठनों के लोगों को लगातार जोड़ा जा रहा है।
तीर्थ पुरोहित और मांझी समाज से संवाद
अभियान में सामाजिक भागीदारी बढ़ाने के लिए महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने गुरुवार को एक बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक दुर्गेश पांडेय के नेतृत्व में आयोजित की गई थी। इसमें तीर्थ पुरोहित और मांझी समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में महापौर ने दोनों समाजों से सरयू की स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी मानने की अपील की। उन्होंने कहा कि मां सरयू की निर्मलता बनाए रखने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने प्रतिनिधियों से महा अभियान में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया।
बैठक में लोगों को अभियान से जोड़ने और अधिकाधिक श्रमदान कराने पर जोर दिया गया। तीर्थ पुरोहित और मांझी समाज की भागीदारी को इस अभियान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन समुदायों का सरयू तट और उससे जुड़ी गतिविधियों से सीधा संबंध है।
जनभागीदारी से स्वच्छता को आंदोलन बनाने की पहल
नगर निगम का प्रयास है कि सरयू की स्वच्छता केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी बनकर न रह जाए। इसके लिए नागरिकों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं को एक साथ लाने की योजना बनाई गई है। पांच हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए नागरिकों का सहयोग जरूरी होता है। नदी तट पर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की जागरूकता भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। सामूहिक श्रमदान के जरिए लोगों को सफाई के काम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
31 अक्टूबर को होने वाला अभियान अयोध्या में सरयू स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी का बड़ा आयोजन होगा। इसमें विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ श्रमदान करेंगे। नगर निगम की तैयारियों और महापौर के संवाद के बाद अब अभियान में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी जुटाने पर ध्यान केंद्रित है।
मां सरयू की स्वच्छता और निर्मलता के संकल्प के साथ अयोध्या के अलग-अलग वर्गों को एक मंच पर लाने की यह पहल महत्वपूर्ण है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लोग आयोजन के बाद भी नदी और उसके तटों की स्वच्छता बनाए रखने में कितनी निरंतर भागीदारी निभाते हैं।