प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में वकीलों की नारेबाजी और हंगामे को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को अदालत की कार्यवाही के दौरान कोर्ट के बाहर गलियारे में कुछ अधिवक्ताओं द्वारा कथित तौर पर नारेबाजी और शोर-शराबा किए जाने से न्यायिक कार्यवाही प्रभावित हुई। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को सीसीटीवी फुटेज की जांच कर हंगामे में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने इस तरह के आचरण को गंभीर और अवमाननापूर्ण माना है। आदेश में कहा गया कि किसी विशेष अदालत या न्यायाधीश से संबंधित शिकायत के कारण अन्य अदालतों की कार्यवाही बाधित नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नारेबाजी, शोर-शराबा और ऐसी गतिविधियां, जिनसे न्यायिक कार्य प्रभावित हो या अदालत को डराने-धमकाने का प्रयास प्रतीत हो, स्वीकार्य नहीं हैं।
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जिन अधिवक्ताओं की पहचान होगी, उनके खिलाफ आगे उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला भेजा जा सकता है। इसके साथ ही उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू किए जाने की संभावना है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को निर्धारित की गई है।
कोर्ट नंबर 49 के विवाद के बाद बढ़ा तनाव
पूरा विवाद मंगलवार को कोर्ट नंबर 49 में हुई एक घटना के बाद शुरू हुआ। इस अदालत में न्यायमूर्ति अजय भनोट सुनवाई कर रहे थे। घटना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर आपत्ति जताई थी और संबंधित अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।
बार एसोसिएशन की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, अदालत में बैठने की व्यवस्था को लेकर एक अधिवक्ता और पुलिस अधिकारी के बीच स्थिति बनी थी। एसोसिएशन का कहना है कि अधिवक्ता ने पुलिस अधिकारी से निर्धारित स्थान पर बैठने का अनुरोध किया था। इसके बाद अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता ने कथित तौर पर इस मामले को न्यायाधीश के संज्ञान में लाने की बात कही।
एसोसिएशन के पत्र के अनुसार, न्यायमूर्ति अजय भनोट के अदालत में आने के बाद अधिवक्ता को लेकर विवाद बढ़ा। पत्र में आरोप लगाया गया कि अधिवक्ता को जेल भेजने की बात कही गई और बाद में पुलिस अधिकारी से माफी मांगने के लिए कहा गया। एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि अदालत में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव के साथ भी टिप्पणी की गई। हालांकि, ये आरोप बार एसोसिएशन की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें अदालत की ओर से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बार एसोसिएशन ने किया था बहिष्कार का ऐलान
घटना के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की मांग की थी। एसोसिएशन ने कहा था कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है तो कोर्ट नंबर 49 का बहिष्कार किया जाएगा। इसी विवाद की पृष्ठभूमि में बुधवार को अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
रिपोर्टों के मुताबिक विरोध के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर में नारेबाजी की और स्थिति हंगामे में बदल गई। कुछ रिपोर्टों में कोर्ट नंबर 49 के अंदर फर्नीचर को नुकसान पहुंचाने और सामान फेंके जाने की भी जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं की जिम्मेदारी और इसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान का अंतिम निर्धारण जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर होना है।
नारेबाजी से दूसरी कोर्ट की कार्यवाही हुई प्रभावित
हंगामे का असर सिर्फ संबंधित अदालत तक सीमित नहीं रहा। जिस समय यह विरोध प्रदर्शन चल रहा था, उसी दौरान न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की कोर्ट नंबर 66 में एक मामले की सुनवाई चल रही थी। गलियारे में हो रही नारेबाजी और शोर की वजह से वहां चल रही न्यायिक कार्यवाही प्रभावित हुई।
जस्टिस देशवाल की पीठ के समक्ष देवेंद्र कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान कोर्ट के बाहर कुछ अधिवक्ताओं के जोर-जोर से बोलने और नारे लगाने की जानकारी अदालत के संज्ञान में आई। अदालत ने इसे न्यायिक कार्य में सीधा हस्तक्षेप माना।
कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि हाईकोर्ट में दूर-दराज से मुकदमों की सुनवाई के लिए आने वाले वादकारियों का न्यायिक कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। किसी विशेष अदालत के संबंध में अधिवक्ताओं की शिकायत या असहमति का असर दूसरी अदालतों की सुनवाई पर नहीं पड़ना चाहिए।
सीसीटीवी से होगी हंगामा करने वालों की पहचान
मामले में अब सीसीटीवी फुटेज अहम साक्ष्य के तौर पर सामने आया है। जस्टिस देशवाल ने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को निर्देश दिया है कि संबंधित क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज हासिल कर हंगामे और नारेबाजी में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान की जाए। इसके बाद रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाएगी।
अदालत के निर्देश के मुताबिक पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जा सकता है। इसके अलावा अवमानना की कार्यवाही भी शुरू हो सकती है। यानी फिलहाल कार्रवाई की प्रक्रिया पहचान और रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी।
कोर्ट ने माना आचरण अवमाननापूर्ण
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति देशवाल ने अदालत की कार्यवाही में इस तरह के व्यवधान को गंभीर माना। कोर्ट के अनुसार, किसी खास अदालत को लेकर समस्या होने के बावजूद अधिवक्ताओं को अन्य अदालतों की कार्यवाही बाधित करने, नारे लगाने, शोर करने या अदालत को डराने-धमकाने की प्रकृति वाले शब्दों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पीठ ने इस आचरण को पूरी तरह अनुचित बताते हुए इसे अवमाननापूर्ण माना है। इसके बाद ही सीसीटीवी फुटेज के जरिए संबंधित अधिवक्ताओं की पहचान करने और आगे की कार्रवाई की दिशा में कदम उठाया गया है।
यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सीधे न्यायिक कार्यवाही की गरिमा और अदालत परिसर में अनुशासन से जुड़ा है। कोर्ट परिसर में विरोध या असहमति दर्ज कराने के अधिकार और न्यायिक कार्य को बाधित करने के बीच अंतर को लेकर भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
19 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले में अब सीसीटीवी फुटेज की जांच और संबंधित अधिवक्ताओं की पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को रिपोर्ट तैयार कर अदालत के समक्ष पेश करनी है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।
अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि सीसीटीवी फुटेज से कितने अधिवक्ताओं की पहचान होती है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तावित की जाती है। यदि पहचान होने के बाद मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जाता है तो वहां भी संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ पेशेवर अनुशासन से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं हाईकोर्ट में अवमानना की कार्रवाई का प्रश्न भी सामने आ सकता है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में दो अलग-अलग पहलू सामने हैं। पहला, कोर्ट नंबर 49 में हुई घटना को लेकर बार एसोसिएशन की आपत्तियां और प्रस्तावित बहिष्कार। दूसरा, उसके विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान अन्य अदालत की कार्यवाही बाधित होने पर हाईकोर्ट की ओर से लिया गया सख्त रुख। दोनों मामलों में संबंधित आरोपों और घटनाक्रम को उनके संबंधित पक्षों के बयान और न्यायिक रिकॉर्ड के संदर्भ में ही देखा जाना जरूरी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस रुख से स्पष्ट है कि न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान को लेकर अदालत गंभीर है और अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।