लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ में अब घुड़सवारी और पोलो जैसे पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हो गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने गोमती नगर में इक्वेस्ट्रियन फार्म और पोलो ग्राउंड के विकास, संचालन और रखरखाव के लिए टेंडर जारी किया है। इस परियोजना के जरिए शहर में घुड़सवारी से जुड़ी गतिविधियों और पोलो जैसे रोमांचक खेल के लिए सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
उत्तर प्रदेश सरकार की राजधानी में खेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह परियोजना एक नई पहल हो सकती है। पोलो घोड़ों पर बैठकर खेला जाने वाला ऐसा खेल है, जिसमें खिलाड़ियों की गति, संतुलन, घुड़सवारी और टीम के बीच तालमेल की अहम भूमिका होती है। लखनऊ में इसके लिए समर्पित मैदान विकसित होने से इस खेल में रुचि रखने वाले लोगों को भविष्य में नया विकल्प मिलने की उम्मीद है।
गोमती नगर में विकसित होगा इक्वेस्ट्रियन फार्म
एलडीए की ओर से जारी निविदा का शीर्षक “Conceptualization, Development, Operations and Maintenance of Equestrian Farm with Polo Ground, Gomti Nagar, Lucknow” है। इसका उद्देश्य गोमती नगर में इक्वेस्ट्रियन फार्म और पोलो ग्राउंड की अवधारणा तैयार करने, विकास करने, संचालन और रखरखाव के लिए एजेंसी का चयन करना है।
सरकारी ई-टेंडर पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निविदा 5 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की गई थी। बाद में इसकी समयसीमा बढ़ाई गई। अब निविदा जमा करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 और तकनीकी बोली खोलने की तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित है।
इसका मतलब है कि फिलहाल परियोजना के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर जारी होने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि मैदान का निर्माण पूरा हो गया है या खेल गतिविधियां शुरू होने की तारीख तय हो चुकी है।
क्या होता है पोलो और क्यों है खास?
पोलो घुड़सवारी से जुड़ा एक पारंपरिक खेल है। इसमें खिलाड़ी घोड़े पर सवार होकर लंबे डंडे की मदद से गेंद को विरोधी टीम के गोल की ओर पहुंचाने का प्रयास करते हैं। खेल के दौरान तेज गति से दौड़ते घोड़ों पर नियंत्रण, खिलाड़ियों के बीच तालमेल और सटीक निशाना बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
इस खेल के लिए खुले और उपयुक्त मैदान के साथ घोड़ों की देखभाल, प्रशिक्षण तथा सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की जरूरत होती है। इक्वेस्ट्रियन फार्म और पोलो ग्राउंड जैसी परियोजना इन गतिविधियों के लिए आधार तैयार कर सकती है। हालांकि, लखनऊ में प्रस्तावित परिसर में कौन-कौन सी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित होंगी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
लखनऊ के खेल परिदृश्य में जुड़ सकता है नया अध्याय
लखनऊ में क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन और अन्य खेलों के अलावा घुड़सवारी तथा पोलो जैसी गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित होने से खेलों का दायरा बढ़ सकता है। यदि प्रस्तावित परियोजना विकसित होकर संचालित होती है, तो इससे इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को अवसर मिलने की संभावना है।
पोलो के लिए विशेष प्रशिक्षण, घोड़ों की देखभाल और नियमित खेल गतिविधियों की जरूरत होती है। इसलिए परियोजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि मैदान का विकास किस तरह किया जाता है और उसके संचालन की योजना में खिलाड़ियों तथा आम लोगों के लिए क्या सुविधाएं रखी जाती हैं।
अभी टेंडर प्रक्रिया, निर्माण की समयसीमा का इंतजार
एलडीए की निविदा में परियोजना के विकास के साथ संचालन और रखरखाव भी शामिल है। आधिकारिक निविदा रिकॉर्ड में कार्य अवधि 5,475 दिन दर्ज है, जो लगभग 15 वर्ष होती है। यह निविदा में उल्लिखित कार्य अवधि है; इसे मैदान के निर्माण की समयसीमा नहीं समझना चाहिए।
फिलहाल एजेंसी चयन और परियोजना की आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। निर्माण कब शुरू होगा, मैदान कब तक तैयार होगा और यहां पोलो या घुड़सवारी की गतिविधियां कब शुरू होंगी, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
कुल मिलाकर, गोमती नगर में इक्वेस्ट्रियन फार्म और पोलो ग्राउंड विकसित करने की एलडीए की पहल लखनऊ के खेल ढांचे में एक नया विकल्प जोड़ सकती है। अब शहरवासियों को इस परियोजना के अगले चरणों और इसके वास्तविक स्वरूप की जानकारी का इंतजार रहेगा।