लखनऊ। राजधानी के सआदतगंज थाना क्षेत्र के नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में सोमवार सुबह पार्किंग और बरगद के पेड़ के पास चबूतरा बनाने को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने खूनी रूप ले लिया। कहासुनी और मारपीट के बाद पड़ोस में रहने वाले ऋषभ शुक्ला पर पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग करने का आरोप है। गोली लगने से एक ही परिवार के शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र उर्फ शंभू तिवारी और बेटे सुयश तिवारी की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने आरोपी ऋषभ शुक्ला को हिरासत में लेकर वारदात में इस्तेमाल पिस्टल बरामद कर ली है। घटनास्थल से चार खोखे भी मिलने की पुष्टि हुई है।
पुलिस के मुताबिक घटना सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े दस बजे हुई। नौबस्ता के ब्राह्मणी टोला में एक खाली स्थान पर वाहन खड़ा करने और बरगद के पेड़ के पास बने या बनाए जा रहे चबूतरे को लेकर तिवारी और शुक्ला परिवार के बीच पहले से विवाद चला आ रहा था। सोमवार को इसी मुद्दे पर दोनों पक्ष एक बार फिर आमने-सामने आ गए।
शुरुआती जांच के अनुसार कहासुनी के बाद विवाद बढ़ा और मारपीट की स्थिति बन गई। आरोप है कि इसी दौरान ऋषभ शुक्ला ने पिस्टल निकालकर लगातार फायरिंग कर दी। गोलियां शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी और बेटे सुयश तिवारी को लगीं। गोलीबारी के बाद गली में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।
तीनों घायलों को एंबुलेंस और पुलिस वाहनों की मदद से किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने इलाज के दौरान तीनों को मृत घोषित कर दिया। शुरुआती रिपोर्टों में दो लोगों की मौत और तीसरे की हालत गंभीर बताई गई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने तीनों की मौत की पुष्टि कर दी।
मृतकों की पहचान करीब 62 वर्षीय शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र उर्फ शंभू तिवारी और करीब 30 वर्षीय सुयश तिवारी के रूप में की गई है। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में उम्र को लेकर मामूली अंतर सामने आया है, लेकिन पुलिस ने तीनों के नाम और एक ही परिवार से होने की पुष्टि की है।
शिवाजी तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे थे। स्थानीय संघ कार्यकर्ताओं के अनुसार वह लखनऊ पश्चिम क्षेत्र में सह जिला कार्यवाह की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे। उनके बिजली विभाग से सेवानिवृत्त होने की जानकारी सामने आई है। उनके भाई शिवेंद्र तिवारी के लखनऊ विश्वविद्यालय में कर्मचारी रहने की जानकारी है, जबकि सुयश तिवारी कारोबार से जुड़े थे।
घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि सुयश की जल्द शादी होने वाली थी। परिवार में विवाह की तैयारियां चल रही थीं और दिसंबर में विवाह प्रस्तावित बताया गया है। जिस घर में कुछ ही समय बाद शादी की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां सोमवार को तीन अर्थियां उठने की स्थिति बन गई। घटना के बाद परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ था। दोनों परिवारों के बीच पार्किंग और जमीन के इस्तेमाल को लेकर पहले से तनाव था। स्थानीय लोगों के अनुसार बरगद के पेड़ के पास खाली स्थान पर वाहन खड़ा करने और वहां चबूतरा बनाने को लेकर कई बार कहासुनी हो चुकी थी। कुछ रिपोर्टों में विवाद कई वर्षों पुराना बताया गया है। हालांकि पुरानी रंजिश की सटीक अवधि और उससे जुड़े सभी पुराने मामलों की पुलिस अभी जांच कर रही है।
सोमवार को विवाद तब बढ़ा जब तिवारी परिवार की ओर से बरगद के पेड़ के आसपास चबूतरे से संबंधित काम किए जाने की बात सामने आई। दूसरे पक्ष ने इसका विरोध किया। इसी दौरान वाहन खड़ा करने को लेकर भी बहस हुई।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि दोनों विवाद वास्तव में एक ही जमीन से जुड़े थे या पार्किंग और चबूतरे के मुद्दे अलग-अलग समय पर तनाव की वजह बने थे।
घटना के चश्मदीदों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि फायरिंग से ठीक पहले की पूरी घटनाक्रम श्रृंखला स्पष्ट हो सके।
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि आरोपी ऋषभ शुक्ला घटना के बाद भाग नहीं सका। पुलिस के मुताबिक उसे घटनास्थल के आसपास से ही हिरासत में ले लिया गया। उसके कब्जे या घटनास्थल से वारदात में इस्तेमाल पिस्टल और चार खाली कारतूस बरामद किए गए हैं।
पुलिस अब हथियार की कानूनी स्थिति भी जांच रही है। शुरुआती रिपोर्टों में पिस्टल को अवैध बताया गया है, लेकिन हथियार के लाइसेंस और स्रोत की विस्तृत जांच के बाद ही इसकी अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
आरोपी ऋषभ शुक्ला का मर्चेंट नेवी से संबंध बताया जा रहा है। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में उसे मर्चेंट नेवी में कार्यरत बताया गया, जबकि अन्य में उसके पहले नेविगेशन ऑफिसर के तौर पर काम करने की बात कही गई है। पुलिस आरोपी के पेशे और पृष्ठभूमि से जुड़े विवरणों का भी सत्यापन कर रही है। इसलिए उसके वर्तमान रोजगार की स्थिति को जांच पूरी होने से पहले अंतिम तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। डीसीपी पश्चिम जितेंद्र श्रीवास्तव समेत कई अधिकारियों ने पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों से घटना की जानकारी ली। पूरे क्षेत्र को पुलिस ने घेरकर फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या और मृतकों में RSS से जुड़े पूर्व पदाधिकारी के शामिल होने के कारण पुलिस प्रशासन मामले को बेहद संवेदनशील मानकर चल रहा है।
हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक जांच में घटना का कारण स्थानीय पार्किंग और चबूतरे का विवाद सामने आया है। अभी तक किसी व्यापक राजनीतिक या सांप्रदायिक कारण की पुष्टि नहीं हुई है।
इस अंतर को समझना जरूरी है।
मृतक शिवाजी तिवारी का RSS से जुड़ाव उनकी पहचान का हिस्सा है, लेकिन वर्तमान पुलिस जांच में हत्या की वजह उनके संगठनात्मक जुड़ाव को नहीं बताया गया है।
पुलिस की शुरुआती जानकारी इसे पड़ोसियों के बीच पुराने स्थानीय विवाद से जोड़ती है।
इसलिए घटना को राजनीतिक हत्या के रूप में प्रस्तुत करना इस चरण में तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है कि वह हथियार लेकर क्यों आया, फायरिंग अचानक गुस्से में हुई या उसने पहले से इसकी तैयारी की थी, और घटना के दौरान वास्तव में कितनी गोलियां चलाई गईं।
फोरेंसिक टीम द्वारा मौके से जुटाए गए खोखे, हथियार और अन्य साक्ष्य भी इस जांच में महत्वपूर्ण होंगे।
पिस्टल की बैलिस्टिक जांच से यह पता लगाया जा सकेगा कि बरामद हथियार से ही घटनास्थल पर मिली गोलियां चलाई गई थीं या नहीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी तीनों मृतकों को लगी गोलियों की संख्या, प्रवेश और निकास घाव तथा मौत के चिकित्सकीय कारण को स्पष्ट करेगी।
घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे होने की स्थिति में पुलिस उनका फुटेज भी जुटा सकती है। इससे विवाद की शुरुआत, आरोपी की गतिविधियों और फायरिंग के क्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
पुलिस आसपास मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज कर रही है।
इस मामले में प्रत्यक्षदर्शी बयान इसलिए महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि शुरुआती रिपोर्टों में घटना के क्रम को लेकर थोड़ा अंतर सामने आया है।
कुछ लोगों का कहना है कि पहले पार्किंग को लेकर विवाद हुआ।
दूसरी जानकारी में चबूतरे के निर्माण का विरोध मुख्य कारण बताया गया।
कहीं पहले मारपीट और फिर गोली चलने की बात है।
जांच में इन सभी बयानों का मिलान कर वास्तविक क्रम तय किया जाएगा।
मृतक शिवाजी तिवारी के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि वह लंबे समय से RSS से जुड़े थे। संघ के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में भी घटना को लेकर शोक और आक्रोश है।
पुलिस अधिकारियों ने परिवार को भरोसा दिलाया है कि मामले में साक्ष्यों के आधार पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी पुलिस हिरासत में है और उसके खिलाफ पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर हत्या समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस हत्याकांड ने लखनऊ के पुराने शहर के घनी आबादी वाले इलाके में हथियारों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
यदि जांच में बरामद पिस्टल अवैध पाई जाती है तो पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि आरोपी को हथियार कहां से मिला।
क्या उसने हथियार पहले से अपने पास रखा था या विवाद के बाद किसी स्थान से लाया।
हथियार की खरीद और आपूर्ति श्रृंखला की जांच इस केस का अलग महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
दिनदहाड़े आवासीय इलाके में फायरिंग होने से आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठे हैं।
घटना के समय आसपास बच्चों, महिलाओं और दूसरे स्थानीय लोगों के मौजूद होने की संभावना थी। ताबड़तोड़ फायरिंग में यदि गोलियां दूसरी दिशा में जातीं तो मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती थी।
पुलिस इसलिए मौके से प्रत्येक कारतूस और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने का प्रयास कर रही है।
इलाके में रहने वाले लोगों ने पुलिस को दोनों परिवारों के पुराने विवाद के बारे में भी जानकारी दी है।
यदि यह साबित होता है कि पहले भी दोनों पक्षों के बीच शिकायत पुलिस तक पहुंची थी, तो जांच में उस पुराने रिकॉर्ड का भी अध्ययन किया जाएगा।
इससे यह पता लगाया जा सकता है कि पिछली शिकायत में विवाद की प्रकृति क्या थी और तब दोनों पक्षों के खिलाफ या उनके बीच समझौते के लिए क्या कार्रवाई की गई थी।
फिलहाल यह तथ्य सामने आया है कि पार्किंग और चबूतरे से जुड़े मुद्दे पर पड़ोसियों के बीच पहले से तनाव था।
सोमवार को वही तनाव जानलेवा हिंसा में बदल गया।
सामान्यतः पड़ोस में पार्किंग, रास्ते, नाली, दीवार, पेड़ या सार्वजनिक जगह को लेकर शुरू हुए छोटे विवाद कई बार लंबे समय तक रंजिश में बदल जाते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय पुलिस, नगर निकाय और राजस्व विभाग की समय रहते मध्यस्थता कई विवादों को गंभीर होने से रोक सकती है।
लेकिन नौबस्ता की घटना में एक स्थानीय विवाद ने तीन लोगों की जान ले ली।
इससे यह सवाल भी उठता है कि यदि दोनों परिवारों का विवाद पहले से प्रशासन या पुलिस की जानकारी में था तो क्या समय रहते इसे स्थायी रूप से सुलझाने की कोई व्यवस्था की जा सकती थी।
इस प्रश्न का जवाब पुराने पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित शिकायतों की जांच के बाद ही मिल सकेगा।
फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस हत्या के मामले की जांच और आरोपी के खिलाफ साक्ष्य जुटाने पर है।
परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने पूरे नौबस्ता इलाके को झकझोर दिया है।
शिवाजी तिवारी परिवार में वरिष्ठ सदस्य थे।
उनके भाई शिवेंद्र और बेटे सुयश की भी उसी घटना में मौत होने से परिवार पर एक साथ तीन मौतों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सुयश की आगामी शादी को लेकर घर में खरीदारी और दूसरी तैयारियां चल रही थीं।
अब उसी परिवार के सामने अंतिम संस्कार की तैयारी है।
घटना के बाद घर के बाहर बड़ी संख्या में परिचित और स्थानीय लोग पहुंचे।
पुलिस की मौजूदगी के बीच परिजनों को संभालने का प्रयास किया गया।
तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और उसके बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस केस में एक अहम चिकित्सकीय साक्ष्य होगी।
पुलिस यह भी जानने की कोशिश करेगी कि आरोपी ने कितनी दूरी से फायरिंग की।
किस व्यक्ति को कितनी गोलियां लगीं।
क्या गोलीबारी एक ही स्थान पर हुई या लोग बचने के लिए भागे और आरोपी उनके पीछे गया।
ये सभी तथ्य अपराध की प्रकृति और आरोपी की कथित मंशा समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
शुरुआती प्रत्यक्षदर्शी विवरण में आरोपी द्वारा लगातार गोली चलाने की बात सामने आई है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि उसने पिस्टल की मैगजीन खाली होने तक फायर किया। हालांकि अंतिम रूप से कितनी गोलियां चलीं, इसकी पुष्टि पुलिस की बैलिस्टिक और घटनास्थल जांच से होगी।
पुलिस आरोपी से यह भी पूछताछ कर रही है कि घटना के समय उसके साथ कोई दूसरा व्यक्ति सक्रिय रूप से शामिल था या नहीं।
फिलहाल मुख्य आरोपी के तौर पर ऋषभ शुक्ला का नाम सामने आया है।
यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की आपराधिक भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
केवल घटनास्थल पर मौजूद होना और हत्या में सक्रिय भागीदारी दो अलग कानूनी स्थितियां हैं।
इसलिए पुलिस को प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका साक्ष्य के आधार पर तय करनी होगी।
मामले में हत्या के आरोपी ऋषभ शुक्ला को अदालत में पेश किए जाने के बाद पुलिस उसकी रिमांड की मांग भी कर सकती है, यदि जांच के लिए हथियार के स्रोत, घटना के उद्देश्य या दूसरे तथ्यों पर विस्तृत पूछताछ आवश्यक होती है।
अंतिम धाराएं और अन्य कानूनी प्रावधान एफआईआर तथा जांच के आधार पर स्पष्ट होंगे।
आरोपी को फिलहाल हत्या का दोषी घोषित नहीं किया जा सकता। उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है, लेकिन आपराधिक दोषसिद्धि सक्षम अदालत में ट्रायल और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।
यही सिद्धांत इस मामले की रिपोर्टिंग में भी लागू होता है।
पुलिस की शुरुआती जानकारी आरोपी की कथित फायरिंग की ओर स्पष्ट रूप से संकेत करती है, हथियार भी बरामद हुआ है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान मौजूद बताए जा रहे हैं, लेकिन इन सभी साक्ष्यों का अंतिम न्यायिक परीक्षण होना बाकी है।
घटना के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नौबस्ता और आसपास अतिरिक्त पुलिस तैनात की गई है।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।
इतनी संवेदनशील घटना के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे तेजी से फैल सकते हैं।
विशेष रूप से मृतक का RSS से जुड़ाव होने के कारण राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग देने वाले अपुष्ट दावे तनाव बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल पुलिस द्वारा बताई गई प्राथमिक वजह स्थानीय जमीन, चबूतरा और पार्किंग का विवाद है।
जब तक जांच में कोई अन्य उद्देश्य सामने नहीं आता, इसी तथ्य को प्राथमिक आधार माना जाना चाहिए।
लखनऊ पुलिस के लिए अब दो स्तर पर चुनौती है।
पहला, हत्या के मामले में ठोस और वैज्ञानिक जांच पूरी करना।
दूसरा, घटना के बाद इलाके में किसी प्रकार की प्रतिक्रिया या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न होने देना।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती इसी कारण की गई है।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि लंबे समय तक चले छोटे स्थानीय विवाद यदि समय रहते नहीं सुलझाए जाएं तो बेहद गंभीर हिंसा का रूप ले सकते हैं।
एक वाहन कहां खड़ा होगा और बरगद के पेड़ के सामने चबूतरा बनेगा या नहीं—इन सवालों पर शुरू हुआ विवाद अब तीन मौतों के साथ आपराधिक मुकदमे में बदल गया है।
एक आरोपी हिरासत में है।
तीन परिवारजन नहीं रहे।
एक होने वाली शादी का घर मातम में बदल गया है।
और पूरा मोहल्ला उस कुछ मिनट की गोलीबारी के बाद सदमे में है।
पुलिस की आगे की जांच में पुराने विवाद का पूरा इतिहास, पिस्टल का स्रोत, आरोपी की कथित मंशा, फायरिंग का क्रम और संभावित दूसरे लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक, पोस्टमार्टम और प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य केस में बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
26 अक्टूबर की शाम तक प्रमाणित स्थिति यह है कि नौबस्ता के ब्राह्मणी टोला में पार्किंग और चबूतरे से जुड़े विवाद के दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र उर्फ शंभू और बेटे सुयश तिवारी की मौत हो गई। आरोपी ऋषभ शुक्ला पुलिस हिरासत में है और वारदात में कथित रूप से इस्तेमाल पिस्टल तथा चार खाली कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर जांच शुरू कर दी है।