मुरादाबाद में सोमवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत भव्य विवाह समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कुल 348 जोड़े विवाह बंधन में बंधे और अपने वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की। समारोह की खास बात यह रही कि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के जोड़ों के विवाह उनकी धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न कराए गए। कहीं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे हुए तो दूसरी ओर मुस्लिम जोड़ों का निकाह कराया गया।
सामूहिक विवाह समारोह में बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़ों के परिवार और रिश्तेदार भी मौजूद रहे। कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल बना रहा। अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे जोड़ों के लिए प्रशासन और समाज कल्याण विभाग की ओर से व्यवस्थाएं की गईं। विवाह की रस्में पूरी होने के बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने नवदंपतियों को नए जीवन की शुभकामनाएं दीं।
मुरादाबाद नगर विधायक रितेश गुप्ता भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने विवाह बंधन में बंधे सभी जोड़ों को बधाई देते हुए उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
रितेश गुप्ता ने कार्यक्रम को सामाजिक समरसता से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मूल मंत्र “सबका साथ, सबका विकास” है और सामूहिक विवाह समारोह में इसकी झलक देखने को मिल रही है।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में किसी धर्म या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों समुदायों के पात्र जोड़ों को योजना का लाभ मिला।
यह विधायक रितेश गुप्ता का राजनीतिक बयान है। सरकारी योजना की पात्रता धर्म के बजाय निर्धारित सामाजिक-आर्थिक और प्रशासनिक मानकों के आधार पर तय होती है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता करना और विवाह समारोह पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सभी वर्गों की पात्र बेटियों के विवाह के लिए सहायता को 51 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.01 लाख रुपये करने की व्यवस्था की है। योजना के लिए राज्य बजट में 750 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।
योजना को किसी एक जाति या धर्म तक सीमित नहीं रखा गया है। निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक समुदायों के परिवार इसका लाभ ले सकते हैं।
मुरादाबाद के आयोजन में भी यही स्वरूप देखने को मिला।
कार्यक्रम स्थल पर हिंदू जोड़ों के विवाह पारंपरिक विधि-विधान के साथ कराए गए, जबकि मुस्लिम जोड़ों ने निकाह के जरिए विवाह संपन्न किया। इस तरह सरकारी योजना के तहत अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए सामूहिक विवाह कराया गया।
कार्यक्रम से पहले जिला प्रशासन ने आयोजन की तैयारियों को लेकर कई स्तर पर व्यवस्था की थी। जिलाधिकारी अनुनय झा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल और मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा, साफ-सफाई और दूसरी व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी।
आवेदकों की पात्रता की जांच पर भी विशेष जोर दिया गया।
प्रशासन ने आवेदन, उम्र, बैंक खाता और दूसरे जरूरी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पात्र जोड़ों को योजना में शामिल करने की व्यवस्था की थी। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि किसी अपात्र व्यक्ति को योजना का लाभ न मिले।
इस बार लाभार्थियों की उपस्थिति को दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था भी की गई। इससे विवाह समारोह में वास्तव में मौजूद लाभार्थियों और स्वीकृत आवेदनों का मिलान किया जा सके।
योजना के तहत नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी शुरू करने के लिए निर्धारित सामग्री और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। मुरादाबाद में आयोजित समारोह के लिए गैस चूल्हा, कपड़े, तौलिये और दूसरी घरेलू उपयोग की वस्तुओं की व्यवस्था किए जाने की जानकारी पहले ही प्रशासन की ओर से दी गई थी।
सामूहिक विवाह आयोजन का उद्देश्य केवल एक स्थान पर बड़ी संख्या में विवाह संपन्न कराना नहीं बल्कि ऐसे परिवारों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना भी है जिनके लिए विवाह का खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है।
राज्य सरकार ने योजना की आर्थिक सहायता बढ़ाने के साथ इसकी पात्रता का दायरा भी विस्तृत किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार ने योजना के लिए पारिवारिक वार्षिक आय सीमा को 1.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये करने की घोषणा की थी।
इससे अधिक संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।
समाज कल्याण विभाग की ओर से अक्टूबर तक जारी आंकड़ों के अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष में प्रदेशभर में 28 हजार से अधिक जोड़ों के विवाह मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कराए जा चुके थे। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में बड़ी संख्या में पात्र जोड़ों के विवाह कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मुरादाबाद जिले में भी सामूहिक विवाह एक चरण में सीमित नहीं है।
जिले में दो चरणों में सैकड़ों जोड़ों के विवाह की तैयारी की गई है। पहले चरण का आयोजन 26 अक्टूबर को मुरादाबाद शहर क्षेत्र में रखा गया, जबकि अगला कार्यक्रम 30 अक्टूबर को प्रस्तावित है। प्रशासन ने इन चरणों में अलग-अलग विधानसभा और विकास क्षेत्रों के पात्र लाभार्थियों को शामिल करने की व्यवस्था बनाई है।
कार्यक्रम से पहले उपलब्ध प्रशासनिक तैयारियों में 26 अक्टूबर के समारोह के लिए 335 जोड़ों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई थी, जबकि कार्यक्रम स्थल से मिली ताजा स्थानीय रिपोर्ट में विवाह संपन्न करने वाले जोड़ों की कुल संख्या 348 बताई गई है। पहले चरण में 348 जोड़ों के चयन की जानकारी भी आयोजन से एक दिन पहले सामने आई थी।
अंतिम सरकारी लाभार्थी सूची और भुगतान रिकॉर्ड के बाद समारोह में योजना के तहत शामिल जोड़ों की प्रशासनिक संख्या और स्पष्ट हो सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान नगर विधायक रितेश गुप्ता ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों को जाति या धर्म देखकर नहीं दिया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार की योजनाओं में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और दूसरे समुदायों के लोगों को पात्रता के आधार पर लाभ दिया जाता है।
उन्होंने सामूहिक विवाह समारोह में हिंदू और मुस्लिम जोड़ों की मौजूदगी को इसी नीति का उदाहरण बताया।
रितेश गुप्ता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं का एजेंडा किसी नागरिक के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव करना नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजना में सभी पात्र लोगों को समान रूप से शामिल किया जा रहा है और सामूहिक विवाह का आयोजन भी बिना किसी भेदभाव के संपन्न कराया गया।
विधायक ने अपने संबोधन को आगामी चुनावी राजनीति से भी जोड़ा।
उन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह सरकारी योजनाओं का लाभ लेते समय धर्म या समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता, उसी तरह चुनाव के दौरान मतदान करते समय भी केवल धार्मिक पहचान के आधार पर निर्णय नहीं किया जाना चाहिए।
यह रितेश गुप्ता की राजनीतिक अपील है। मतदान का निर्णय प्रत्येक मतदाता का व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने कहा कि किसी सरकार का मूल्यांकन उसके विकास कार्यों और लोगों तक पहुंचने वाली योजनाओं के आधार पर किया जाना चाहिए।
विधायक ने दावा किया कि प्रदेश सरकार विभिन्न समुदायों के लोगों के लिए समान रूप से योजनाएं चला रही है और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना भी इसी नीति का हिस्सा है।
समारोह में अलग-अलग समुदायों के लोगों का एक साथ शामिल होना कार्यक्रम का प्रमुख पहलू रहा।
विवाह मंडप में जहां हिंदू रीति के अनुसार मंत्रोच्चार सुनाई दिए, वहीं दूसरी ओर निकाह की प्रक्रिया भी संपन्न हुई। परिवारों ने अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार विवाह की रस्में पूरी कीं।
सामूहिक विवाह योजना का यह मॉडल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सरकार विवाह की कोई एक धार्मिक पद्धति निर्धारित नहीं करती। लाभार्थियों के विवाह उनके धर्म और परंपरा के अनुसार कराए जाते हैं।
योजना का प्रशासनिक उद्देश्य पात्र परिवार को आर्थिक सहायता और आयोजन की सुविधा देना है।
मुरादाबाद प्रशासन ने इस बार पिछली व्यवस्थाओं से जुड़े विवादों के बाद सत्यापन पर अतिरिक्त सतर्कता बरती।
जिले में पहले हुए आयोजनों में लाभार्थियों और उपहार सामग्री को लेकर सवाल उठे थे। इस बार अधिकारियों को आवेदनों की कई स्तर पर जांच करने और जिम्मेदार कर्मचारियों के नाम तथा हस्ताक्षर तक रिकॉर्ड में रखने के निर्देश दिए गए।
योजना में विवाह के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु का पालन भी जरूरी है।
वधू की उम्र कम से कम 18 वर्ष और वर की उम्र कम से कम 21 वर्ष होना आवश्यक है। इसके अलावा आवेदक परिवार को योजना के दूसरे निर्धारित पात्रता मानकों को भी पूरा करना होता है।
आवेदन के दौरान बैंक खाते और दूसरे दस्तावेजों का सत्यापन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आर्थिक सहायता का हिस्सा सीधे पात्र लाभार्थी के खाते में भेजा जाता है।
सरकार ने योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों को रोकने के लिए ई-केवाईसी और डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था भी अपनाई है।
प्रदेश स्तर पर अक्टूबर 2026 तक बड़ी संख्या में आवेदन पात्रता की शर्तें पूरी न करने के कारण निरस्त भी किए गए हैं। यानी आवेदन कर देना अपने आप योजना का लाभ मिलने की गारंटी नहीं है।
मुरादाबाद में विवाह समारोह शुरू होने से पहले भी प्रशासन ने अधिकारियों को स्पष्ट किया था कि किसी अपात्र जोड़े को योजना में शामिल किए जाने पर सत्यापन करने वाले अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
यह व्यवस्था सरकारी धन के सही लाभार्थियों तक पहुंचने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
एक ही स्थान पर सैकड़ों जोड़ों, उनके परिवारों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना स्वाभाविक था। इसी कारण पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रवेश, यातायात तथा कार्यक्रम स्थल की व्यवस्था पहले से तैयार की गई थी।
अधिकारियों ने आयोजन से पहले रोशनी, साफ-सफाई और अन्य सुविधाओं की समीक्षा भी की थी।
विवाह संपन्न होने के बाद नवदंपतियों और उनके परिवारों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी।
कई ऐसे परिवारों के लिए सामूहिक विवाह योजना बड़ी आर्थिक सहायता बनती है जो निजी स्तर पर बड़ा विवाह समारोह आयोजित करने में सक्षम नहीं होते।
हालांकि ऐसी योजनाओं की वास्तविक सफलता केवल विवाह समारोह की भव्यता से तय नहीं होती।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पात्र लाभार्थियों का सही चयन हो, तय आर्थिक सहायता समय पर मिले, उपलब्ध कराया गया सामान निर्धारित गुणवत्ता का हो और सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता बनी रहे।
इसी कारण बायोमेट्रिक उपस्थिति, दस्तावेज सत्यापन और प्रत्यक्ष बैंक हस्तांतरण जैसी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
सरकारी योजना के सामाजिक प्रभाव का दूसरा पहलू विवाह पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना भी है।
भारतीय समाज में विवाह कई परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक दायित्व होता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार कई बार विवाह के खर्च के लिए कर्ज तक लेते हैं।
सामूहिक विवाह में आयोजन की कई लागत सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से वहन की जाती है, जिससे परिवार पर तत्काल वित्तीय दबाव कम हो सकता है।
हालांकि योजना को किसी भी रूप में दहेज व्यवस्था के समर्थन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
दहेज लेना और देना कानून के तहत प्रतिबंधित है। योजना में उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री नवदंपति को गृहस्थी शुरू करने के लिए सरकारी सहायता का हिस्सा होती है।
मुरादाबाद के समारोह में विधायक रितेश गुप्ता के राजनीतिक बयान ने कार्यक्रम को सामाजिक योजना के साथ राजनीतिक चर्चा से भी जोड़ दिया।
उन्होंने सरकारी योजनाओं में समान लाभ की बात करते हुए मतदाताओं से चुनाव में भी धार्मिक आधार पर भेदभाव न करने की अपील की।
चूंकि वह भाजपा विधायक हैं, इसलिए उनके इस बयान को उनकी पार्टी और सरकार के पक्ष में राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा सकता है।
लेकिन सामूहिक विवाह योजना का लाभ किसी राजनीतिक समर्थन या मतदान व्यवहार से कानूनी रूप से जुड़ा नहीं है।
सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले नागरिकों का अधिकार है और मतदान पूरी तरह मतदाता का स्वतंत्र लोकतांत्रिक निर्णय है।
इन दोनों बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
कार्यक्रम में विधायक ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके परिवारों से भी नए दंपतियों का सहयोग करने की अपील की।
विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं बल्कि परिवारों के बीच नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है।
सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में परिवारों का एक साथ शामिल होना सामाजिक स्तर पर भी अलग माहौल तैयार करता है।
हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के जोड़ों का एक ही सरकारी आयोजन में अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार विवाह करना मुरादाबाद के इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता रही।
नगर विधायक ने इसी दृश्य को अपने “सबका साथ, सबका विकास” वाले बयान से जोड़ा।
प्रदेश सरकार भी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को सभी पात्र वर्गों के लिए संचालित कल्याणकारी योजना के रूप में प्रस्तुत करती है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा सहायता राशि बढ़ाने और आय सीमा में विस्तार किए जाने से योजना का दायरा पहले की तुलना में बढ़ा है।
इसके साथ सरकार के सामने पात्रता सत्यापन की चुनौती भी बड़ी हुई है।
जितनी अधिक संख्या में आवेदन आते हैं, उतनी ही जरूरी यह जांच हो जाती है कि लाभ वास्तविक पात्र परिवारों को मिले।
इसी कारण डिजिटल सत्यापन, बैंक खाते की जांच और लाभार्थियों की भौतिक उपस्थिति की पुष्टि जैसी व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
मुरादाबाद के इस चरण के बाद जिले में सामूहिक विवाह योजना के दूसरे प्रस्तावित आयोजन की तैयारियां भी जारी रहेंगी।
जिले में दो चरणों में लगभग 560 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य रखा गया था। पहले चरण के बाद 30 अक्टूबर को अगले समूह के विवाह कराने की योजना है।
इस तरह अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में मुरादाबाद में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बड़े स्तर पर विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
26 अक्टूबर के कार्यक्रम में स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार 348 जोड़ों ने नई जिंदगी की शुरुआत की।
नगर विधायक रितेश गुप्ता ने सभी नवविवाहितों को बधाई देते हुए सरकारी योजनाओं में धार्मिक भेदभाव नहीं होने का दावा किया और इसी आधार पर मतदाताओं से भी चुनाव के समय धर्म के आधार पर मतदान न करने की अपील की।
समारोह के सामाजिक पक्ष में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के जोड़ों की भागीदारी प्रमुख रही, जबकि प्रशासनिक स्तर पर लाभार्थियों की पात्रता और आयोजन व्यवस्था को लेकर इस बार अतिरिक्त निगरानी रखी गई।
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अब संबंधित विभाग की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की होगी कि सभी पात्र नवविवाहित जोड़ों को योजना के तहत निर्धारित आर्थिक सहायता और अन्य लाभ समय पर मिलें।