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33 करोड़ से संवरेगा भरतकुंड, बदलेगी तस्वीर

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रमुख रामायणकालीन तीर्थ भरतकुंड के सुंदरीकरण की योजना ने रफ्तार पकड़ ली है। करीब 33 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का विकास कराने की तैयारी है। परियोजना की कार्ययोजना तैयार करने के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। अब अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) […]

33 करोड़ की योजना से संवरेगा भरतकुंड

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रमुख रामायणकालीन तीर्थ भरतकुंड के सुंदरीकरण की योजना ने रफ्तार पकड़ ली है। करीब 33 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का विकास कराने की तैयारी है। परियोजना की कार्ययोजना तैयार करने के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। अब अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन की स्वीकृति के लिए भेजेगा।

डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद विकास कार्य शुरू कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्तावित योजना में भरतकुंड के मंदिरों और घाटों का सुंदरीकरण करने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत घाटों को पत्थरों से सजाने, परिसर में पाथवे और वॉकवे विकसित करने तथा आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था करने की योजना है।

33 करोड़ रुपये से विकसित होगा धार्मिक परिसर

भरतकुंड अयोध्या क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जिसका संबंध रामायणकालीन परंपराओं से जोड़ा जाता है। यहां धार्मिक आस्था के कारण श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य कुंड परिसर को अधिक व्यवस्थित, आकर्षक और सुविधाजनक बनाना है।

करीब 33 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के तहत परिसर के विभिन्न हिस्सों का विकास प्रस्तावित है। हालांकि, यह राशि अभी अनुमानित लागत के रूप में बताई गई है। अंतिम बजट, निर्माण कार्यों का विस्तृत विवरण और कार्य शुरू होने की समयसीमा डीपीआर तथा शासन की आगे की मंजूरी के बाद स्पष्ट होगी।

मंदिरों और घाटों का होगा सुंदरीकरण

परियोजना में भरतकुंड के मंदिरों और घाटों को बेहतर स्वरूप देने की योजना शामिल है। घाटों को पत्थरों से सजाया जाएगा, जिससे परिसर की सुंदरता और उपयोगिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। धार्मिक स्थलों पर घाटों का व्यवस्थित विकास श्रद्धालुओं के आवागमन और परिसर के रखरखाव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होता है।

घाटों के साथ परिसर के अन्य हिस्सों को भी योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे धार्मिक गतिविधियों के दौरान लोगों को अधिक व्यवस्थित स्थान मिल सकेगा। निर्माण और सुंदरीकरण से जुड़े अंतिम डिजाइन तथा तकनीकी विवरण डीपीआर में तय किए जाएंगे।

पाथवे, वॉकवे और बैठने की व्यवस्था

भरतकुंड परिसर में श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए पाथवे और वॉकवे विकसित किए जाने की योजना है। इन रास्तों से लोगों को परिसर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा बैठने के लिए स्थान और गजेबो यानी छतरियां बनाने का भी प्रस्ताव है। इन सुविधाओं से श्रद्धालुओं और यहां आने वाले अन्य लोगों को विश्राम करने के लिए जगह मिल सकेगी। परियोजना में परिसर के उपयोग को अधिक सुविधाजनक बनाने पर ध्यान दिया गया है।

बागवानी और हरित क्षेत्र भी विकसित होंगे

सुंदरीकरण योजना में बागवानी और हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। परिसर में हरियाली बढ़ाने से धार्मिक स्थल का वातावरण बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। व्यवस्थित पौधारोपण और बागवानी से कुंड के आसपास के क्षेत्र को अधिक आकर्षक बनाया जा सकेगा।

हरित क्षेत्र के विकास की वास्तविक रूपरेखा, पौधों के चयन और रखरखाव से जुड़ी व्यवस्था का विवरण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में सामने आएगा। इसके साथ अन्य प्रस्तावित सुविधाओं के स्थान और निर्माण की तकनीकी योजना भी तय की जाएगी।

रात में रोशनी से निखरेगा परिसर

परियोजना के तहत आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे शाम और रात के समय परिसर में रोशनी बेहतर करने तथा मंदिरों और घाटों को आकर्षक स्वरूप देने का लक्ष्य है। प्रकाश व्यवस्था के साथ श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

हालांकि, लाइटिंग के डिजाइन, उपकरणों और संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। इनका निर्धारण परियोजना की तकनीकी योजना तैयार होने के बाद किया जाएगा।

डीपीआर मंजूर होने के बाद आगे बढ़ेगा काम

फिलहाल शासन ने कार्ययोजना तैयार करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अगला चरण अयोध्या विकास प्राधिकरण की ओर से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने का है। डीपीआर में निर्माण कार्यों, लागत, तकनीकी जरूरतों और अन्य व्यवस्थाओं का विस्तृत ब्योरा शामिल किया जाएगा।

शासन से डीपीआर को स्वीकृति मिलने के बाद ही विकास कार्य शुरू कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए अभी परियोजना को प्रस्तावित विकास योजना के रूप में देखा जाना चाहिए। निर्माण शुरू होने की तारीख और काम पूरा करने की समयसीमा की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

भरतकुंड के सुंदरीकरण की यह योजना धार्मिक स्थल की सुविधाओं और स्वरूप को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यदि प्रस्तावित योजना स्वीकृत रूपरेखा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो मंदिरों, घाटों, रास्तों, बैठने की जगहों, हरित क्षेत्रों और प्रकाश व्यवस्था में सुधार हो सकेगा।

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