उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को हुए मतदान में शाम चार बजे तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 55.24 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन 11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। मतदान के दौरान प्रदेश के कई जिलों में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक, धक्का-मुक्की और हंगामे की घटनाएं सामने आईं। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर मतदान प्रभावित करने, फर्जी वोटिंग और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए, हालांकि इन राजनीतिक आरोपों को हर मामले में आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता।
कुछ शुरुआती रिपोर्टों में कुल मतदान 64.24 प्रतिशत बताया गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े बाद के आधिकारिक आंकड़ों में मतदान प्रतिशत 55.24 दर्ज किया गया। इसलिए उपलब्ध नवीनतम आधिकारिक आंकड़े के आधार पर 55.24 प्रतिशत को ही सही मतदान प्रतिशत माना जाना चाहिए।
मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और शाम चार बजे तक चला। चुनाव में करीब 14.28 लाख मतदाता मतदान के लिए पंजीकृत थे। इनके लिए प्रदेश के 72 जिलों में 2,697 मतदान केंद्र बनाए गए थे। इन चुनावों में कुल 152 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो गई। मतदान बैलेट पेपर के जरिए कराया गया और मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव विधानसभा चुनाव से अलग व्यवस्था के तहत होता है। इन सीटों पर सामान्य मतदाता नहीं बल्कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत शिक्षक और स्नातक मतदाता वोट डालते हैं। इसी वजह से इन चुनावों की मतदाता संख्या विधानसभा या लोकसभा चुनावों की तुलना में काफी कम होती है।
इस बार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रहा।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक 79.01 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। इसके बाद बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर 73.69 प्रतिशत, वाराणसी शिक्षक सीट पर 68.21 प्रतिशत, आगरा शिक्षक सीट पर 63.84 प्रतिशत, मेरठ शिक्षक सीट पर 60.80 प्रतिशत और लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 50.92 प्रतिशत मतदान हुआ।
इसके विपरीत स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान अपेक्षाकृत कम रहा।
आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 51 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर 41.40 प्रतिशत, वाराणसी स्नातक सीट पर 41.01 प्रतिशत, मेरठ स्नातक सीट पर 39.81 प्रतिशत और लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 38.02 प्रतिशत मतदान हुआ।
लखनऊ स्नातक सीट पर सभी संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे कम मतदान दर्ज किया गया।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर सर्वाधिक मतदान इस चुनाव की प्रमुख विशेषताओं में रहा।
शिक्षक मतदाताओं में पेंशन, सेवा शर्तें, शिक्षा व्यवस्था, पदोन्नति और अन्य कर्मचारी मुद्दे चुनाव प्रचार के दौरान प्रमुख विषय रहे। दूसरी ओर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर प्रत्याशियों ने मतदाताओं से संपर्क किया।
मतदान के दौरान कई जिलों में तनाव भी देखने को मिला।
गोरखपुर में DAV डिग्री कॉलेज के मतदान केंद्र के बाहर भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हो गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को अलग किया और स्थिति नियंत्रित की।
मुजफ्फरनगर में भी भाजपा और सपा समर्थकों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की की खबर सामने आई। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष से जुड़े लोग मतदान केंद्र के अंदर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। भाजपा की ओर से ऐसे आरोपों को खारिज किया गया।
इन आरोपों को संबंधित राजनीतिक पक्षों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि हर घटना में किसी स्वतंत्र या न्यायिक जांच से धांधली सिद्ध होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
फतेहपुर में विजयीपुर और बहुआ मतदान केंद्रों पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कथित फर्जी मतदान और वोटिंग में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
विजयीपुर में दोनों राजनीतिक पक्षों से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई जैसी स्थिति भी बनी, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
स्थानीय प्रशासन की जांच में मतदान व्यवस्था को लेकर तत्काल किसी बड़ी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई।
फर्रुखाबाद में भी भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।
कायमगंज और मोहम्मदाबाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी। सपा नेताओं ने कथित फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को मतदान केंद्र से निर्धारित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए।
इटावा और औरैया में भी दोनों दलों के समर्थकों के बीच विवाद की खबर सामने आई।
इटावा के चकरनगर क्षेत्र में भाजपा और सपा नेताओं के बीच नोकझोंक हुई। औरैया के अजीतमल, बिधूना, ऐरवाकटरा और भाग्यनगर क्षेत्रों में भी मतदान को लेकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तनाव पैदा हुआ।
अजीतमल में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर विरोध भी दर्ज कराया।
बांदा और महोबा में मतदान केंद्रों के आसपास प्रत्याशियों के समर्थन में पर्चियां बांटने और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर विवाद हुआ।
महोबा में मतदान केंद्र के पास लगे एक राजनीतिक दल के बस्ते को निर्धारित दूरी के नियम का हवाला देते हुए हटवाया गया।
बांदा में मतदान केंद्र के पास एक भाजपा विधायक और समर्थकों की मौजूदगी का सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया।
हालांकि मतदान प्रक्रिया पुलिस की मौजूदगी में जारी रही।
हरदोई, आगरा, वाराणसी, बरेली और जालौन सहित अन्य जिलों में भी विवाद, नोकझोंक या मतदान प्रभावित करने के आरोपों की खबरें सामने आईं।
कई स्थानों पर पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।
रिपोर्टों में लगभग 32 स्थानों पर किसी न किसी प्रकार के विवाद या राजनीतिक तनाव का उल्लेख किया गया है, हालांकि हर स्थान पर हिंसक झड़प नहीं हुई। कई जगह मामला केवल बहस, शिकायत या विरोध प्रदर्शन तक सीमित रहा।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस चुनाव में मतदान किया।
उन्होंने सैफई में अपने मताधिकार का प्रयोग किया और इसके बाद आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सपा समर्थकों और मतदाताओं को वोट डालने से रोकने की कोशिश की गई।
उन्होंने चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
ये सपा प्रमुख के राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग या किसी अदालत ने इन आरोपों को तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया है।
भाजपा नेताओं ने सपा के आरोपों को खारिज किया।
भाजपा की ओर से कहा गया कि समाजवादी पार्टी चुनाव में संभावित हार को देखते हुए निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रही है।
भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर विपक्ष की ओर से अपात्र लोगों या विवादित मतदाता सूची को लेकर भ्रम पैदा किया गया।
ये भी राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
मतदान के दौरान मतदाता सूची को लेकर भी कई शिकायतें सामने आईं।
झांसी में भाजपा सांसद अनुराग शर्मा का नाम मतदाता सूची में न मिलने की खबर सामने आई, जिसके कारण वह वोट नहीं डाल सके।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता बनने के लिए अलग से पंजीकरण प्रक्रिया होती है। सामान्य विधानसभा मतदाता सूची में नाम होने मात्र से व्यक्ति इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का अधिकारी नहीं बन जाता।
यही वजह है कि इन चुनावों में मतदाता सूची को लेकर शिकायतें अक्सर सामान्य चुनावों से अलग प्रकृति की होती हैं।
चुनाव आयोग ने मतदान की निगरानी के लिए 11 पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे।
इसके अलावा 1,041 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 456 जोनल मजिस्ट्रेट तैनात किए गए। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर माइक्रो ऑब्जर्वर और वीडियोग्राफी की व्यवस्था भी की गई थी।
प्रशासन का उद्देश्य मतदान केंद्रों पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की अनधिकृत मौजूदगी रोकना और बैलेट प्रक्रिया को सुरक्षित रखना था।
विधान परिषद चुनाव में मतदान ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से होता है।
मतदाता प्रत्याशियों को प्राथमिकता क्रम में वोट देते हैं और मतगणना में आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
इस वजह से सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह केवल सबसे अधिक प्रथम वरीयता वोट पाने वाला उम्मीदवार स्वतः विजेता नहीं घोषित होता।
गणना के दौरान निर्धारित कोटा और मतों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
इसी कारण मतगणना में समय लग सकता है।
27 अक्टूबर की मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा कि 11 सीटों में से भाजपा, सपा और अन्य प्रत्याशियों को कितनी सीटें मिलती हैं।
वर्तमान विधान परिषद चुनाव को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ही शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपने संगठन और राजनीतिक समर्थन का आकलन इन चुनावों के जरिए करेंगी।
हालांकि विधान परिषद चुनाव के मतदाता वर्ग और विधानसभा चुनाव के मतदाता वर्ग अलग हैं, इसलिए इन परिणामों को सीधे पूरे प्रदेश के विधानसभा मतदाताओं का जनादेश मानना उचित नहीं होगा।
यह चुनाव सीमित और विशिष्ट मतदाता समूहों के बीच होता है।
फिर भी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र राजनीतिक दलों के लिए संगठनात्मक प्रभाव की महत्वपूर्ण कसौटी माने जाते हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में संगठन, कर्मचारी संघों और शिक्षकों के स्थानीय नेटवर्क की भूमिका होती है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों को बड़ी भौगोलिक सीमा में पंजीकृत स्नातक मतदाताओं तक पहुंच बनानी पड़ती है।
इस बार शिक्षक क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक मतदान ने यह भी दिखाया कि इस मतदाता वर्ग में चुनाव को लेकर अधिक सक्रियता रही।
गोरखपुर-फैजाबाद में करीब 79 प्रतिशत मतदान इसके सबसे स्पष्ट उदाहरणों में रहा।
लखनऊ स्नातक सीट पर केवल 38.02 प्रतिशत मतदान इस बात को दिखाता है कि स्नातक मतदाता वर्ग में मतदान प्रतिशत काफी कम रहा।
इन दोनों आंकड़ों के बीच लगभग 41 प्रतिशत अंकों का अंतर है।
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार इन चुनावों में उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से 72 जिलों के मतदाता शामिल थे। उन्नाव, कानपुर नगर और कानपुर देहात इन 11 निर्वाचन क्षेत्रों की मतदान प्रक्रिया में शामिल नहीं थे।
मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतपेटियों को निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत स्ट्रांग रूम में जमा कराया गया है।
मतगणना 27 अक्टूबर को संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारित केंद्रों पर होगी।
बैलेट पेपर आधारित चुनाव होने के कारण मतगणना के दौरान प्रथम वरीयता मतों की जांच और जरूरत पड़ने पर दूसरे वरीयता मतों का स्थानांतरण किया जाएगा।
मतगणना प्रक्रिया के दौरान प्रत्याशियों के अधिकृत एजेंट भी मौजूद रह सकेंगे।
चुनाव परिणाम आने के बाद ही विधान परिषद में राजनीतिक दलों की वास्तविक स्थिति पर इसका असर स्पष्ट होगा।
फिलहाल मतदान के बाद राजनीतिक विवाद का केंद्र चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और विभिन्न जिलों में हुई झड़पें बनी हुई हैं।
समाजवादी पार्टी ने प्रशासन पर सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया है।
चुनाव आयोग की जिम्मेदारी इन शिकायतों की तथ्यात्मक जांच करना है।
किसी मतदान केंद्र पर फर्जी वोटिंग या बूथ कैप्चरिंग जैसा गंभीर आरोप तभी स्थापित माना जा सकता है जब चुनाव अधिकारियों की जांच, आधिकारिक रिपोर्ट या सक्षम कानूनी प्रक्रिया में इसकी पुष्टि हो।
इसलिए राजनीतिक दलों के दावों और प्रमाणित चुनावी अनियमितता के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
23 अक्टूबर के मतदान का सबसे स्पष्ट आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल 55.24 प्रतिशत है।
प्रारंभिक रूप से प्रसारित 64.24 प्रतिशत के आंकड़े के विपरीत बाद में मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों और कई स्वतंत्र रिपोर्टों में 55.24 प्रतिशत मतदान की पुष्टि हुई है।
अब सभी 152 प्रत्याशियों और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर 27 अक्टूबर की मतगणना पर रहेगी।
उस दिन तय होगा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक सीटों पर मतदाताओं ने किसे प्रतिनिधित्व सौंपा है।