अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव की तैयारियों का औपचारिक आगाज हो गया है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सरयू तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन किया गया। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, अधिकारियों और स्वयंसेवकों के साथ अनुष्ठान में भाग लिया। इस दौरान मां सरयू का पूजन कर दीपोत्सव के सफल और निर्विघ्न आयोजन की कामना की गई।
इस बार दीपोत्सव में सरयू तट और राम की पैड़ी समेत कुल 56 घाटों पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी अवध विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध शिक्षण संस्थानों के करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को सौंपी जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घाटों की सफाई के बाद दीप सजाने के लिए मार्किंग का काम भी शुरू कर दिया है।
भूमि पूजन के साथ शुरू हुई तैयारियां
दसवें दीपोत्सव के आयोजन की तैयारियों के तहत शुक्रवार सुबह सरयू तट स्थित घाट संख्या 10 पर भूमि पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए अनुष्ठान में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी, प्रोफेसर तथा समन्वयक शामिल हुए।
भूमि पूजन के दौरान मां सरयू का पूजन कर आयोजन की सफलता की प्रार्थना की गई। इसके साथ ही घाटों पर दीपों की सजावट और प्रज्ज्वलन से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
दीपोत्सव के आयोजन में अवध विश्वविद्यालय की अहम भूमिका है। विश्वविद्यालय प्रशासन स्वयंसेवकों की तैनाती, घाटों पर दीपों की व्यवस्था और सजावट के लिए जरूरी तैयारियों का समन्वय कर रहा है। जिला प्रशासन के साथ मिलकर आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर काम किया जा रहा है।
56 घाटों पर सजेंगे 30 लाख दीप
इस वर्ष दीपोत्सव के लिए सरयू तट के कुल 56 घाटों को शामिल किया गया है। इनमें विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल भी शामिल हैं। पिछले आयोजन में 55 घाटों पर दीपों की व्यवस्था की गई थी। इस बार एक अतिरिक्त घाट को शामिल करते हुए तैयारियों का दायरा बढ़ाया गया है।
आयोजकों ने 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य तय किया है। दीपों को लाने और सजाने के दौरान कुछ दीप टूटने की आशंका को देखते हुए लगभग 33 लाख दीपों की व्यवस्था की जा रही है। इससे निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
घाटों पर दीप सजाने के लिए केवल दीपों की संख्या तय करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें एक निश्चित क्रम में रखना, निर्धारित स्थान पर सजाना और तय समय के भीतर प्रज्ज्वलन की व्यवस्था करना भी बड़ी जिम्मेदारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए घाटों पर चरणबद्ध तरीके से तैयारियां की जा रही हैं।
35 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे जिम्मेदारी
दसवें दीपोत्सव को सफल बनाने के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों की तैनाती की योजना है। इनमें अवध विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थियों के साथ विभिन्न डिग्री कॉलेजों और इंटर कॉलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल होंगे।
योजना के अनुसार, 30 डिग्री कॉलेजों और 40 इंटर कॉलेजों के विद्यार्थियों को इस आयोजन से जोड़ा जाएगा। स्वयंसेवकों को घाटवार जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। उनकी भूमिका दीपों को निर्धारित स्थानों पर सजाने से लेकर उन्हें प्रज्ज्वलित करने तक रहेगी।
इतनी बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के काम को व्यवस्थित रखने के लिए पंजीकरण और पहचान की व्यवस्था भी की जा रही है। ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वयंसेवकों को पहचान पत्र दिए जाएंगे। इन पहचान पत्रों पर क्यूआर कोड के साथ नाम, फोटो, संपर्क विवरण और तैनाती स्थल जैसी जानकारी दर्ज होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य स्वयंसेवकों की पहचान सुनिश्चित करना और उन्हें निर्धारित घाटों पर जिम्मेदारी के अनुसार तैनात करना है। आयोजन में समय प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि लाखों दीपों को तय समयसीमा के भीतर सजाने और जलाने का काम किया जाना है।
चार वर्ग फीट के ब्लॉक में होगी दीप सज्जा
दीपों को एक समान और व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए घाटों पर मार्किंग का काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत चार वर्ग फीट के ब्लॉक चिह्नित किए जा रहे हैं। प्रत्येक ब्लॉक में निर्धारित संख्या के अनुसार दीप रखे जाने की योजना है।
मार्किंग कमेटी की टीम को यह काम अगले तीन से चार दिनों में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। ब्लॉक आधारित व्यवस्था से दीपों को निर्धारित क्रम में सजाने और उनकी संख्या का हिसाब रखने में मदद मिलेगी।
दीप सज्जा का पूरा खाका तैयार करने के बाद स्वयंसेवकों को अलग-अलग घाटों और हिस्सों की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे काम का बंटवारा स्पष्ट रहेगा और आयोजन के दौरान अनावश्यक अव्यवस्था से बचने में मदद मिलेगी।
घाटों की साफ-सफाई, दीपों की उपलब्धता, तेल और बाती की व्यवस्था तथा स्वयंसेवकों की तैनाती जैसे काम भी आयोजन की तैयारियों का हिस्सा हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन इन व्यवस्थाओं के समन्वय में जुटे हैं।
पिछले साल बना था 26 लाख से अधिक दीपों का रिकॉर्ड
अयोध्या के दीपोत्सव में पिछले वर्ष 26 लाख 17 हजार 215 दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे। इस उपलब्धि के साथ आयोजन ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। अब दसवें दीपोत्सव में आयोजकों का लक्ष्य 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करना है।
इस बार का निर्धारित लक्ष्य पिछले वर्ष की रिकॉर्ड संख्या से अधिक है। इसे पूरा करने के लिए दीपों की व्यवस्था, घाटों की मार्किंग और स्वयंसेवकों की तैनाती को लेकर विस्तृत योजना बनाई जा रही है।
हालांकि, 30 लाख दीपों का लक्ष्य निर्धारित होना और रिकॉर्ड का आधिकारिक रूप से प्रमाणित होना अलग-अलग बातें हैं। इस वर्ष नया रिकॉर्ड बनता है या नहीं, यह आयोजन के दौरान वास्तव में प्रज्ज्वलित दीपों की संख्या और आधिकारिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगा।
आयोजन को व्यवस्थित बनाने पर जोर
दसवें दीपोत्सव की तैयारियों में विश्वविद्यालय और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती तय समय में सभी घाटों पर दीप सज्जा पूरी कराने की है। इसके लिए घाटवार योजना बनाई जा रही है और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया भी चल रही है।
आयोजन के दौरान सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और घाटों पर लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखना भी महत्वपूर्ण रहेगा। दीपोत्सव में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की भागीदारी के कारण उनके कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है।
भूमि पूजन के साथ ही दीपोत्सव की तैयारियों ने गति पकड़ ली है। अब आने वाले दिनों में घाटों की मार्किंग पूरी करने, दीपों को निर्धारित स्थानों पर सजाने और स्वयंसेवकों की तैनाती से जुड़े काम आगे बढ़ेंगे।
रामनगरी में इस बार 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो पिछले वर्ष के रिकॉर्ड से आगे बढ़ने का प्रयास सफल हो सकता है। फिलहाल, अवध विश्वविद्यालय के हजारों स्वयंसेवक और आयोजन से जुड़े अधिकारी इस लक्ष्य को पूरा करने की तैयारियों में जुटे हैं।
