बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में पूछताछ के लिए थाने बुलाए गए रंजीत सैनी उर्फ छोटे की मौत के मामले ने पुलिस और स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रक के टायर चोरी से जुड़े विवाद में थाने पहुंचे रंजीत की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तुलसीपुर ले जाया गया था। बाद में उनकी मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस पर प्रताड़ना और अस्पताल में समय पर उपचार नहीं मिलने के आरोप लगाए हैं। मामले में सामने आए एक वीडियो को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसमें दावा किया गया है कि रंजीत अस्पताल के एक कमरे में बेड पर पड़े थे और दरवाजा बाहर से बंद था।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि थाने में रंजीत की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय के अनुसार, हालत अधिक गंभीर होने पर उन्हें 108 एंबुलेंस से जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद तुलसीपुर थाने के दो सिपाहियों को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी।
ट्रक के टायर के विवाद में थाने पहुंचे थे रंजीत
रंजीत सैनी बलरामपुर जिले के तुलसीपुर क्षेत्र के सेखुइनिया कलां गांव के निवासी थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह ट्रांसपोर्ट और ड्राइविंग के काम से जुड़े थे। उन्हें ट्रक के टायर चोरी से संबंधित विवाद के सिलसिले में तुलसीपुर कोतवाली बुलाया गया था।
पुलिस के अनुसार, परमजीत नाम के व्यक्ति ने ट्रक का टायर चोरी होने की सूचना दी थी। इस मामले में रंजीत सैनी थाने पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि थाने में उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
परिजनों की ओर से इस घटनाक्रम पर अलग सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि रंजीत को पहले भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था और 21 अक्टूबर को दोबारा थाने जाने के बाद उनकी हालत बिगड़ी। परिवार ने पुलिस पर मारपीट और प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अस्पताल में बाहर से कुंडी लगाने का आरोप
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू अस्पताल में रंजीत को कथित तौर पर कमरे में बंद रखने से जुड़ा है। परिजनों की ओर से दावा किया गया कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल समुचित उपचार देने के बजाय एक कमरे में लिटा दिया गया और बाहर से कुंडी लगा दी गई।
घटना से संबंधित एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई है। वीडियो के बारे में दावा है कि उसमें रंजीत बेड पर पड़े दिखाई देते हैं और कमरे का दरवाजा बाहर से बंद नजर आता है। परिजनों का आरोप है कि उस समय वह दर्द से परेशान थे और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी।
हालांकि, वीडियो के समय, पूरी परिस्थिति और कमरे का दरवाजा बंद रखने के पीछे की वजह की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि दरवाजा किसने बंद किया था, कितनी देर तक बंद रहा और उस दौरान चिकित्सा कर्मियों की क्या भूमिका थी। इन सवालों का जवाब वीडियो की जांच, अस्पताल के रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान से ही मिल सकता है।
यदि किसी गंभीर मरीज को जानबूझकर उपचार से वंचित रखा गया, तो यह अत्यंत गंभीर मामला होगा। लेकिन किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।
पुलिस और परिजनों के बयानों में अंतर
रंजीत की तबीयत बिगड़ने से लेकर उनकी मौत तक के घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। इसी वजह से अस्पताल में उनके उपचार और अस्पतालों के बीच ले जाए जाने की पूरी समयरेखा स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय के बयान के अनुसार, पुलिस रंजीत को तत्काल CHC तुलसीपुर लेकर गई थी। वहां उपचार के दौरान उनकी हालत और गंभीर होने पर उन्हें 108 एंबुलेंस से जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया। एएसपी के अनुसार, जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वहीं, परिजनों की ओर से सामने आए विवरण में आरोप लगाया गया कि अस्पताल पहुंचने पर रंजीत को समय से उपचार नहीं मिला। कुछ प्रकाशित विवरणों में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेजे जाने और रात में तबीयत बिगड़ने पर दोबारा अस्पताल ले जाने की बात भी सामने आई है।
इन विवरणों में उपचार और अस्पताल पहुंचने के क्रम को लेकर अंतर है। इसलिए अंतिम घटनाक्रम को लेकर किसी एक अपुष्ट विवरण को स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा। पुलिस की आधिकारिक जानकारी, अस्पताल का उपचार रिकॉर्ड, एंबुलेंस का विवरण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस अंतर को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
दो सिपाही निलंबित, जांच के घेरे में मामला
रंजीत की मौत के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो सिपाहियों रत्नेश कुमार और देवाशीष मिश्रा को निलंबित किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई थाने पर बुलाने की प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने से जुड़ी कथित लापरवाही के आरोपों के बाद की गई।
दोनों सिपाहियों का निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई है। इसे अपने आप में रंजीत की मौत के कारण या किसी अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि रंजीत को किस आधार पर थाने बुलाया गया, उस समय क्या कार्रवाई की गई और तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सा सहायता किस तरह उपलब्ध कराई गई।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए थाने की रोज़नामचा प्रविष्टियां, अस्पताल में भर्ती होने और उपचार का रिकॉर्ड, एंबुलेंस संबंधी विवरण तथा उपलब्ध वीडियो की जांच उपयोगी होगी। इन दस्तावेजों से घटना के अलग-अलग चरणों की समयरेखा तैयार की जा सकती है।
पोस्टमार्टम से स्पष्ट होगी मौत की वजह
रंजीत की मौत के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। मौत का वास्तविक कारण और शरीर पर किसी चोट की मौजूदगी जैसे सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट हो सकते हैं।
परिजनों ने पुलिस पर प्रताड़ना और अस्पताल में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि तबीयत बिगड़ने के बाद उपचार के लिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। ऐसे में जांच के दौरान परिवार के आरोपों और पुलिस के बयान, दोनों को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परखना जरूरी होगा।
यह मामला केवल मौत के कारण तक सीमित नहीं है। इसमें यह भी जांचना जरूरी है कि पूछताछ की प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई या नहीं, रंजीत की तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सा सहायता कितनी जल्दी उपलब्ध कराई गई और अस्पताल में उनकी देखरेख किस प्रकार की गई।
अब जवाबदेही तय होने का इंतजार
रंजीत की मौत के बाद परिजनों में नाराजगी है और उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामले ने थाने में पूछताछ के दौरान व्यक्ति की सुरक्षा और अस्पताल पहुंचने के बाद समय पर उपचार मिलने जैसे महत्वपूर्ण सवालों को सामने रखा है।
फिलहाल, दो सिपाहियों के निलंबन की कार्रवाई सामने आई है, लेकिन मौत की वजह और कथित प्रताड़ना तथा उपचार में देरी के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच और अस्पताल से जुड़े रिकॉर्ड इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।
रंजीत सैनी की मौत के मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि थाने से अस्पताल तक उनके साथ क्या हुआ, उन्हें किस समय और किस तरह उपचार मिला तथा उनकी जान जाने की असल वजह क्या थी। इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच और प्रमाणित साक्ष्यों से ही सामने आ सकेगा।