उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हाईवे किनारे लोहे के बक्से में युवक का शव मिलने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच के दौरान मृतक की पत्नी नेहा रावत और उसके कथित सहयोगियों की भूमिका सामने आई। पुलिस ने पत्नी समेत तीन वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को भी मामले में संरक्षण में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, युवक की हत्या करने के बाद शव को बक्से में बंद कर लोडर से हाईवे किनारे फेंका गया था।
यह मामला 20 अक्टूबर की रात सामने आया था। रायबरेली-उन्नाव हाईवे पर हेल्थ मेडिकल सेंटर के सामने सर्विस लेन में एक संदिग्ध लोहे का बक्सा पड़ा होने की सूचना पुलिस को मिली। मौके पर पहुंची टीम ने बक्सा खोला तो अंदर चादर और कंबल में लिपटा युवक का शव मिला। शुरुआती जांच में शरीर पर चोट के निशान सामने आए। इसके बाद पुलिस ने शव की पहचान और घटना के खुलासे के लिए जांच शुरू की।
पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान सोनू सविता के रूप में हुई। जांच में सीसीटीवी फुटेज और वाहन की आवाजाही से जुड़े कैमरों की मदद ली गई। इन्हीं सुरागों के आधार पर पुलिस उस लोडर तक पहुंची, जिसका इस्तेमाल बक्सा ले जाने में किया गया था। पूछताछ और जांच के बाद पत्नी नेहा रावत समेत अन्य लोगों की कथित भूमिका सामने आई। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगा।
हाईवे किनारे बक्से में कैसे मिला शव?
20 अक्टूबर की रात उन्नाव सदर कोतवाली क्षेत्र में पुलिस को सूचना मिली कि अचलगंज से उन्नाव की ओर जाने वाले मार्ग पर हेल्थ मेडिकल सेंटर के सामने एक बड़ा बक्सा संदिग्ध हालत में पड़ा है। पुलिस मौके पर पहुंची और बक्सा खोलकर देखा तो उसके अंदर एक युवक का शव मिला।
शव चादर और कंबल में लिपटा हुआ था। पुलिस ने उसे बाहर निकलवाकर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित किए जाने की पुष्टि की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। घटनास्थल पर पुलिस और फोरेंसिक टीम ने जांच की।
शुरुआत में मृतक की पहचान स्पष्ट नहीं थी। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की और अलग-अलग पहलुओं पर जांच की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की स्वाट और सर्विलांस टीमों को भी लगाया गया।
हाईवे किनारे बक्सा मिलने से स्थानीय क्षेत्र में चर्चा फैल गई। पुलिस के लिए सबसे बड़ा सवाल यह था कि शव किसका है, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई और बक्सा वहां तक कैसे पहुंचा।
CCTV फुटेज से मिला अहम सुराग
पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई। अधिकारियों के मुताबिक, आसपास के कैमरों में एक छोटा मालवाहक वाहन बक्सा लेकर आता और उसे सड़क किनारे छोड़कर जाता दिखाई दिया। इसके बाद वाहन के नंबर और मालिक से जुड़ी जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।
पुलिस ने वाहन के मालिक और चालक से पूछताछ की। जांच में सामने आया कि लोडर को घरेलू सामान स्थानांतरित करने के नाम पर किराये पर लिया गया था। पुलिस के अनुसार, वाहन के लिए लगभग 1,200 रुपये किराया तय किया गया था।
वाहन से जुड़े सुरागों के आधार पर पुलिस मृतक के परिवार और परिचितों तक पहुंची। इसके बाद मृतक की पत्नी नेहा रावत की भूमिका की जांच की गई। पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित हत्या और शव को ठिकाने लगाने की साजिश से जुड़े तथ्य मिले।
पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, वाहन से संबंधित जानकारी और पूछताछ ने मामले की कड़ियां जोड़ने में मदद की। हालांकि, जांच में जुटाए गए साक्ष्यों की कानूनी स्वीकार्यता और उनसे जुड़े निष्कर्षों का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया में किया जाएगा।
पत्नी समेत तीन वयस्क आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, इस मामले में मृतक की पत्नी नेहा रावत, जितेंद्र सिंह उर्फ राहुल और तौहीद को गिरफ्तार किया गया है। एक नाबालिग को भी मामले में संरक्षण में लिया गया है। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने अलग-अलग भूमिकाओं में वारदात को अंजाम देने और शव को ठिकाने लगाने में मदद की।
जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, जितेंद्र मृतक के परिचितों में शामिल था और उसी मकान में किराये पर रहने के दौरान उसकी नेहा से नजदीकी बढ़ी थी। पुलिस इस संबंध को कथित हत्या की पृष्ठभूमि से जोड़कर देख रही है।
हालांकि, व्यक्तिगत संबंधों के बारे में सामने आई जानकारी को हत्या का निर्णायक कारण मानना उचित नहीं होगा। किसी भी अपराध के पीछे की परिस्थितियों और आरोपियों की भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच तथा अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
पुलिस ने कथित वारदात में इस्तेमाल किए गए सामान और बक्से को भी बरामद करने की जानकारी दी है। जांच में वाहन और शव को स्थानांतरित करने में मदद करने वाले लोगों की भूमिकाओं की भी पड़ताल की गई।
गिरफ्तारी का अर्थ यह नहीं है कि आरोपियों का अपराध अदालत में सिद्ध हो चुका है। फिलहाल वे मामले में आरोपी हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपों की जांच होगी।
पुलिस के मुताबिक, रात में हुई थी वारदात
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, हत्या 19 और 20 अक्टूबर की दरम्यानी रात हुई। आरोप है कि सोनू की हत्या उसके रहने के स्थान पर की गई और बाद में शव को बक्से में बंद कर दिया गया।
जांच से जुड़े विवरणों में दावा किया गया है कि मृतक के सिर पर भारी वस्तु से हमला किया गया। इसके बाद उसका मुंह दबाने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किए गए सिलबट्टे के बट्टे को बरामद करने की जानकारी दी है।
इसके बाद शव को चादर और कंबल में लपेटकर लोहे के बक्से में रखा गया। पुलिस के मुताबिक, बक्से को लोडर के जरिए उन्नाव-लालगंज हाईवे की सर्विस लेन तक ले जाया गया। वहां उसे छोड़कर आरोपी कथित रूप से चले गए।
इन विवरणों का अंतिम सत्यापन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य जांच सामग्री के आधार पर किया जाना है। इसलिए घटना के क्रम से जुड़े पुलिस के दावों को जांच के निष्कर्ष के रूप में देखना चाहिए, न कि अदालत से सिद्ध तथ्य के रूप में।
घरेलू विवाद की बात भी जांच में आई सामने
पुलिस के मुताबिक, सोनू और नेहा के बीच अक्सर विवाद होता था। जांच में घरेलू तनाव और नशे की आदत को लेकर झगड़ों की बात सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन परिस्थितियों का कथित हत्या से क्या संबंध था।
किसी भी घरेलू विवाद को अपने आप हत्या का कारण नहीं माना जा सकता। मामले में वास्तविक उद्देश्य और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर होगा। आरोपियों के बयान भी स्वतंत्र पुष्टि और अन्य साक्ष्यों के साथ परखे जाने जरूरी हैं।
पुलिस जांच में यह भी महत्वपूर्ण है कि कथित वारदात से पहले और बाद में कौन-कौन लोग संपर्क में थे। वाहन किराये पर लेने, बक्सा ले जाने और उसे हाईवे किनारे छोड़ने से संबंधित गतिविधियों की समयरेखा इस मामले में अहम हो सकती है।
मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई आगे बढ़ाई। जांच एजेंसियों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी और किसके विरुद्ध कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं।
मेरठ के ड्रम कांड से क्यों हो रही तुलना?
उन्नाव की घटना की तुलना मेरठ में सामने आए ड्रम में शव छिपाने के मामले से की जा रही है। दोनों घटनाओं में शव को एक बड़े पात्र में छिपाकर दूसरी जगह छोड़ने का पहलू सामने आया है। इसी समानता के कारण उन्नाव के मामले को चर्चा में ‘बक्सा कांड’ कहा जा रहा है।
हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां, आरोपी, जांच और कानूनी स्थिति अलग-अलग हैं। केवल शव छिपाने के तरीके में समानता के आधार पर दोनों घटनाओं को पूरी तरह एक जैसा नहीं माना जा सकता।
उन्नाव मामले में सीसीटीवी फुटेज और मालवाहक वाहन की पहचान ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया। यह घटनाक्रम बताता है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे कैमरों से गंभीर अपराधों की जांच में उपयोगी सुराग मिल सकते हैं।
लेकिन किसी भी मामले में वीडियो फुटेज को दूसरे साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखना आवश्यक होता है। जांच का निष्कर्ष केवल एक फुटेज या किसी व्यक्ति के बयान पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
अब आगे क्या होगी कार्रवाई?
पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और बरामद वस्तुओं से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। इनकी मदद से पुलिस घटना के क्रम और आरोपियों की कथित भूमिकाओं को स्पष्ट करने की कोशिश करेगी।
नाबालिग की भूमिका से संबंधित कार्रवाई किशोर न्याय कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जानी होगी। वहीं, वयस्क आरोपियों के खिलाफ जांच और न्यायिक प्रक्रिया लागू कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी।
फिलहाल पुलिस का दावा है कि बक्से में मिले शव की हत्या के मामले का खुलासा कर लिया गया है। पत्नी समेत तीन वयस्क आरोपियों की गिरफ्तारी और एक नाबालिग को संरक्षण में लिए जाने के बाद जांच का अगला चरण साक्ष्यों को मजबूत करना और अदालत में पेश करना होगा।
उन्नाव की इस घटना ने हाईवे किनारे बक्से में शव मिलने से शुरू हुई जांच को एक गंभीर आपराधिक मामले में बदल दिया है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि आरोपियों के विरुद्ध कौन से आरोप सिद्ध होते हैं। अदालत के फैसले से पहले किसी भी आरोपी को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।