महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में सरकारी चने के बीज की करीब 100 बोरियां दूसरे स्थान पर भेजे जाने को लेकर बुधवार देर शाम हंगामा हो गया। मामले की जानकारी मिलने पर चरखारी से भाजपा विधायक डॉ. बृजभूषण राजपूत कृषि बीज भंडार पहुंच गए। वहां बीज भेजने से संबंधित अधिकारी का आदेश नहीं दिखाए जाने पर विधायक नाराज हो गए। इस दौरान बीज भंडार प्रभारी सोनू सिंह यादव को थप्पड़ मारने की घटना भी सामने आई है। घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
मामले ने किसानों के लिए उपलब्ध सरकारी बीज के भंडारण और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधायक ने बीज को दूसरे स्थान पर भेजे जाने के पीछे की वजह पूछी और संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी। वहीं, उपकृषि निदेशक ने बीज भेजने का आदेश जारी करने से इनकार किया है। विभाग की ओर से मामले की जांच किए जाने की बात कही गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बीज भेजने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
करीब 100 बोरी चने का बीज भेजे जाने की सूचना
जानकारी के मुताबिक, 21 अक्टूबर की देर शाम कृषि बीज भंडार से चने की करीब 100 बोरियां पिकअप वाहन से कुलपहाड़ क्षेत्र में भेजी जा रही थीं। इसकी सूचना मिलने पर विधायक बृजभूषण राजपूत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बीज ले जाने के संबंध में जानकारी मांगी।
मौके पर पिकअप चालक राजाराम और बीज भंडार प्रभारी सोनू सिंह यादव को बुलाया गया। प्रभारी ने बताया कि बीज कुलपहाड़ भेजा जा रहा है। हालांकि, वह इसके लिए संबंधित अधिकारी का लिखित आदेश प्रस्तुत नहीं कर सके।
आदेश नहीं दिखाए जाने पर विधायक ने नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीज सरकारी भंडार से दूसरे स्थान पर भेजा जा रहा है, तो इसके लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति और संबंधित दस्तावेज कहां हैं।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीज का दूसरे स्थान पर भेजा जाना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसके लिए जारी आदेश, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज और वितरण संबंधी रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
प्रभारी पर लगाए किसानों के हितों की अनदेखी के आरोप
मौके पर विधायक ने बीज भंडार प्रभारी पर किसानों के हितों की अनदेखी करने और दलाली करने के आरोप लगाए। वायरल वीडियो में विधायक को प्रभारी से नाराजगी जताते हुए सुना और देखा जा सकता है। वीडियो में वह उनसे राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सवाल करते नजर आते हैं।
इस दौरान विधायक और प्रभारी के बीच बहस की स्थिति बनी। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में प्रभारी को थप्पड़ मारे जाने की घटना का भी उल्लेख है। हालांकि, पूरे मामले में सभी संबंधित पक्षों के बयान और घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच के आधार पर ही विस्तृत स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विधायक ने मौके पर मौजूद लोगों के सामने बीज भेजने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसानों के लिए उपलब्ध बीज के मामले में पारदर्शिता जरूरी है। यदि किसी अधिकारी की अनुमति से बीज भेजा जा रहा था, तो उसका दस्तावेज प्रस्तुत किया जाना चाहिए था।
हालांकि, प्रभारी पर लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। केवल आदेश प्रस्तुत नहीं कर पाने के आधार पर बीज की कालाबाजारी या किसी अन्य अपराध को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
उपकृषि निदेशक ने आदेश जारी करने से किया इनकार
मामले के दौरान विधायक ने उपकृषि निदेशक रामसजीवन से फोन पर संपर्क किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उपकृषि निदेशक ने चने का बीज कुलपहाड़ भेजने के लिए कोई आदेश जारी करने से इनकार किया।
इसके बाद मामला और गंभीर हो गया। यदि संबंधित अधिकारी ने वास्तव में कोई आदेश जारी नहीं किया था, तो यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है कि बीज किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से भेजा जा रहा था।
दूसरी ओर, इस पहलू पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले विभागीय रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। यह भी स्पष्ट करना होगा कि बीज को किसी दूसरे सरकारी केंद्र, वितरण स्थल या अन्य स्थान पर भेजने की प्रक्रिया क्या थी।
उपकृषि निदेशक ने मामले की जांच किए जाने की बात कही है। उन्होंने संकेत दिया कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस और कृषि विभाग को दी गई सूचना
विधायक ने घटनाक्रम की जानकारी पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारियों को भी दी। बीज के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और आदेश की स्थिति को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा गया।
अब जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जाने जरूरी हैं। इनमें बीज की बोरियों की वास्तविक संख्या, स्टॉक रजिस्टर में दर्ज मात्रा, बीज भेजने का उद्देश्य और वाहन से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं।
इसके अलावा, यह भी पता लगाना होगा कि बीज को कुलपहाड़ भेजने का निर्णय किसने लिया था। क्या इसके लिए कोई वैध विभागीय निर्देश था? यदि आदेश मौजूद था, तो मौके पर उसे प्रस्तुत क्यों नहीं किया जा सका? और यदि कोई आदेश नहीं था, तो बीज को भंडार से बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी?
इन सवालों का जवाब संबंधित रिकॉर्ड, अधिकारियों के बयान और विभागीय जांच से ही मिल सकेगा।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह मामला?
सरकारी कृषि बीज भंडार किसानों तक बीज पहुंचाने की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। रबी की फसलों की बुवाई के समय चने जैसे बीज की उपलब्धता किसानों के लिए खास मायने रखती है।
ऐसे में बीज के भंडारण, परिवहन और वितरण में पारदर्शिता जरूरी है। किसानों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि सरकारी योजना के तहत उपलब्ध बीज किस केंद्र पर भेजा जा रहा है और उसका वितरण किन नियमों के तहत किया जाएगा।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। वहीं, यदि बीज का परिवहन वैध आदेश के तहत किया जा रहा था, तो दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी।
इस मामले में अभी किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। जांच के निष्कर्ष और सक्षम अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।
थप्पड़ की घटना ने भी खड़े किए सवाल
इस घटनाक्रम में सरकारी बीज के परिवहन से जुड़ा सवाल जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जनप्रतिनिधि के व्यवहार का पहलू भी चर्चा में है। किसी संभावित अनियमितता की जानकारी मिलने पर जनप्रतिनिधि अधिकारियों से जवाब मांग सकते हैं और जांच की मांग कर सकते हैं। लेकिन किसी कर्मचारी के साथ मारपीट के आरोप को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद मामले की चर्चा बढ़ी है। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम के आधार पर बीज की कालाबाजारी जैसे आरोपों को स्वतः प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसके लिए अलग से साक्ष्य और जांच जरूरी है।
फिलहाल, महोबा में चने की करीब 100 बोरियां कुलपहाड़ भेजे जाने के मामले में कृषि विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। उपकृषि निदेशक ने आदेश जारी करने से इनकार किया है और जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कही है। अब यह देखना होगा कि विभागीय रिकॉर्ड में बीज के परिवहन को लेकर क्या जानकारी सामने आती है और जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।