“दिल्ली पुलिस ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को रिहा कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। मामला SIR विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।“
नई दिल्ली। दिल्ली में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध को लेकर जारी राजनीतिक गतिविधियों के बीच अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने रिहा कर दिया है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाना था। दोनों को शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिया गया था।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, नेहा बोरा को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिहा किया गया। अभिजीत दीपके के मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत निवारक कार्रवाई की गई और उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली में प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और हिरासत की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है।
नेहा बोरा ने हिरासत के तरीके पर उठाए सवाल
रिहाई के बाद AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें काफी समय तक अपने वकीलों से संपर्क करने में परेशानी हुई। उनके मुताबिक, वकीलों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बातचीत की अनुमति मिलने में कई घंटे लग गए।
नेहा बोरा ने कहा कि आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उनके अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हों। उन्होंने हिरासत में रखने और रिहाई की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में रास्ते बंद होने से आम लोगों को परेशानी हुई। ये आरोप नेहा बोरा की ओर से लगाए गए हैं। इन दावों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाना चाहिए।
अभिजीत दीपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना था
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को शुक्रवार शाम हिरासत में लिया गया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश करने की बात कही गई।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीपके के मामले में BNSS की धाराओं 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई। ये प्रावधान संभावित शांति भंग को रोकने और संबंधित परिस्थितियों में निवारक कार्रवाई से जुड़े हैं।
दीपके की पार्टी और उनसे जुड़े लोगों ने हिरासत के बाद उनके ठिकाने तथा वकीलों से संपर्क को लेकर चिंता जताई थी। पुलिस की ओर से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी की जानकारी सामने आने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई थी।
‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हुई कार्रवाई
दिल्ली में 16 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का आह्वान किया गया था। यह प्रदर्शन कनॉट प्लेस क्षेत्र में प्रस्तावित था। मार्च के आयोजकों और समर्थकों ने चुनाव आयोग तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों को उठाया था।
प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR था। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची की प्रक्रिया और मताधिकार से संबंधित चिंताएं जताईं। वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था और संभावित व्यवधान को लेकर कार्रवाई की।
मार्च से पहले दिल्ली के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आईं।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी है राजनीतिक विवाद
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची की समीक्षा और संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया है। इसे लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच मतभेद सामने आए हैं। विरोध करने वाले समूहों ने मतदाता अधिकारों और सूची में संभावित बदलावों पर सवाल उठाए हैं।
नेहा बोरा और अभिजीत दीपके की हिरासत इसी व्यापक विरोध के बीच हुई। प्रदर्शन से जुड़े संगठनों ने कार्रवाई पर आपत्ति जताई, जबकि पुलिस की कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के संदर्भ में बताई गई।
नेहा बोरा की रिहाई और अभिजीत दीपके की प्रस्तावित मजिस्ट्रेट पेशी इस घटनाक्रम के दो प्रमुख पहलू हैं। आगे की कानूनी प्रक्रिया, पुलिस का विस्तृत पक्ष और संबंधित अधिकारियों के आदेश मामले की स्थिति को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
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