नेपाल और चीन की सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। आपदा में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। इनमें कम से कम 133 भारतीय नागरिक शामिल हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
26 अगस्त 2026 को आई इस अचानक बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा और धादिंग सहित हिमालयी क्षेत्रों में देखने को मिला। तेज पानी और मलबे के बहाव ने कई घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया। भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने से बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए।
150 से ज्यादा लोगों की मौत
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अलग-अलग आधिकारिक अपडेट में आंकड़े बदलते रहे हैं और 27 अगस्त तक नेपाल-पक्ष पर 157 से 165 के बीच मौतों की जानकारी सामने आई है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में हुई मौतों को जोड़ने पर कुल संख्या और बढ़ जाती है।
बचाव अभियान के दौरान लगातार नए शव मिलने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है, जिससे राहत और खोज अभियान में भी चुनौती आ रही है।
133 भारतीय नागरिक लापता
इस आपदा में भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों का लापता होना है। अधिकारियों के अनुसार कम से कम 133 भारतीयों का अभी तक पता नहीं चला है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते तिब्बत की ओर जा रहे थे।
रिपोर्टों के मुताबिक लापता भारतीयों में तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से गए तीर्थयात्रियों के समूह भी शामिल हैं। एक समूह में 77 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि अलग-अलग समूहों और एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर हो सकता है और उनकी पुष्टि बचाव अभियान के आगे बढ़ने के साथ होगी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर बड़ा असर
नेपाल और तिब्बत के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्गों पर भी बाढ़ और मलबे का गंभीर असर पड़ा है। पुल और सड़कें बह जाने के कारण कई यात्रियों और स्थानीय लोगों का संपर्क प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पर संपर्क और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह बाधित बताई गई है।
यात्रियों के परिजन लगातार अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल और भारत के अधिकारी लापता भारतीय नागरिकों की पहचान और लोकेशन पता करने के लिए स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही
फ्लैश फ्लड इतनी तेजी से आई कि कई लोगों को संभलने का समय तक नहीं मिला। पहाड़ी इलाकों में मलबे और पानी के तेज बहाव ने रास्ते में आने वाले घरों, वाहनों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया।
रिपोर्टों में बताया गया है कि कई जगहों पर सड़कें और पुल बह गए तथा पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने में दिक्कत बढ़ गई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी सेना और पुलिस
नेपाल में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में लगी हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद लापता लोगों की तलाश की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के जरिए भी लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। ड्रोन, खोजी कुत्तों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री
भारत ने नेपाल की मदद के लिए तत्काल राहत सामग्री भेजना शुरू कर दिया है। भारतीय वायुसेना का C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा, जबकि अतिरिक्त राहत के लिए C-17 विमान को स्टैंडबाय पर रखा गया है। भारत की ओर से नेपाली प्रशासन के साथ संपर्क कर लापता भारतीयों की जानकारी जुटाने में भी सहयोग किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बातचीत कर संवेदना जताई और भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया।
आपदा के कारण को लेकर शुरुआती जानकारी
इस आपदा के कारण को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग संभावनाएं सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में तिब्बत में भूकंपीय गतिविधि का उल्लेख हुआ, लेकिन बाद की वैज्ञानिक जानकारी में हिमनद से जुड़े मलबे या ग्लेशियर-जनित घटना को प्रमुख कारण बताया गया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार आपदा का संबंध ग्लेशियर के ढहने से जुड़ी घटना से था।
हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर, बर्फ और मलबे के अचानक खिसकने से तेज पानी का बहाव पैदा हो सकता है, जो नीचे की ओर बस्तियों और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
कई देशों के नागरिक भी लापता
नेपाल की इस आपदा का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी लापता बताए गए हैं। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों के अनुसार लापता लोगों में भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा और अन्य देशों के नागरिक भी शामिल हैं।
इस वजह से कई देशों के दूतावास और विदेश मंत्रालय नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में हैं। लापता पर्यटकों की सूची तैयार की जा रही है और जिन लोगों से संपर्क हो रहा है, उनकी जानकारी परिवारों तक पहुंचाई जा रही है।
परिजनों में बढ़ी चिंता
133 भारतीयों के लापता होने की खबर के बाद देश के कई हिस्सों में उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। कई परिवार लगातार प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर रहे हैं।
सरकार और बचाव एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम इलाकों तक पहुंच बनाना और लापता लोगों की सही जानकारी जुटाना है। कई जगह संचार व्यवस्था भी प्रभावित होने की वजह से संपर्क स्थापित करना मुश्किल हो रहा है।
हालात पर अभी भी नजर
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और स्थिति लगातार बदल रही है। कई इलाकों में मलबा हटाने, सड़कों को बहाल करने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम चल रहा है।
फिलहाल 150 से ज्यादा मौतें और 133 भारतीयों के लापता होने की जानकारी इस आपदा की गंभीरता को दर्शाती है। हालांकि राहत अभियान के बीच आंकड़ों में बदलाव संभव है और आने वाले घंटों में मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या को लेकर नए आधिकारिक अपडेट सामने आ सकते हैं।
