राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वांगचुक का जीवन देश के लिए महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में कई बड़ी लड़ाइयों के लिए उनके नेतृत्व की आवश्यकता होगी। सिब्बल ने यह भी कहा कि यदि सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है, तो उन्हें अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनका आंदोलन कथित परीक्षा अनियमितताओं, विशेष रूप से NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर चल रहा है। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि वह और कई अन्य लोग वांगचुक के साथ खड़े हैं, लेकिन यदि सरकार संवाद के लिए आगे नहीं आ रही है तो भूख हड़ताल जारी रखना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे लोगों की जरूरत है जो समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर नेतृत्व कर सकें और आगे भी संघर्ष जारी रख सकें।
सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक आंदोलनकारियों के साथ सार्थक संवाद शुरू नहीं किया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब नागरिकों को अपनी बात रखने के लिए भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने पड़ें, तो सरकार का दायित्व बनता है कि वह बातचीत के जरिए समाधान तलाशे। उन्होंने महात्मा गांधी और अन्ना हजारे के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भी सरकारें संवाद का रास्ता अपनाती रही हैं।
इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति की प्रतिदिन चिकित्सकीय निगरानी की जाए और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन बहुमूल्य है और उसे सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि चिकित्सकों की टीम नियमित रूप से सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की जांच कर रही है। यदि डॉक्टरों को आवश्यकता महसूस होती है तो आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाएगा। फिलहाल अदालत ने इसी आधार पर दैनिक मेडिकल मॉनिटरिंग जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार लगातार उपवास के कारण सोनम वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि भूख हड़ताल लंबी चली तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि वांगचुक ने फिलहाल अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने से इनकार किया है और कहा है कि उनका आंदोलन अपने उद्देश्य को लेकर जारी रहेगा।
वांगचुक के समर्थन में कई सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की है। उनका कहना है कि देश को उनकी आवश्यकता जीवित रहकर नेतृत्व करने के लिए है।
फिलहाल इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी पहलू भी चर्चा में हैं। एक ओर विपक्ष सरकार पर संवाद न करने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर अदालत ने सरकार को वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से संभावित बातचीत और अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।
