मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। सोमवार को पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने मेरठ के काशी टोल प्लाजा पर रोक दिया। प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, सांसद तनुज पुनिया समेत पार्टी के अन्य नेता शामिल थे। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कांग्रेस नेताओं और प्रशासन के बीच कुछ समय तक बातचीत भी हुई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए प्रतिनिधिमंडल को गांव जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। हालांकि प्रशासन की ओर से कहा गया कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आवश्यक एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
ललिता गौतम हत्याकांड पिछले कुछ दिनों से प्रदेश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। चंद्रशेखर आजाद को भी पहले टोल प्लाजा पर रोका गया था, जिसके बाद प्रशासन की मौजूदगी में उनकी पीड़ित परिवार से मुलाकात कराई गई थी।
कांग्रेस का कहना है कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर उनके साथ खड़ी है। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि वह मामले में पुलिस की भूमिका और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगेगी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना उचित नहीं है। इन आरोपों पर प्रशासन का कहना है कि सभी निर्णय केवल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखकर लिए गए हैं।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब मेरठ की रहने वाली बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ललिता गौतम लापता हो गई थीं। बाद में उनका शव बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
इस बीच, हाल के दिनों में मेरठ में न्याय की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी देखने को मिला था। प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग और पुलिस अधिकारियों के कथित व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिस पर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की आलोचना की। वहीं पुलिस ने अपने कदमों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। विभिन्न राजनीतिक दल पीड़ित परिवार के प्रति समर्थन जताते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी भी राजनीतिक दल के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वर्तमान में मेरठ के संबंधित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मामले की जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।