करीब दो दशक से चर्चा और कई चरणों की सैन्य समीक्षा के बाद भारत की महत्वाकांक्षी एकीकृत थिएटर कमांड (Integrated Theatre Command) योजना अब अंतिम सरकारी मंजूरी के करीब पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—के बीच व्यापक विचार-विमर्श के बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा चुका है और इसे जल्द ही रक्षा मंत्रालय तथा उसके बाद मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) के समक्ष मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।
एकीकृत थिएटर कमांड का उद्देश्य तीनों सेनाओं की क्षमताओं को एक साझा कमान के तहत लाकर संयुक्त सैन्य संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है। मौजूदा व्यवस्था में सेना, नौसेना और वायु सेना अलग-अलग कमांड संरचनाओं के तहत काम करती हैं, जबकि थिएटर कमांड प्रणाली में किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र या रणनीतिक क्षेत्र के लिए एकीकृत कमांडर सभी सैन्य संसाधनों का संचालन करेगा। इससे युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में तेज निर्णय, बेहतर समन्वय और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे में पाकिस्तान सीमा पर केंद्रित पश्चिमी थिएटर कमांड, चीन सीमा पर केंद्रित उत्तरी थिएटर कमांड और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए समुद्री थिएटर कमांड बनाए जाने का प्रस्ताव है। वर्तमान योजना के तहत पश्चिमी थिएटर का नेतृत्व भारतीय वायु सेना के अधिकारी, उत्तरी थिएटर का नेतृत्व थल सेना के अधिकारी और समुद्री थिएटर का नेतृत्व भारतीय नौसेना के अधिकारी के पास रहने की संभावना है। हालांकि अंतिम संरचना और जिम्मेदारियों पर आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
भारत में थिएटर कमांड की अवधारणा नई नहीं है। 1999 के कारगिल युद्ध के बाद गठित कारगिल समीक्षा समिति और उसके बाद विभिन्न विशेषज्ञ समितियों ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया था। वर्ष 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद सृजित होने के बाद इस सुधार प्रक्रिया को नई गति मिली। इसके बाद सैन्य नेतृत्व ने संयुक्त संचालन की दिशा में कई संरचनात्मक बदलावों पर काम शुरू किया।
इस योजना को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार पहले ही इंटर-सर्विसेज ऑर्गेनाइजेशंस (कमांड, कंट्रोल एंड डिसिप्लिन) अधिनियम, 2023 के तहत आवश्यक नियम लागू कर चुकी है। इन नियमों से संयुक्त सैन्य संगठनों और भविष्य के थिएटर कमांडरों को तीनों सेनाओं के कर्मियों पर प्रशासनिक और अनुशासनात्मक अधिकार देने का कानूनी आधार तैयार हुआ है। रक्षा विशेषज्ञ इसे थिएटराइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।
रक्षा अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक युद्ध केवल किसी एक सैन्य शाखा के बल पर नहीं लड़े जाते। मिसाइल, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष आधारित निगरानी, नौसैनिक शक्ति और वायु समर्थन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई की आवश्यकता होती है। ऐसे में एकीकृत थिएटर कमांड प्रणाली संयुक्त युद्ध क्षमता को मजबूत कर सकती है और सीमित संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी मदद करेगी।
हालांकि इस सुधार प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर लंबे समय तक विचार-विमर्श भी हुआ। विशेष रूप से भारतीय वायु सेना की परिसंपत्तियों के उपयोग, विभिन्न थिएटरों के बीच संसाधनों के वितरण और कमांड संरचना को लेकर तीनों सेनाओं के बीच कई दौर की चर्चा हुई। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर अब सहमति बन चुकी है और अंतिम प्रस्ताव तैयार है।
यदि सरकार इस योजना को मंजूरी देती है तो इसके बाद भी थिएटर कमांड पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि नई कमांड संरचना, संसाधनों के पुनर्गठन, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और संचालन संबंधी बदलावों को पूरी तरह लागू करने में लगभग 12 से 18 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।
फिलहाल प्रस्ताव अंतिम सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया में है। रक्षा मंत्रालय और सरकार की ओर से औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद ही थिएटर कमांड के गठन, उनकी संरचना, अधिकार क्षेत्र और कार्यान्वयन की समयसीमा पर आधिकारिक घोषणा की जाएगी। वर्तमान में इस दिशा में प्रक्रियात्मक कार्रवाई जारी है और अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।