उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तहत विजिलेंस विभाग ने लखनऊ में एक सेवानिवृत्त सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) के आवास पर बड़ी छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने 1.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 13 किलोग्राम सोना और 9 किलोग्राम चांदी बरामद की। मामले में आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के आरोपों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद संपत्तियों के स्रोत की विस्तृत जांच की जाएगी।
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति की शिकायतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई। न्यायालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद टीम ने रिटायर्ड एआरटीओ के लखनऊ स्थित आवास पर तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण, सोने की ईंटें और चांदी के सामान बरामद हुए, जिन्हें नियमानुसार जब्त कर लिया गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छापेमारी के दौरान 1.62 करोड़ रुपये नकद के अलावा करीब 13 किलोग्राम सोना और लगभग 9 किलोग्राम चांदी मिली। विजिलेंस टीम ने बरामद नकदी और कीमती धातुओं का मौके पर ही पंचनामा तैयार किया। इसके साथ ही संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, निवेश संबंधी कागजात और अन्य वित्तीय दस्तावेज भी जांच के लिए कब्जे में लिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि बरामद संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित संपत्ति और नकदी आय के घोषित स्रोतों के अनुरूप है या नहीं। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति की पुष्टि होती है तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विजिलेंस विभाग ने बताया कि मामले में वित्तीय लेनदेन, अचल संपत्तियों, बैंक खातों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से भी समन्वय किया जा सकता है। जांच अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बरामद संपत्ति किन स्रोतों से अर्जित की गई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई का दावा करती रही है। राज्य में विजिलेंस और अन्य जांच एजेंसियां समय-समय पर आय से अधिक संपत्ति, रिश्वतखोरी और सरकारी पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई करती रही हैं। सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि छापेमारी के दौरान नकदी और कीमती सामान की बरामदगी अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करती। जांच एजेंसियों को यह साबित करना होगा कि संबंधित संपत्ति वैध आय के स्रोतों से अधिक है। आरोपी को भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार होता है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
इस कार्रवाई के बाद विजिलेंस विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच टीम बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्ति के रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण कर रही है। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की जा सकती है।
फिलहाल विजिलेंस की कार्रवाई जारी है और मामले की जांच प्रारंभिक चरण में है। अधिकारियों ने कहा है कि सभी साक्ष्यों की जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले से जुड़ी आगे की जानकारी जांच पूरी होने और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी।