कोडीन कफ सिरप की तस्करी अब सिर्फ नशे का अवैध कारोबार नहीं रह गई है, बल्कि यह टेरर फंडिंग का बड़ा जरिया बन चुकी है। ED की जांच में खुलासा हुआ है कि पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों से बांग्लादेश भेजी जा रही कफ सिरप की काली कमाई का इस्तेमाल कट्टरपंथी संगठन कर रहे हैं।
बांग्लादेश रूट पर सक्रिय तस्करी नेटवर्क की जांच
ED पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों से बांग्लादेश में हो रही कोडीन कफ सिरप तस्करी में सक्रिय टेरर फंडिंग मॉड्यूल की गहराई से जांच कर रहा है। शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि यह नेटवर्क पहले से ही पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की कार्रवाई वाले रूट्स का इस्तेमाल कर रहा था।
सरगना और चार्टर्ड अकाउंटेंट के दस्तावेजों से दुबई लिंक
जांच के दौरान तस्करी के सरगना और उसके सहयोगी चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकानों से मिले दस्तावेजों ने दुबई में बैठे बड़े हवाला ऑपरेटर से संबंधों का खुलासा किया है। ED को संदेह है कि भारत से बांग्लादेश भेजी जा रही सिरप की बेतहाशा कमाई हवाला के जरिए विदेश ट्रांसफर की जा रही थी।
हवाला के जरिए दुबई में संपत्ति खरीदने की आशंका
ED के अनुसार, संदिग्ध खातों की जांच में पता चला है कि काली कमाई का लेनदेन दुबई स्थित हवाला ऑपरेटर के माध्यम से किया गया। आशंका जताई जा रही है कि इसी नेटवर्क की मदद से विदेश में संपत्तियां भी खरीदी गई हैं। एजेंसी अब मनी ट्रेल का पीछा कर रही है ताकि इस सिंडिकेट को संरक्षण देने वालों तक पहुंचा जा सके।
कट्टरपंथी संगठनों तक पहुंची तस्करी की रकम
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि बांग्लादेश के कुछ कट्टरपंथी इस्लामी संगठन भी इस नेटवर्क में शामिल हैं। ये संगठन कोडीन मिक्स कफ सिरप की तस्करी खाड़ी देशों तक कर रहे हैं और उससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग में किया जा रहा है।
सीमा से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक फैला सिंडिकेट
सिलीगुड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर सक्रिय यह सिंडिकेट अब अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुका है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
50 रुपये की बोतल, 1800 रुपये तक बिक्री
तस्करी के इस कारोबार में मुनाफे का गणित बेहद चौंकाने वाला है।
करीब ₹50 की लागत वाली 100ml कफ सिरप की बोतल
बॉर्डर तक पहुंचते-पहुंचते ₹1000
और बांग्लादेश के अंदर ₹1800 तक बिक रही है।







