उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए बनारसी यादव को शातिर और बेहद सतर्क अपराधी माना जाता था। पुलिस के अनुसार, बनारसी यादव ने अपराध की दुनिया में कदम साल 2003 में रखा था, जब वह चोरी के एक मामले में गाजीपुर के खानपुर थाने से पहली बार जेल गया था। जेल में रहते हुए ही वह कुख्यात अपराधियों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे गंभीर अपराधों में शामिल होता चला गया।
महज 23 साल की उम्र में बनारसी यादव ने 3 हत्याएं और 5 से अधिक हत्या के प्रयास जैसी संगीन वारदातों को अंजाम दिया। उसके खिलाफ गाजीपुर, वाराणसी और सोनभद्र जिलों में दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसने कई प्रभावशाली लोगों को भी धमकाया था।
Mobile और Bank Account से दूरी बनी गिरफ्तारी से बचने की वजह
पुलिस जांच में सामने आया कि बनारसी यादव मोबाइल फोन और बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करता था, यही वजह रही कि वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। अपराध के बाद वह अक्सर राज्य छोड़कर फरार हो जाता था और अकेले रहकर ठिकाने बदलता रहता था।
Colonizer Murder Case: 29 बिस्वा जमीन बना हत्या की वजह
वाराणसी के सारनाथ इलाके में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के पीछे 29 बिस्वा जमीन का विवाद सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, इस हत्या की सुपारी गाजीपुर निवासी एक व्यक्ति ने दी थी। वारदात को अंजाम देने के लिए शूटरों को दो-दो लाख रुपये और पिस्तौल मुहैया कराई गई थी। हथियार की आपूर्ति बिहार के मुंगेर से की गई थी।








