उत्तर प्रदेश में वर्षों से कार्यरत अंशकालिक शिक्षकों (अनुदेशकों) के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि अनुदेशक काम करते रहे हैं, तो उनकी नियुक्ति को केवल संविदात्मक नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अंशकालिक शिक्षकों को संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी काम पर बनाए रखा गया, साथ ही उन्हें अन्यत्र नौकरी करने से भी रोका गया। ऐसे हालात में यह नियुक्ति स्वतः स्थायी प्रकृति की मानी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार इन पदों को अस्थायी बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
राज्य सरकार की अपील खारिज, शिक्षकों की बड़ी जीत
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए माना कि अनुदेशकों के साथ वर्षों से अन्याय हुआ है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इन शिक्षकों को ₹17,000 मानदेय का पूरा लाभ दिया जाएगा।इस फैसले को उत्तर प्रदेश के हजारों अनुदेशक और अंशकालिक शिक्षक अपनी अब तक की सबसे बड़ी कानूनी जीत मान रहे हैं। कोर्ट का यह निर्णय न केवल नौकरी की सुरक्षा देता है, बल्कि आर्थिक अधिकारों को भी मजबूत करता है।
₹17,000 Honorarium Update: 2017 में बढ़ा था मानदेय, अब मिला न्याय
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय वर्ष 2017 में ₹8,470 से बढ़ाकर ₹17,000 किया गया था। हालांकि, सत्ता परिवर्तन के बाद इस निर्णय को लागू नहीं किया गया।








