Breaking News

सकट चौथ 2026: कुपोषण के खिलाफ जनजागरूकता व्रत

सकट चौथ 2026: कुपोषण के खिलाफ जनजागरूकता व्रत

पुराणों में भगवान गणेश को माता पार्वती का पुत्र बताया गया है। धार्मिक कथाओं और मंदिरों में उनकी जो छवि उभरती है, वह एक स्वस्थ, गोल-मटोल, हंसमुख और ऊर्जावान बालक की है—जो मां की गोद में बैठा है। यही कारण है कि देश के कई मंदिरों में गणेशजी की स्थापना माता पार्वती की गोद में या बिल्कुल नन्हें बालस्वरूप में की जाती है।यह छवि केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्वस्थ बचपन की आदर्श कल्पना भी है।

स्वस्थ बचपन की प्रतीक हैं गणेश और कृष्ण

ठीक इसी तरह श्रीकृष्ण के बालस्वरूप की छवि भी माता यशोदा की गोद में, झूला झूलते और मुस्कुराते बच्चे की है।इसीलिए संतान की कामना रखने वाले दंपती अक्सर गणेशजी या बालकृष्ण की पूजा करते हैं—क्योंकि ये दोनों छवियां बताती हैं कि स्वस्थ संतान कैसी होनी चाहिए।

एक तंदरुस्त बच्चा:

  • थोड़ा गोल-मटोल

  • ऊर्जावान और शरारती

  • हंसमुख और चतुर और यही इमेज बाल गणेश में दिखाई देती है।

सकट चौथ क्या है? (Sankashti Chaturthi Significance)

हिंदू परंपरा में गणपति प्रथम पूज्य हैं और उनकी पूजा के लिए चतुर्थी तिथि विशेष मानी जाती है। हर महीने आने वाली चतुर्थी को:

  • विनायकी चतुर्थी

  • संकष्ठी चतुर्थी कहा जाता है।

इनमें माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बड़ी संकष्ठी कहा जाता है, जिसे उत्तर भारत में सकट चौथ कहा जाता है।

कुपोषण के खिलाफ अभियान कैसे बनता है सकट चौथ का व्रत?

महिलाओं द्वारा किया जाने वाला यह व्रत केवल संकट दूर करने के लिए नहीं है, बल्कि असल में यह बच्चों के सबसे बड़े संकट—कुपोषण और कमजोर स्वास्थ्य—के खिलाफ एक पारंपरिक अभियान है।

 व्रत की परंपरा में छिपा पोषण विज्ञान

माघ महीना सर्दी का होता है, इसलिए सकट चौथ पर ऐसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं जिनकी तासीर गर्म और पोषण से भरपूर होती है:

  • तिल – शरीर को गर्मी और ऊर्जा

  • गुड़ – त्वरित ऊर्जा का स्रोत

  • घी – Good Fat, बिना साइड इफेक्ट

  • शकरकंद – कार्बोहाइड्रेट से भरपूर

  • सुथनी – मिनरल्स का स्रोत

  • गाजर – विटामिन A

  • अमरूद – विटामिन C और मिनरल्स

दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई फल-कंद आकृति में गणेशजी जैसे होते हैं।

 व्रत की कामना साफ है— बच्चे पोषित हों, स्वस्थ हों और कुपोषण से बचे रहें।

भारत में कुपोषण: आज भी बड़ी चुनौती

कुपोषण आज भी भारत की एक गंभीर समस्या है।राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के अनुसार:

  • 5 साल से कम उम्र के 35.5% बच्चे बौने हैं

  • 32.1% बच्चे कम वजन के हैं

  • 7.7% बच्चे वेस्टिंग से ग्रस्त हैं

  • करीब 3 करोड़ से ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार हैं

यह समस्या केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि देश के भविष्य से भी जुड़ी है।

व्रत और त्योहार: सिर्फ पूजा नहीं, जीवन पद्धति

भारतीय परंपरा में व्रत-त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सर्वाइवल और पोषण की सबसे प्राचीन योजना रहे हैं।
इन्हीं परंपराओं के जरिए समाज को:

  • मजबूत

  • स्वस्थ

  • पोषित

बनाए रखने की सोच विकसित की गई।

अन्य खबर पढ़े।

WhatsApp
Facebook
X
Threads

Related Posts

  • All Post
  • Other
  • अयोध्या
  • आगरा
  • उत्तरप्रदेश
  • क्राइम
  • खेल
  • पर्व-त्यौहार
  • बड़ी खबर
  • बिहार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • राजस्थान
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विदेश
  • शिक्षा
  • सरकारी नौकरी
  • स्वास्थ्य
    •   Back
    • प्रयागराज
    • लखनऊ
    • Unnao
    • कानपुर
    • बाराबंकी
    • उन्नाव
    • अयोध्या
    • नई दिल्ली
    • आगरा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Breaking News

Categories

Trending News

  • All Posts
  • Other
  • अयोध्या
  • आगरा
  • उत्तरप्रदेश
  • क्राइम
  • खेल
  • पर्व-त्यौहार
  • बड़ी खबर
  • बिहार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • राजस्थान
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विदेश
  • शिक्षा
  • सरकारी नौकरी
  • स्वास्थ्य
    •   Back
    • प्रयागराज
    • लखनऊ
    • Unnao
    • कानपुर
    • बाराबंकी
    • उन्नाव
    • अयोध्या
    • नई दिल्ली
    • आगरा

Lucknow News

Tags

Follow Us

Edit Template

Never miss any important news. Subscribe to our newsletter.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

Popular Posts

  • All Post
  • स्वास्थ्य
    •   Back
    • प्रयागराज
    • लखनऊ
    • Unnao
    • कानपुर
    • बाराबंकी
    • उन्नाव
    • अयोध्या
    • नई दिल्ली
    • आगरा