ओडिशा में आग के हवाले की गई मासूम बच्ची को बचाने वाले चश्मदीद ने रौंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती साझा की है। उन्होंने बताया, “वो बच्ची बार-बार ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्ला रही थी, उसका शरीर जल रहा था।” इस दिल दहला देने वाले मंजर के बाद गांव के बच्चे अब अकेले बाहर जाने से डरने लगे हैं। उन्होंने प्रशासन से आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

ओडिशा की दर्दनाक घटना को लेकर बालंगा गांव निवासी दुक्षिश्याम सेनापति ने उस भयावह सुबह की 90 मिनट की दास्तान साझा की, जब पीड़िता मदद के लिए उनके दरवाजे तक पहुंची थी। उन्होंने बताया, “रविवार सुबह करीब 8:30 बजे किसी ने जोर-जोर से दरवाजा खटखटाया। जब दरवाजा खोला, तो सामने एक लड़की जलती हुई हालत में खड़ी थी, जो असहनीय दर्द में चिल्ला रही थी।”

उन्होंने कहा कि वह मंजर बेहद दिल दहला देने वाला था, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। गांव में इस घटना के बाद से दहशत का माहौल है और बच्चे तक बाहर जाने से डरने लगे हैं।

जलती हालत में भागी लड़की, आरोपियों को लगा मर गई होगी

वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे। चश्मदीद दुक्षिश्याम सेनापति ने बताया कि जब लड़की अगवा की गई थी, तब उसके हाथ बंधे थे, लेकिन उनके घर पहुंचने तक वह अपने हाथ खोल चुकी थी। पीड़िता ने अपने पिता का नाम और गांव का पता बताया, जिसके बाद तुरंत उसके परिवार को सूचना दी गई।

सेनापति ने आगे बताया, “जब मैं लड़की की मदद कर रहा था, उस वक्त गांव के कई लोग मेरे घर पर इकट्ठा हो गए थे। मैंने खुद भी घर से बाहर निकलकर आरोपियों की तलाश की, लेकिन वे नहीं मिले। लड़की ने बताया कि उसे आग लगाने के बाद आरोपी यह सोचकर भाग गए कि वह मर चुकी होगी। लेकिन वह हिम्मत नहीं हारी और जलती हालत में दौड़ते हुए हमारे घर तक पहुंची।”

पीड़िता को समय पर एंबुलेंस न मिलने की वजह से ऑटो से अस्पताल ले जाना पड़ा। चश्मदीद ने बताया कि लड़की 90 मिनट तक उनके घर पर रही और 70% झुलस चुकी थी। बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए दिल्ली एम्स रेफर किया गया।

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