वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य के दौरान मंदिर को हुए नुकसान को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता सुमित्रा महाजन ने प्रशासन और सरकार दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन धरोहरों को तोड़ने का लाइसेंस किसी को नहीं दिया जा सकता।
“यह मामूली गलती नहीं, बड़ा हादसा है”
आक्रामक अंदाज में बोलते हुए सुमित्रा महाजन ने कहा कि उन्हें वाराणसी के स्थानीय लोगों से घटनास्थल की जानकारी मिली और प्रशासन की रिपोर्ट में भी यह स्वीकार किया गया है कि जेसीबी की टक्कर से पुराना ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “मंदिरों पर मशीनें चढ़ाना लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध है। यह कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि गंभीर हादसा है।”
करोड़ों खर्च, फिर भी निगरानी क्यों नहीं?
सुमित्रा महाजन ने सवाल उठाया कि घाटों और मंदिरों के संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका जैसे पवित्र स्थल पर काम करते समय वही सावधानी बरती जानी चाहिए, जैसी इंदौर या मैसूर में ऐतिहासिक धरोहरों के जीर्णोद्धार के दौरान की जाती है।
“विकास के साथ विरासत की सुरक्षा अनिवार्य”
वरिष्ठ नेता ने कहा कि सरकारें केवल योजनाएं गिनाकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं। यदि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसा सुनियोजित कार्य संभव है, तो फिर मणिकर्णिका घाट पर हुआ हादसा किसकी नाकामी है—यह तय होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गलती स्वीकार करना पर्याप्त नहीं, जवाबदेही तय करनी होगी।
दल-बदल पर भी सख्त संदेश
मणिकर्णिका घाट विवाद के साथ-साथ सुमित्रा महाजन ने राजनीतिक दल-बदल को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जो नेता और कार्यकर्ता भाजपा छोड़कर कांग्रेस या अन्य दलों में गए हैं, उन्हें जहां भी हों, ईमानदारी और निष्ठा से काम करना चाहिए।उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “आया राम, गया राम” की राजनीति से अंततः भाजपा की ही बदनामी होती है, क्योंकि अगर दल बदलने वाले अच्छा काम नहीं करते, तो दोष उसी पार्टी पर आता है, जहां से वे गए होते हैं।








