लखनऊ में स्कूलों के बाहर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राजधानी के छह प्रमुख स्कूलों के प्रिंसिपल या वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि अब तक उन्होंने यातायात समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं।
स्कूलों को सुधार का अंतिम मौका
हाईकोर्ट ने साफ किया है कि स्कूल प्रबंधन को ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने का पूरा अवसर दिया जा रहा है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि स्कूल व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव प्रस्तुत करें, ताकि स्कूल खुलने और छुट्टी के समय आम नागरिकों को जाम का सामना न करना पड़े।कोर्ट ने चेतावनी भी दी है कि यदि संतोषजनक प्रयास नहीं दिखे, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
2020 की जनहित याचिका से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2020 में गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स द्वारा दायर जनहित याचिका से संबंधित है। याचिका में कहा गया था कि आवासीय इलाकों में स्थित बड़े स्कूलों के कारण रोजाना ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी होती है।
पहले के आदेशों की अनदेखी
न्याय मित्र ने अदालत को बताया कि कुछ स्कूलों ने पहले दिए गए कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके चलते अदालत को सख्त रुख अपनाना पड़ा।
इन स्कूलों को किया गया तलब
नोटिस पाने वाले स्कूलों में शामिल हैं—
ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज, हजरतगंज
लोरेटो कॉन्वेंट, गौतमपल्ली
सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (कई कैंपस)
सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल
इन स्कूलों से पिक-अप और ड्रॉप सिस्टम, पार्किंग व्यवस्था, ट्रैफिक कंट्रोल और छात्रों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत जवाब मांगा गया है।








