Lucknow: नई किताबें कबाड़ी को बेचने पर हेडमास्टर निलंबितLucknow: नई किताबें कबाड़ी को बेचने पर हेडमास्टर निलंबित

लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की नई किताबें कबाड़ी को बेचने का गंभीर मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच के बाद प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया है, जबकि शिक्षा विभाग ने आगे की कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

शिक्षा विभाग के अनुसार, निरीक्षण प्रक्रिया में लापरवाही संभव है, हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि कार्य पुस्तिकाएं विद्यालय में मौजूद थीं। ऐसी स्थिति में उन्हें कबाड़ में बेचने के बजाय छात्रों में वितरित किया जाना चाहिए था।

जांच में क्या सामने आया

मामले के सामने आने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान:

  • स्थानीय लोगों से घटनाक्रम की जानकारी ली गई

  • कबाड़ी से भी पूछताछ की गई

  • यह तथ्य सामने आया कि किताबें तय कीमत पर बेची गई थीं

  • बाद में मामले के उजागर होने पर किताबें वापस लेने की कोशिश की गई

जांच में यह भी सामने आया कि कक्षा 1 से 5 तक की पाठ्यपुस्तकें और कार्यपुस्तिकाएं कबाड़ी को दी गई थीं, जिनका कुल वजन लगभग दो क्विंटल बताया गया।

ग्रामीणों के बयान से पुष्टि

जांच के दौरान मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि:

  • प्रधानाध्यापक स्वयं विद्यालय में मौजूद थे

  • उनकी उपस्थिति में ही किताबें बाहर ले जाई गईं

  • यह कार्य जानबूझकर किया गया

कबाड़ी से बातचीत में भी यह स्पष्ट हुआ कि किताबें पहले बेची गईं, बाद में विवाद होने पर वापस मंगाने की बात कही गई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की है। साथ ही:

  • विद्यालय प्रशासन से लिखित जवाब मांगा गया है

  • यह जानकारी मांगी गई है कि किताबें किस वर्ष की थीं

  • अन्य शैक्षणिक सामग्री का भी पूरा विवरण तलब किया गया है

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में अन्य दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

20% बच्चों के पास पूरी किताबें नहीं

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार:

  • नगर और ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक विद्यालयों में

  • करीब 20% छात्रों के पास पाठ्यक्रम की सभी किताबें उपलब्ध नहीं हैं

  • जुलाई–अगस्त में किताबों की मांग भेजी गई थी, लेकिन आपूर्ति अब तक पूरी नहीं हुई

इसके बावजूद संबंधित विद्यालय में अतिरिक्त किताबें होने के बावजूद उन्हें जरूरतमंद छात्रों को देने के बजाय बेच दिया गया, जो गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।

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