Lucknow में शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Mohammad Yunus के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध Bharatiya Janata Party कार्यालय के सामने हुआ, जहां प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री का पुतला फूंका, उनकी तस्वीर को जूतों से पीटा और बांग्लादेश के झंडे को पैरों से कुचला।
प्रदर्शन के दौरान “बांग्लादेश मुर्दाबाद” के नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि Bangladesh में हिंदू समुदाय पर अत्याचार हो रहे हैं और यदि यह बंद नहीं हुआ तो भारत में रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ आंदोलन तेज किया जाएगा।
हिंदुओं पर अत्याचार का आरोप
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर हिंसा, मंदिरों को नुकसान, महिलाओं और बच्चियों के साथ अपराध तथा हिंदुओं को सरकारी नौकरियों से बाहर किए जाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
भारत सरकार से कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने Narendra Modi से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि भारत सरकार को बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाकर वहां अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर भी उठी मांग
प्रदर्शन के दौरान यह भी मांग उठी कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिला नोबेल शांति पुरस्कार वापस लिया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस देश में हिंसा और धार्मिक उत्पीड़न हो रहा हो, वहां के नेतृत्व को शांति का प्रतीक नहीं माना जा सकता।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि बांग्लादेश में हालात नहीं सुधरे तो विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा और देशभर में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में प्रदर्शन शांतिपूर्वक संपन्न कराया गया।








