Israel-Iran War Impact: Paracetamol समेत कई दवाओं के साल्ट महंगे, कीमतों में 40% तक उछाल
मध्य-पूर्व में जारी Israel–Iran conflict का असर अब दवा उद्योग पर भी दिखने लगा है। युद्ध की वजह से दवाओं में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट 25 से 40 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। इससे पैरासिटामॉल समेत कई जरूरी दवाओं की कीमतों में 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
API महंगा होने से दवा उत्पादन प्रभावित
फार्मा कारोबारियों के अनुसार API की कीमतें बढ़ने से दवाओं का उत्पादन महंगा हो गया है। कई डिस्ट्रीब्यूटर और API उत्पादकों ने पुराने ऑर्डर रद्द कर नए दामों पर ऑर्डर देने को कहा है, जिससे दवा कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ रही है।
District Druggist and Chemist Association के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी के कारण सस्ती दवाएं बनाना मुश्किल हो गया है। सरकार द्वारा तय कीमतों के कारण कंपनियां जरूरी दवाओं की कीमत आसानी से नहीं बढ़ा सकतीं, जिससे उद्योग को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
40% तक बढ़ सकते हैं दवाओं के दाम
एसोसिएशन के महामंत्री Rajneesh Kaushal ने बताया कि API के दाम अचानक बढ़ा दिए गए हैं। अगर यही स्थिति जारी रही तो दवा उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है और भविष्य में जीवनरक्षक दवाओं की वैश्विक बाजार में कमी भी हो सकती है।
कई जरूरी दवाओं की कीमत बढ़ी
दवा व्यापारियों के अनुसार कई सामान्य और एंटीबायोटिक दवाओं के दाम बढ़ चुके हैं।
एजिथ्रोमाइसिन (3 टैबलेट): ₹80 से बढ़कर ₹98
पैरासिटामॉल (10 टैबलेट): ₹8 से बढ़कर ₹14
मोंटेलूकास्ट सोडियम (10 टैबलेट): ₹180 से ₹240
डायक्लोफेनक सोडियम (10 टैबलेट): ₹20 से ₹35
सिप्रोफ्लोक्सेसिन (10 टैबलेट): ₹48 से ₹60
एमिकासिन (10 टैबलेट): ₹113 से ₹140
ग्लिसरीन (100 ग्राम): ₹160
API के पुराने और नए दाम
दवा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार कई API के दाम भी तेजी से बढ़े हैं।
| API / कच्चा माल | पुराना दाम | नया दाम |
|---|---|---|
| अस्किलोफिनेक | 935 | 975 |
| पैरासिटामॉल | 255 | 310 |
| क्लोरोजॉक्सोन | 710 | 880 |
| MDC | 45 | 60 |
| मिथाइलकोबालामिन | 1.15 लाख | 1.35 लाख |
| पोटेशियम क्लैवुलनेट | 15000 | 17500 |
| प्लेन पॉली | 360 | 390 |
| बेस पॉली | 410 | 450 |
| पॉली बैग | 114 | 170 |
| PVC | 112 | 150 |
वैश्विक संकट का असर भारतीय बाजार पर
फार्मा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर Israel-Iran युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन संकट जारी रहा तो आने वाले समय में दवाओं की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।







