उरई। रबी सीजन में किसानों को खाद की कमी न हो, इसके लिए जालौन जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी है। सहकारी समितियों के सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल के बीच जिलाधिकारी समीर ने स्पष्ट किया है कि जिले में उर्वरक की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं और अन्य केंद्रों से बिक्री कराई जा रही है। प्रशासन ने कुल 23 केंद्रों के माध्यम से उर्वरक वितरण की व्यवस्था की है।
रबी की फसलों की बुवाई और शुरुआती कृषि कार्यों के दौरान किसानों के लिए डीएपी समेत अन्य उर्वरकों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल से खाद वितरण प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक इंतजाम किए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को खाद के लिए परेशान होने से बचाना और वितरण व्यवस्था को लगातार चालू रखना है।
23 केंद्रों से होगी खाद की बिक्री
जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जिले में विभिन्न संस्थाओं के कुल 23 केंद्रों को उर्वरक बिक्री के लिए निर्धारित किया गया है। इनमें सहकारी संघों के पांच, क्रय-विक्रय समितियों के तीन, पीसीएफ के तीन और आईएफएफडीसी के आठ केंद्र शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त डीसीडीएफ, जालौन बहुउद्देशीय विपणन सहकारी समिति, इफको ई-बाजार और एग्रीजंक्शन के एक-एक केंद्र से भी उर्वरक की बिक्री की व्यवस्था की गई है। इन केंद्रों पर किसानों को डीएपी उपलब्ध कराने के लिए आपूर्ति की जा रही है। प्रशासन के मुताबिक, इस व्यवस्था के जरिए सहकारी समितियों की हड़ताल के बावजूद किसानों तक खाद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
27 और 28 अक्टूबर से जुड़ेगा आपूर्ति का कार्यक्रम
प्रशासन के अनुसार, सहकारी संघों, क्रय-विक्रय समितियों और पीसीएफ के बिक्री केंद्रों पर रैक प्वाइंट से डीएपी की खेप 27 अक्टूबर तक पहुंच रही है। वहीं, शेष निर्धारित केंद्रों पर 28 अक्टूबर से खाद की बिक्री शुरू हो जाएगी।
इस व्यवस्था के तहत किसानों को अलग-अलग संस्थाओं के केंद्रों से खाद उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। हालांकि, किसानों को केंद्र पर जाने से पहले वहां उर्वरक की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त कर लेना उपयोगी रहेगा, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
हड़ताल के बावजूद खाद वितरण जारी रखने के निर्देश
सहकारी समितियों के सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। शासन ने रबी सीजन में उर्वरक की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम यानी ईएसएमए लागू किया है। इसके अंतर्गत सहकारी समितियों में हड़ताल प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक वितरण व्यवस्था प्रभावी की गई है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर वितरण व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि खाद की बिक्री और आपूर्ति में रुकावट न आए।
काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की चेतावनी
जिलाधिकारी समीर ने कहा है कि यदि संबंधित समितियों के सचिव और कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं, तो अपरिहार्य स्थिति में अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके माध्यम से सहकारी समितियों के जरिए भी उर्वरक की बिक्री कराई जाएगी।
आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में प्रशासन ने कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। 27 अक्टूबर को भी वितरण कार्य नहीं करने वाले सचिवों और कर्मचारियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा 38 के अंतर्गत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत संबंधित कर्मचारियों को समिति की सेवा से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
खाद से जुड़ी समस्या के लिए जारी किया नंबर
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की है कि उर्वरक की उपलब्धता से संबंधित जानकारी प्राप्त करने या किसी समस्या के समाधान के लिए सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता से संपर्क करें। इसके लिए मोबाइल नंबर 9412421992 जारी किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि रबी सीजन में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। वैकल्पिक केंद्रों से बिक्री, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के जरिए वितरण व्यवस्था को सुचारु रखने का प्रयास किया जाएगा।