बरेली। साइबर ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर एक दंपति को करीब 10 घंटे तक वीडियो कॉल पर डराए रखा। गिरफ्तारी और गंभीर आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देकर ठग उनसे बैंक खातों की जानकारी हासिल करने और पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे थे। माता-पिता डर के कारण ठगों के निर्देश मानते रहे, लेकिन घर में मौजूद आठवीं कक्षा के छात्र ने उनकी चाल पहचान ली। बेटे ने चुपचाप मोबाइल को फ्लाइट मोड पर डालकर कॉल काट दी और ठगी की कोशिश नाकाम कर दी।
यह मामला बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र का है। छात्र तन्मय सक्सेना की सूझबूझ से परिवार आर्थिक नुकसान से बच गया। उसकी सतर्कता के लिए बरेली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे सम्मानित किया और साइबर अपराध के प्रति जागरूकता फैलाने में उसकी भूमिका को सराहा।
ATS अधिकारी बनकर आया फोन, गिरफ्तारी का डर दिखाया
जानकारी के मुताबिक, परिवार के सदस्य संजय सक्सेना को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी ATS का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि परिवार का मोबाइल नंबर कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों से जुड़ा है और गंभीर वित्तीय अपराध में भी उसका इस्तेमाल हुआ है।
इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए दबाव बढ़ाया। उन्होंने पुलिस की वर्दी में दिखाई देने वाले व्यक्ति और कथित गिरफ्तारी वारंट का सहारा लेकर परिवार को विश्वास दिलाने की कोशिश की कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने वाली है। दंपति को डराया गया कि यदि उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
ठगों ने परिवार को लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने, घर से बाहर नहीं निकलने और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने के निर्देश दिए। इस तरह डर और दबाव का माहौल बनाकर उन्होंने दंपति को घंटों तक अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश की।
बैंक खातों और संपत्ति की जानकारी मांगने लगे ठग
कॉल के दौरान साइबर अपराधियों ने परिवार से बैंक खातों, आर्थिक स्थिति और संपत्ति से जुड़ी जानकारी पूछनी शुरू कर दी। उनका उद्देश्य दंपति को डराकर उनकी निजी वित्तीय जानकारी हासिल करना और रकम ऐंठना था। परिवार को कथित कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लगातार निर्देश दिए जा रहे थे।
दंपति इस कदर घबरा गए कि उन्हें ठगों की बातों पर संदेह होने के बावजूद कॉल काटने की हिम्मत नहीं हुई। परिवार का बेटा तन्मय यह सब देख रहा था। उसे कॉल करने वालों के दावों और उनके व्यवहार में गड़बड़ी महसूस हुई। उसने माता-पिता को समझाने की कोशिश की कि सामने वाले लोग असली अधिकारी नहीं, बल्कि साइबर ठग हो सकते हैं।
बेटे ने फ्लाइट मोड लगाकर तोड़ा ठगों का संपर्क
तन्मय ने कई बार अपने माता-पिता से कहा कि वे फोन काट दें और ठगों की बातों में न आएं। लेकिन गिरफ्तारी के डर से वे उसकी बात मानने को तैयार नहीं हुए। जब ठगों का दबाव लगातार बढ़ता गया, तो तन्मय ने मौका देखकर मोबाइल फोन को फ्लाइट मोड पर डाल दिया।
फोन का नेटवर्क बंद होते ही ठगों से संपर्क टूट गया। इसके बाद परिवार को स्थिति समझने और राहत की सांस लेने का मौका मिला। तन्मय की इस सूझबूझ ने ठगों की योजना पर पानी फेर दिया। पुलिस के अनुसार, इस घटना में परिवार को आर्थिक नुकसान नहीं हुआ।
अगले दिन परिवार ने प्रेमनगर थाने पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया और साइबर ठगी की कोशिश की जांच शुरू की। परिवार के बैंक खातों को सुरक्षित रखने के लिए भी पुलिस स्तर पर कदम उठाए गए।
बरेली पुलिस ने तन्मय को किया सम्मानित
तन्मय की सतर्कता की जानकारी मिलने के बाद बरेली जोन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उसे और उसके माता-पिता को सम्मानित किया। एडीजी जोन रमित शर्मा और एसएसपी अनुराग आर्य सहित अधिकारियों ने बच्चे की समझदारी की सराहना की।
पुलिस ने तन्मय को साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक करने की पहल से भी जोड़ा। अधिकारियों का मानना है कि बच्चों और युवाओं में साइबर ठगी के तरीकों को लेकर जागरूकता बढ़ाने से ऐसे अपराधों को रोकने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराना भी ठगी का तरीका
इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के उस तरीके को उजागर किया, जिसमें वे पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। वे फर्जी दस्तावेजों, वर्दी में वीडियो और गंभीर आरोपों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को मानसिक दबाव में लेते हैं। इसके बाद बैंक खातों और संपत्ति की जानकारी मांगते हैं या रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाते हैं।
ध्यान रहे कि वीडियो कॉल पर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर किसी को कानूनी रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं कर सकता। ऐसे कॉल आने पर घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें और न ही बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करें। कॉल को सुरक्षित तरीके से समाप्त कर संबंधित पुलिस थाने या साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
बरेली के इस मामले में आठवीं कक्षा के छात्र ने जिस सतर्कता का परिचय दिया, वह परिवारों के लिए अहम सीख है। किसी भी अनजान कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी, गोपनीयता बनाए रखने का दबाव और तुरंत पैसे देने की मांग को गंभीर चेतावनी के रूप में लेना चाहिए।