कुशीनगर। जिले में औषधि विभाग की टीम ने शुक्रवार दोपहर मुखबिर की सूचना और शिकायत के आधार पर एक मेडिकल स्टोर की जांच की। उपजिलाधिकारी तमकुही के निर्देश पर पटहेरवा पुलिस के साथ पहुंची टीम को जांच के दौरान कई अनियमितताएं मिलीं। मेडिकल स्टोर बिना साइन बोर्ड के संचालित पाया गया। जांच के दौरान संचालक की ओर से औषधियों की खरीद-बिक्री के अभिलेख और वैध विक्रय लाइसेंस भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला औषधि टीम को मेडिकल स्टोर के संचालन में नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिली थी। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दुकान की जांच की। जांच के दौरान टीम ने दुकान के संचालन से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन मौके पर आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए।
बिना साइन बोर्ड के संचालित मिला मेडिकल स्टोर
जांच के दौरान मेडिकल स्टोर पर साइन बोर्ड नहीं लगा मिला। औषधि विभाग की टीम ने दुकान संचालित करने वाले व्यक्ति से दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड और औषधि विक्रय लाइसेंस दिखाने को कहा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति मौके पर ये दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
मेडिकल स्टोर के संचालन में लाइसेंस और खरीद-बिक्री के अभिलेख महत्वपूर्ण होते हैं। इनके माध्यम से दवाओं की आपूर्ति, बिक्री और संबंधित कारोबारी गतिविधियों का सत्यापन किया जाता है। दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर औषधि विभाग नियमों के तहत आगे की जांच और कार्रवाई कर सकता है।
पिता के नाम पर मिला लाइसेंस
जांच में यह भी सामने आया कि मेडिकल स्टोर से संबंधित लाइसेंस संचालक के पिता के नाम पर था। बताया गया है कि उनके पिता का करीब तीन वर्ष पहले निधन हो चुका है। इसके बावजूद दुकान के संचालन के दौरान वर्तमान संचालक की ओर से अपने नाम का वैध औषधि विक्रय लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किया गया।
इस तथ्य के बाद दुकान के लाइसेंस की वैधता और उसके आधार पर कारोबार जारी रखने की स्थिति जांच का विषय बन गई है। औषधि बिक्री के लिए लागू नियमों के अनुसार वैध लाइसेंस और अधिकृत संचालन आवश्यक है। केवल किसी मृत व्यक्ति के नाम पर जारी पुराने लाइसेंस का होना अपने आप में वर्तमान संचालन की वैधता साबित नहीं करता।
औषधि विभाग की जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर
मेडिकल स्टोर की जांच उपजिलाधिकारी तमकुही के निर्देश पर पटहेरवा पुलिस की मौजूदगी में की गई। कार्रवाई का उद्देश्य शिकायत के आधार पर दुकान के संचालन और दवाओं की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति की पड़ताल करना था।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में मेडिकल स्टोर का नाम, संचालक की पहचान और जांच के बाद की गई अंतिम कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है। औषधि विभाग की ओर से आगे क्या कदम उठाए गए, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही की जा सकेगी।
यह मामला दवाओं की बिक्री में वैध लाइसेंस और रिकॉर्ड बनाए रखने की अहमियत को सामने लाता है। मेडिकल स्टोरों के नियमित निरीक्षण से नियमों के पालन की जांच की जा सकती है और अनियमितताएं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
