प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश के बावजूद दुष्कर्म के मामले में आरोपी को पेश नहीं किए जाने पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बीबीजीटीएस मूर्ति को कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान अदालत ने एसएसपी को करीब 45 मिनट तक खड़े रहने का निर्देश दिया। मामला आरोपी नितीश उर्फ सिद्धांत उर्फ सेठी की पेशी और उसकी जमानत निरस्त करने की याचिका से जुड़ा है।
24 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट से जारी गैर-जमानती वारंट का पालन कराना और आरोपी को निर्धारित अदालत में पेश कराना संबंधित पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अदालत ने मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की भूमिका पर भी सवाल उठाए और उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार करने का निर्देश दिया।
शादी के आश्वासन पर मिली थी जमानत
मामला मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र से जुड़ा है। मामले में एक महिला ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाया था। बाद में आरोपी ने हाईकोर्ट में महिला से शादी करने का आश्वासन दिया था। इसी आश्वासन के आधार पर 18 मार्च 2026 को उसे जमानत मिली थी।
महिला ने बाद में अदालत का रुख करते हुए आरोप लगाया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी अपने वादे से मुकर गया। उसने आरोपी की जमानत निरस्त करने की मांग की। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आरोपी को पेश करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया।
आरोपी को हाईकोर्ट में पेश करने में हुई चूक
अदालत के आदेश के बावजूद आरोपी को निर्धारित तरीके से हाईकोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश कर दिया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
हाईकोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब गैर-जमानती वारंट आरोपी को हाईकोर्ट में पेश करने के लिए जारी किया गया था, तो उसे संबंधित अदालत के सामने क्यों नहीं लाया गया। इस चूक के बाद एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना पड़ा।
SSP ने दी अपनी सफाई
सुनवाई के दौरान बीबीजीटीएस मूर्ति ने अदालत को बताया कि संबंधित अवधि में वह अवकाश पर थे और उनके अधीनस्थ अधिकारियों से चूक हुई थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि गैर-जमानती वारंट का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी एसएसपी की थी। अधीनस्थ अधिकारियों की गलती बताकर इस जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
अदालत ने एसएसपी को भविष्य में न्यायिक आदेशों के अनुपालन को लेकर अधिक सतर्क रहने की हिदायत दी। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें सुनवाई के दौरान करीब 45 मिनट तक खड़े रहना पड़ा।
