लखनऊ। लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था मजबूत करने के लिए निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है। करीब 124 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कुल 140 कैमरे लगाने की योजना है। इस व्यवस्था के जरिए ओवरस्पीडिंग पर नजर रखी जाएगी। निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जा सकेगी।
योजना के तहत हाईवे पर 20 ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाने हैं। इन कैमरों की मदद से वाहनों की नंबर प्लेट पहचानने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। इनके जरिए ओवरस्पीडिंग के मामलों में चालान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य है।
ओवरस्पीडिंग पर रहेगी नजर
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, छोटे वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा और बड़े वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। कैमरों और गति मापने वाली तकनीक की मदद से तय सीमा से अधिक रफ्तार में चलने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी।
हाईवे पर तेज रफ्तार अक्सर दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाती है। ऐसे में स्वचालित निगरानी व्यवस्था से नियमों का पालन सुनिश्चित करने और लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, चालान की कार्रवाई लागू नियमों और संबंधित विभाग की प्रक्रिया के अनुसार होगी।
120 PTZ कैमरों से होगी निगरानी
योजना में 120 पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे लगाने का भी प्रावधान है। ये कैमरे अलग-अलग दिशाओं में घूमकर और दृश्य को जूम करके हाईवे की स्थिति पर नजर रखने में सक्षम होते हैं।
इनकी मदद से यातायात का दबाव, सड़क दुर्घटनाएं, जाम और रास्ते में आने वाली अन्य बाधाओं की निगरानी की जा सकेगी। किसी घटना की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को स्थिति का आकलन करने और जरूरी कदम उठाने में सहायता मिल सकती है।
LED डिस्प्ले बोर्ड से मिलेंगी जरूरी सूचनाएं
हाईवे पर वाहन चालकों को रास्ते की स्थिति, यातायात संबंधी चेतावनियां और अन्य जरूरी सूचनाएं देने के लिए 12 LED डिस्प्ले बोर्ड लगाने की भी योजना है। इन बोर्डों के माध्यम से यात्रियों को आगे की सड़क पर संभावित बाधाओं या यातायात संबंधी निर्देशों की जानकारी दी जा सकेगी।
समय पर सूचना मिलने से वाहन चालक अपनी गति नियंत्रित कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्ते या सुरक्षित ड्राइविंग का निर्णय ले सकते हैं। इससे हाईवे पर यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फरवरी 2027 तक व्यवस्था तैयार करने का लक्ष्य
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कैमरों और संबंधित निगरानी व्यवस्था को फरवरी 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होने पर लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर यातायात की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
हालांकि, कैमरों की स्थापना, तकनीकी व्यवस्था के संचालन और चालान प्रक्रिया लागू होने की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तेज रफ्तार पर नियंत्रण, दुर्घटनाओं की निगरानी और हाईवे पर यात्रा को सुरक्षित बनाना है।