मुंबई में एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को बेहद करीब बताया। रूसी तेल और वेनेजुएला में रिलायंस के अवसरों पर भी चर्चा हुई।
मुंबई/नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। उनके मुताबिक, कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है और जल्द घोषणा की उम्मीद है।
बैठक में व्यापार के साथ ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे। रुबियो ने रूस से कच्चे तेल की खरीद के मामले में भारत की ऊर्जा जरूरतों और स्रोतों में विविधता लाने की कोशिशों का उल्लेख किया। उन्होंने भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता की तारीफ करते हुए वेनेजुएला के तेल के प्रसंस्करण और वहां उत्पादन से जुड़े संभावित अवसरों पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ चर्चा की बात भी कही। हालांकि, व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
व्यापार समझौते पर जल्द घोषणा के संकेत
मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत में अब सीमित संख्या में मुद्दों को अंतिम रूप देना बाकी है।
रुबियो के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग सीधे व्यापार वार्ता का नेतृत्व नहीं करता, लेकिन वह इस प्रक्रिया पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन समझौते को लेकर गंभीरता से काम कर रहा है और जल्द घोषणा की उम्मीद है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर पिछले कुछ समय से बातचीत जारी है। शुल्क संबंधी मतभेद और ऊर्जा आयात से जुड़े मुद्दे वार्ता के अहम पहलुओं में रहे हैं। यदि समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और निवेश सहयोग के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं।
रूसी तेल पर भारत की रणनीति का किया उल्लेख
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर पूछे गए सवाल पर रुबियो ने भारत की ऊर्जा रणनीति में विविधता लाने की कोशिशों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए रातों-रात ऊर्जा आपूर्ति के स्रोत बदलना आसान नहीं होता और भारत ने इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण भागीदार बन सकता है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर काम करना चाहता है।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण आर्थिक विषय है। कच्चे तेल के आयात के स्रोत, कीमतें और रिफाइनिंग क्षमता घरेलू ईंधन आपूर्ति तथा उद्योगों की लागत को प्रभावित करते हैं। ऐसे में भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग की दिशा आने वाले समय में महत्वपूर्ण बनी रह सकती है।
भारत को बताया ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’
रुबियो ने भारत की तेल शोधन क्षमता की सराहना करते हुए उसे ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत के पास भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की उल्लेखनीय क्षमता है, जिसका इस्तेमाल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में किया जा सकता है।
उन्होंने वेनेजुएला के तेल को लेकर भी संभावनाओं का उल्लेख किया। रुबियो के मुताबिक, वेनेजुएला में भारतीय कंपनियों की पहले से मौजूद कारोबारी भागीदारी और भारत की रिफाइनिंग क्षमता इस क्षेत्र में सहयोग के अवसर पैदा कर सकती है।
हालांकि, किसी भी नए कारोबारी कदम की व्यवहार्यता तेल की उपलब्धता, निवेश, नियामकीय शर्तों और लागू प्रतिबंधों पर निर्भर करेगी। इसलिए संभावित सहयोग को अभी बातचीत और अवसरों की तलाश के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।
वेनेजुएला के तेल पर रिलायंस से बातचीत करेगा अमेरिका
रुबियो ने कहा कि अमेरिका रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ वेनेजुएला में तेल उत्पादन और अधिक कच्चे तेल के प्रसंस्करण से जुड़े अवसरों पर चर्चा करेगा। उन्होंने कंपनी की रिफाइनिंग क्षमता और क्षेत्र में उसके पूर्व अनुभव का उल्लेख किया।
अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, वेनेजुएला से जुड़े कारोबारी अवसरों के रास्ते में प्रतिबंधों समेत कुछ बाधाएं हो सकती हैं। इन मुद्दों पर बातचीत के जरिए संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रुबियो के बयान का अर्थ यह नहीं है कि रिलायंस ने वेनेजुएला में नया निवेश या उत्पादन शुरू करने का अंतिम निर्णय ले लिया है। फिलहाल अमेरिका ने संभावित सहयोग और बाधाओं पर चर्चा करने की बात कही है।
जयशंकर के साथ बैठक में रणनीतिक संबंधों पर जोर
मुंबई में हुई बैठक में रुबियो और जयशंकर के साथ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर तथा भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे। रुबियो ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण व्यापारिक और रक्षा साझेदार बताया तथा क्वाड में भारत की भूमिका का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद जरूरी है। बैठक और उसके बाद दिए गए बयानों से व्यापार, ऊर्जा, तकनीक तथा रक्षा क्षेत्रों में सहयोग आगे बढ़ाने की दोनों पक्षों की कोशिश सामने आई।
मुंबई पहुंचने पर रुबियो का स्वागत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। उन्होंने ताजमहल पैलेस होटल स्थित 26/11 स्मारक पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
आगे क्या होगा?
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर रुबियो का बयान वार्ता में प्रगति का संकेत देता है, लेकिन अंतिम परिणाम समझौते की शर्तों और दोनों सरकारों की औपचारिक घोषणा पर निर्भर करेगा। ऊर्जा क्षेत्र में भी अमेरिका भारत के साथ कारोबार बढ़ाना चाहता है, जबकि भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की विश्वसनीयता, लागत और स्रोतों में विविधता अहम बनी रहेगी।
वेनेजुएला में संभावित कारोबारी अवसरों पर रिलायंस के साथ होने वाली बातचीत और व्यापार समझौते के शेष मुद्दों पर आगे की प्रगति पर नजर रहेगी।
यूपी 24 नेटवर्क न्यूज़
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