“मेरठ में 200 करोड़ रुपये के निवेश से क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ रिफाइनरी स्थापित करने की योजना है। ई-वेस्ट और पुरानी बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट व दुर्लभ खनिज निकालने की तैयारी है।“
मेरठ/लखनऊ, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित उद्योगों और महत्वपूर्ण खनिजों की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी परियोजना प्रस्तावित है। मेरठ में 200 करोड़ रुपये के निवेश से क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ रिफाइनरी स्थापित करने की योजना है। इस परियोजना के तहत इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) से कीमती औद्योगिक खनिजों को दोबारा प्राप्त किया जाएगा।
मेरठ की डीप टेक स्टार्टअप सर्कुलाजी क्लींटेक प्राइवेट लिमिटेड ने परियोजना के लिए इन्वेस्ट यूपी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। प्रस्तावित इकाई का उद्देश्य पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैटरियों में मौजूद उपयोगी खनिजों को पुनः प्राप्त कर औद्योगिक उत्पादन के लिए उपलब्ध कराना है।
मेरठ में क्या तैयार होगा और कैसे होगा काम?
प्रस्तावित क्रिटिकल मिनरल रिफाइनरी में इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को अलग कर दोबारा उपयोग योग्य बनाने की योजना है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जाते हैं।
इसके अलावा, पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, हार्ड ड्राइव और इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों में इस्तेमाल होने वाले स्थायी चुंबकों से रेयर अर्थ तत्वों को प्राप्त करने पर भी काम होगा। इनमें नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे तत्व शामिल हैं।
इन खनिजों की खासियत यह है कि आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कई उपकरणों के निर्माण में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
पूरी क्षमता पर सालाना 10 हजार टन सामग्री के प्रसंस्करण का लक्ष्य
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद रिफाइनरी में सालाना 10 हजार टन सामग्री का प्रसंस्करण किया जा सकेगा।
यह क्षमता पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैटरियों से उपयोगी सामग्री निकालने की प्रक्रिया को औद्योगिक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। हालांकि, परियोजना के निर्माण, संचालन शुरू होने की तारीख और वास्तविक उत्पादन क्षमता से संबंधित विस्तृत समयसीमा की पुष्टि अभी आवश्यक है।
इलेक्ट्रिक वाहन से लेकर रक्षा क्षेत्र तक हो सकता है उपयोग
क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ तत्वों का उपयोग कई महत्वपूर्ण उद्योगों में किया जाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, पवन ऊर्जा से जुड़े उपकरणों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और कुछ रक्षा तकनीकों में इन खनिजों की अहम भूमिका होती है।
भारत में इन सामग्रियों की मांग बढ़ने के साथ पुरानी बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से खनिजों की पुनर्प्राप्ति का महत्व भी बढ़ रहा है। घरेलू स्तर पर रीसाइक्लिंग और रिफाइनिंग की क्षमता विकसित होने से कुछ खनिजों की आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तैयार हो सकते हैं।
हालांकि, आयात पर वास्तविक निर्भरता कितनी घटेगी, यह परियोजना की उत्पादन क्षमता, खनिजों की रिकवरी दर, बाजार की मांग और व्यावसायिक संचालन पर निर्भर करेगा।
राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन से जुड़ा व्यापक महत्व
महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भारत की औद्योगिक और तकनीकी रणनीति का अहम हिस्सा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।
ऐसे में मेरठ में प्रस्तावित रिफाइनरी जैसी परियोजनाएं इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से उपयोगी सामग्री प्राप्त करने के प्रयासों को बढ़ावा दे सकती हैं। इससे संसाधनों का दोबारा उपयोग करने और इलेक्ट्रॉनिक कचरे का बेहतर प्रबंधन करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सर्कुलाजी क्लींटेक को मिलेगा औद्योगिक विस्तार का अवसर
परियोजना के लिए सर्कुलाजी क्लींटेक प्राइवेट लिमिटेड और इन्वेस्ट यूपी के बीच एमओयू किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने में नियमानुसार सहयोग करेगी। इसके साथ ही पात्रता के आधार पर केंद्र और राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिलाने में सहायता का प्रावधान है।
यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन के अनुसार, प्रदेश सरकार स्थानीय उद्यमियों और तकनीक आधारित स्टार्टअप को बड़े औद्योगिक निवेश से जोड़ने के लिए प्रयासरत है। डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त सर्कुलाजी को यूपी स्टार्टअप मिशन के तहत भी सहयोग मिला है।
यह पहल तकनीक आधारित स्टार्टअप को बड़े औद्योगिक स्तर पर काम करने का अवसर दे सकती है। परियोजना से स्थानीय स्तर पर तकनीकी कौशल, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। हालांकि, रोजगार की अनुमानित संख्या और परियोजना के संचालन की समयसीमा की आधिकारिक जानकारी सामने आने पर तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
मेरठ के औद्योगिक विकास के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
मेरठ में प्रस्तावित 200 करोड़ रुपये की रिफाइनरी केवल निवेश से जुड़ी परियोजना नहीं है, बल्कि यह इलेक्ट्रॉनिक कचरे से उपयोगी संसाधन प्राप्त करने और तकनीक आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि परियोजना निर्धारित क्षमता और मानकों के अनुरूप संचालित होती है, तो इससे बैटरी रीसाइक्लिंग, महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और पर्यावरणीय प्रबंधन के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
फिलहाल परियोजना एमओयू और प्रस्तावित निवेश के स्तर पर है। इसके निर्माण, आवश्यक स्वीकृतियों, संचालन की समयसीमा और रोजगार से जुड़े विस्तृत विवरण सामने आने के बाद इसके वास्तविक औद्योगिक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
यूपी 24 नेटवर्क न्यूज़ | मेरठ, उत्तर प्रदेश
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