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ताजमहल पर कीड़ों का हमला, संगमरमर पर पड़े हरे-काले दाग; यमुना के प्रदूषण पर उठे सवाल

“आगरा में ताजमहल पर कीड़ों का हमला फिर चर्चा में है। यमुना प्रदूषण के बीच संगमरमर पर हरे-काले दाग मिले। जानें ASI की कार्रवाई और सफाई की मांग। “ आगरा, उत्तर प्रदेश। ताजमहल पर कीड़ों का हमला एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। दुनिया भर में अपनी सफेद संगमरमरी खूबसूरती के लिए […]

Green and black insect stains on the northern marble walls of the Taj Mahal in Agra,आगरा के ताजमहल की संगमरमरी दीवारों पर कीड़ों के कारण हरे और काले दाग,

“आगरा में ताजमहल पर कीड़ों का हमला फिर चर्चा में है। यमुना प्रदूषण के बीच संगमरमर पर हरे-काले दाग मिले। जानें ASI की कार्रवाई और सफाई की मांग। “

आगरा, उत्तर प्रदेश। ताजमहल पर कीड़ों का हमला एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। दुनिया भर में अपनी सफेद संगमरमरी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध इस ऐतिहासिक स्मारक की यमुना की ओर स्थित उत्तरी दीवारों पर हरे और काले रंग के दाग दिखाई दिए हैं। इन निशानों को गोल्डी काइरोनॉमस नामक कीड़ों से जोड़ा जा रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसके लिए यमुना में पहुंच रहे सीवर, गंदगी और प्रदूषण पर सवाल उठाते हुए नदी की सफाई और नालों की टैपिंग की मांग की है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार ने निरीक्षण के दौरान संगमरमर की विभिन्न सतहों पर ऐसे निशान पाए। विभाग के अनुसार, इन्हें साफ कराने के लिए साइंस ब्रांच की मदद ली जाएगी।

ताजमहल के संगमरमर पर कहां मिले हरे-काले दाग?

ताजमहल के निरीक्षण के दौरान मकबरे की दीवारों, चमेली फर्श पर बने कमरों की जालियों, मेहराबों और स्टील रेलिंग के लिए बनाए गए संगमरमर के आधार पर दाग दिखाई दिए। ये हिस्से यमुना की ओर स्थित हैं, जहां कीड़ों की मौजूदगी देखी गई।

बताया गया है कि गोल्डी काइरोनॉमस नामक कीड़े संगमरमर की सतह पर बैठते हैं और मल छोड़ते हैं। इससे पत्थर पर हरे तथा काले निशान बन सकते हैं। फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक, दागों को हटाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराने की तैयारी है। स्थायी नुकसान की स्थिति के बारे में कोई निष्कर्ष उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है।

यमुना में सीवर और प्रदूषण को बताया जा रहा वजह

पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, यमुना में सीवर और गंदगी पहुंचने से ऐसे कीड़ों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। नदी में पानी का बहाव कम होने और प्रदूषण बढ़ने के दौरान यह समस्या ज्यादा दिखाई दे सकती है।

ताजमहल के पीछे यमुना में मंटोला नाले के जरिए पहुंचने वाले गंदे पानी को भी इस मामले में जिम्मेदार बताया गया है। गोल्डी काइरोनॉमस कीड़े अधिक ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते, इसलिए उनका असर नदी के नजदीक स्थित निचले हिस्सों और आसपास की संगमरमरी सतहों पर अधिक दिखाई देता है।

हालांकि, कीड़ों की संख्या में वृद्धि और स्मारक पर बने निशानों के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष के लिए वैज्ञानिक जांच और संबंधित विभागों की विस्तृत जानकारी अहम होगी।

वर्ष 2016 में भी सामने आया था मामला

ताजमहल के संगमरमर पर कीड़ों के कारण दाग पड़ने की समस्या वर्ष 2016 में भी सामने आई थी। उस समय इस मुद्दे को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में उठाया गया था। इसके बाद दशहरा घाट और आसपास के हिस्सों में सफाई तथा सिल्ट हटाने की कार्रवाई की गई थी।

प्रदूषण कम करने, नालों को टैप करने और यमुना में पानी का बहाव बनाए रखने जैसे उपायों पर विचार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित किए जाने की जानकारी भी दी गई थी।

मौजूदा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि नदी में प्रदूषण रोकने और ताजमहल के आसपास पर्यावरणीय परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए किए गए प्रयास कितने प्रभावी रहे हैं। वर्ष 2016 से इस तरह की समस्या सामने आने के कारण स्थायी समाधान की मांग भी तेज हुई है।

नालों की टैपिंग और यमुना की सफाई की मांग

अधिवक्ता और पर्यावरण कार्यकर्ता केसी जैन ने कहा कि प्रदूषण के कारण कीड़ों की संख्या बढ़ रही है। उनके मुताबिक, यमुना की सफाई के लिए सिल्ट हटाने और प्रदूषण रोकने के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।

वहीं, याचिकाकर्ता डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने दावा किया कि नालों की टैपिंग और सीवर व्यवस्था में सुधार से जुड़े निर्देशों पर अपेक्षित काम नहीं हुआ है। पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने भी मंटोला, भैंरो नाले और ताज टैनरी के पास से नदी में पहुंचने वाले कचरे, सीवर और सिल्ट को लेकर चिंता जताई।

इन पर्यावरण कार्यकर्ताओं की मांग है कि यमुना में गंदे पानी का प्रवाह रोकने, नालों के प्रदूषण को नियंत्रित करने और नदी की सफाई के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इन बयानों में लगाए गए आरोप संबंधित कार्यकर्ताओं के दावे हैं; उनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक स्थिति की जानकारी आवश्यक है।

ASI कराएगा संगमरमर के दागों की सफाई

ASI की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार के अनुसार, निरीक्षण में यमुना की ओर स्थित संगमरमर पर कीड़ों से जुड़े हरे-काले दाग मिले हैं। इन्हें हटाने के लिए साइंस ब्रांच से कहा जा रहा है। विभाग ने पहले भी प्रदूषण से जुड़ी ऐसी समस्या सामने आने पर सफाई की कार्रवाई की थी।

ताजमहल की सुरक्षा केवल संगमरमर की नियमित सफाई तक सीमित नहीं है। नदी में प्रदूषण नियंत्रण, सीवर का उचित प्रबंधन, नालों की टैपिंग और यमुना की सफाई जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण हैं। यदि प्रदूषण से जुड़ी परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो ऐसे निशानों की समस्या दोबारा सामने आ सकती है।

ताजमहल पर कीड़ों का हमला और संगमरमर पर उभरते दाग एक बार फिर आगरा में यमुना प्रदूषण तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को चर्चा में ले आए हैं। अब निगाहें ASI की सफाई संबंधी कार्रवाई और नदी में प्रदूषण रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर रहेंगी।

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