“मेरठ में जमीन विवाद के मुकदमे से नाम हटाने के बदले 20 हजार रुपये मांगने के आरोप में मवाना खुर्द चौकी प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित। कथित सौदेबाजी का ऑडियो वायरल होने पर डीआईजी ने कार्रवाई के निर्देश दिए।“
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में जमीन विवाद से जुड़े एक मुकदमे में आरोपितों के नाम हटाने के बदले 20 हजार रुपये मांगने के आरोप ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। मामले में मवाना खुर्द चौकी प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि जमीन के दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़े से जुड़े मुकदमे में राहत देने के नाम पर रकम की मांग की गई थी। इस कथित सौदेबाजी का ऑडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंचा।
मामले का संज्ञान लेते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद चौकी प्रभारी विकास कुमार, दारोगा नीरज कुमार और दीवान सचिन कुमार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। हालांकि, रिश्वत मांगने से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।
जमीन के दानपत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद
मामला जमीन के स्वामित्व और दानपत्र से जुड़े विवाद का है। ग्राम पहाड़पुर निवासी पुलिसकर्मी कपिल देव ने आरोप लगाया कि उनके भाई राहुल काकरान और अन्य लोगों के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। उनका दावा है कि राहुल काकरान, अमित कुमार, सतपाल सिंह और सचिन कुमार ने कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जमीन अपने नाम दानपत्र के रूप में दर्ज करा ली।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, जमीन से संबंधित दस्तावेजों में 20 अगस्त 2025 और 3 जुलाई 2026 को कथित फर्जीवाड़ा किया गया। इस संबंध में मवाना थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद मामले की विवेचना मवाना खुर्द चौकी पर तैनात दारोगा नीरज कुमार को सौंपी गई।
मुकदमे से नाम हटाने के बदले 20 हजार मांगने का आरोप
शिकायतकर्ता कपिल देव के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपित पक्ष के लोगों को पूछताछ के लिए चौकी बुलाया गया था। आरोप है कि इसी दौरान चौकी प्रभारी विकास कुमार, दारोगा नीरज कुमार और दीवान सचिन कुमार ने मुकदमे से नाम हटाने के बदले 20 हजार रुपये की मांग की।
बताया गया है कि बातचीत के दौरान कथित तौर पर रकम को लेकर सौदेबाजी हुई। इसी बातचीत की मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग कर ली गई। बाद में संबंधित पक्ष के कुछ लोग कथित ऑडियो लेकर डीआईजी से मिले और मामले में कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल, रिश्वत मांगने के आरोप और ऑडियो में हुई बातचीत की वास्तविकता की पुष्टि जांच के आधार पर होनी है।
ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में कार्रवाई
मामले में कथित रिश्वत की सौदेबाजी का ऑडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया। डीआईजी कलानिधि नैथानी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके बाद मवाना खुर्द चौकी प्रभारी विकास कुमार, दारोगा नीरज कुमार और दीवान सचिन कुमार को निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोप विवेचना के दौरान मुकदमे से नाम हटाने के बदले पैसे मांगने से जुड़ा है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे विभागीय और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अब ऑडियो और पूरे मामले की जांच पर नजर
इस प्रकरण में जमीन के दस्तावेजों से जुड़े मूल विवाद के साथ पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच भी महत्वपूर्ण होगी। जांच में कथित ऑडियो की सत्यता, बातचीत का संदर्भ और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका स्पष्ट की जानी है।
फिलहाल, तीनों पुलिसकर्मियों का निलंबन अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई है। रिश्वत मांगने के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा। वहीं, जमीन के स्वामित्व और दस्तावेजों से जुड़े विवाद का निस्तारण भी संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत होना है।
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