“जम्मू जासूसी मामले में सेना के मेजर की पत्नी पर चीन से जुड़े व्यक्ति के साथ LAC, रक्षा परियोजनाओं और संवेदनशील दस्तावेज साझा करने का आरोप है। पुलिस FIR दर्ज कर मोबाइल डेटा और विदेशी संपर्कों की जांच कर रही है।“
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के एक मेजर की पत्नी के खिलाफ कथित जासूसी और संवेदनशील जानकारी साझा करने के मामले में FIR दर्ज किए जाने की खबर है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महिला पर चीन से जुड़े एक व्यक्ति के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित विषयों पर तैयार शोध पत्र साझा करने का आरोप है। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल फोन से मिले दस्तावेजों और विदेशी संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महिला रक्षा, विदेश नीति और सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर लेख और शोध पत्र तैयार करती थी। इन दस्तावेजों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), अरुणाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं और मानवरहित विमानों की तैनाती जैसे विषय शामिल बताए गए हैं। हालांकि, इन दस्तावेजों में गोपनीय सैन्य जानकारी थी या सार्वजनिक स्रोतों से जुटाए गए तथ्य, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गांधीनगर थाने में FIR, मोबाइल फोन जब्त
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू के गांधीनगर थाने में महिला के खिलाफ आपराधिक साजिश और देश की संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को मिली सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने महिला को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर रोका था। बताया गया है कि वह पठानकोट जाने के लिए ट्रेन में सवार होने की तैयारी कर रही थी।
पूछताछ के लिए उसे सैन्य क्षेत्र में ले जाया गया। जांच के दौरान उसका मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। शुरुआती पड़ताल में फोन से कई दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। इन दस्तावेजों की प्रकृति, स्रोत और उनमें शामिल जानकारी की संवेदनशीलता की जांच की जा रही है।
LAC और अरुणाचल की परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल
रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन में मिले दस्तावेजों में भारत और इटली के बीच रक्षा बैठक, भारतीय सेना प्रमुख की अमेरिका यात्रा, भारत-रूस रक्षा समझौते और सेना की कोल्ड स्टार्ट रणनीति जैसे विषय शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश की कलई-दो और कमला जलविद्युत परियोजनाओं, असम की परियोजनाओं तथा भारत-सेशेल्स और भारत-चीन संबंधों से संबंधित सामग्री भी जांच के दायरे में होने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसियों के सामने अहम सवाल यह है कि संबंधित सामग्री केवल सार्वजनिक स्रोतों से जुटाई गई जानकारी थी या उसमें ऐसी गोपनीय सूचनाएं भी थीं, जिनका खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हो सकता है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर दस्तावेजों की गोपनीयता और उनके कथित हस्तांतरण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।
ChatGPT और Claude AI के इस्तेमाल का भी दावा
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि महिला शोध पत्र और लेख तैयार करने के लिए ChatGPT तथा Claude जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) टूल का इस्तेमाल करती थी। हालांकि, AI टूल का उपयोग अपने आप में जासूसी या किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि इन टूल के जरिए किस तरह की सामग्री तैयार की गई, उसमें क्या जानकारी शामिल थी और क्या कोई संवेदनशील दस्तावेज किसी अनधिकृत व्यक्ति तक पहुंचाए गए।
इस मामले में AI टूल के इस्तेमाल से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच एजेंसियों के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
संयुक्त राष्ट्र में प्रशिक्षण के दौरान विदेशी नागरिकों से संपर्क का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला तेलंगाना की रहने वाली है और उसने अंतरराष्ट्रीय शासन तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विषयों में उच्च शिक्षा हासिल की है। उसने वर्ष 2023 में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े सूचना प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण में भाग लिया था। वह स्वतंत्र लेखक के रूप में भी काम करती थी और रक्षा अध्ययन से संबंधित ऑनलाइन प्रशिक्षण लेने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
जांच एजेंसियां कथित तौर पर उसके विदेशी संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। रिपोर्ट में एक चीनी नागरिक के साथ WhatsApp के जरिए संपर्क और वर्ष 2024 में मलेशिया के एक व्यक्ति से संपर्क की जांच किए जाने का उल्लेख है। इन संपर्कों की प्रकृति और मामले से उनके संबंध के बारे में अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
महिला ने सार्वजनिक स्रोतों से जानकारी जुटाने का किया दावा
रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान महिला ने कहा कि उसके शोध पत्र सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित थे। यह पक्ष जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री और वर्गीकृत सैन्य जानकारी के बीच अंतर स्थापित करना आवश्यक होगा।
अब जांच का केंद्र दस्तावेजों की प्रामाणिकता, उनके स्रोत, कथित विदेशी संपर्कों और जानकारी साझा किए जाने के साक्ष्यों पर रहेगा। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। FIR दर्ज होना या पूछताछ किया जाना अपने आप में दोष सिद्ध होने के समान नहीं है।
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