“CJI सूर्यकांत ने बेंगलुरु की NLSIU में लॉ ग्रेजुएट्स को संबोधित करते हुए कहा कि कानूनी पेशे में नैतिकता, साहस और निष्पक्षता जरूरी है। उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता और संविधान के मूल्यों की रक्षा करने की सीख दी।“
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कानून के विद्यार्थियों को पेशेवर जीवन में नैतिकता, निष्पक्षता और साहस बनाए रखने की सीख दी है। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इस क्षेत्र में केवल कानूनों की जानकारी होना पर्याप्त नहीं, बल्कि सही बात के पक्ष में खड़े होने और दूसरों के विचारों को समझने का धैर्य भी जरूरी है।
सीजेआई सूर्यकांत ने बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल आपराधिक या संवैधानिक कानून के सिद्धांतों को समझना नहीं है, बल्कि अलग-अलग विचारों और पृष्ठभूमि के लोगों से संवाद करना भी है।
कानूनी पेशे में नैतिकता और निष्पक्षता जरूरी
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कानून के क्षेत्र में काम करने वालों को बौद्धिक स्वतंत्रता के साथ निष्पक्षता भी बनाए रखनी चाहिए। किसी व्यक्ति के बारे में निर्णय लेने से पहले उसकी बात सुनना और उसके दृष्टिकोण को समझना न्यायपूर्ण व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे असहमति जताते समय दूसरे व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करें। किसी व्यक्ति और उसके पद के बीच अंतर समझना भी जरूरी है, ताकि विचारों के मतभेद को व्यक्तिगत टकराव में न बदला जाए।
किताबों से आगे बढ़कर न्याय की समझ विकसित करें
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानूनी शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों और पुराने अदालती फैसलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका व्यापक उद्देश्य न्याय को मजबूत करना, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना और समाज की सेवा के लिए विद्यार्थियों को तैयार करना है।
उन्होंने कानून को एक जीवंत संवाद के रूप में प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक, वकीलों की दलीलें, अनुबंध, कानूनी सलाह और अदालतों के फैसले मिलकर न्याय व्यवस्था का निर्माण करते हैं। इस प्रक्रिया में अलग-अलग पृष्ठभूमि और विचारों वाले लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है।
शॉर्टकट के बजाय सिद्धांतों पर रहें कायम
सीजेआई सूर्यकांत ने लॉ ग्रेजुएट्स को आगाह किया कि पेशेवर जीवन में ऐसे अवसर आ सकते हैं, जब आसान रास्ता चुनने या अपने सिद्धांतों से समझौता करने का दबाव महसूस हो। ऐसे समय में उन्हें अपने संस्थान से मिले मूल्यों और नैतिक शिक्षा को याद रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लगातार ईमानदारी के रास्ते पर चलने से ही पेशेवर प्रतिष्ठा बनती है। तात्कालिक लाभ के लिए गलत रास्ता चुनना लंबे समय में व्यक्ति की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कानून के सफर की तुलना एक नदी से की, जो ज्ञान के स्रोतों से निकलकर कानूनी सिद्धांतों और न्यायिक मिसालों के रास्ते आगे बढ़ती है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने कानून को निरंतर विकसित होने वाली प्रक्रिया के रूप में समझाया।
अन्याय के खिलाफ खड़े होने का दिया संदेश
सीजेआई ने कहा कि कानूनी पेशे से जुड़ने वाले लोगों के कंधों पर समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी होती है। वकीलों को अन्याय दूर करने, नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान के मूल्यों को बनाए रखने में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि कानून का अभ्यास केवल आजीविका कमाने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए लोगों के अधिकारों की रक्षा और समाज में न्याय की स्थापना भी की जा सकती है।
सफलता में माता-पिता और शिक्षकों का योगदान न भूलें
दीक्षांत समारोह के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों में उनके माता-पिता, शिक्षकों और संस्थान के कर्मचारियों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्नातकों को प्रेरित किया कि वे नई पेशेवर यात्रा शुरू करते समय उन लोगों के योगदान को याद रखें, जिन्होंने उनकी सफलता में भूमिका निभाई है।
उनका संदेश था कि कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल अपने करियर तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें नागरिकों के अधिकारों, स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने में भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
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