उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया 7 नवंबर 2026 तक पूरी कर ली जाए। इस बार पदोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया है। करीब दस साल बाद शुरू हुई इस व्यापक पदोन्नति प्रक्रिया से प्रदेश के लगभग 70 हजार शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना है।
बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी की ओर से जारी निर्देशों में पदोन्नति की पूरी समयबद्ध प्रक्रिया तय की गई है। जिलों को वरिष्ठता सूची, पात्र शिक्षकों की सूची और उपलब्ध रिक्त पदों का विवरण तैयार करना होगा। इसके बाद जिला स्तर की चयन समिति पात्र शिक्षकों का परीक्षण करेगी और रिक्तियों के अनुसार वरिष्ठता क्रम में पदोन्नति की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
परिषद ने पहले 9 अक्टूबर को शिक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। जिलों को पदोन्नति से संबंधित रिक्त पदों, वरिष्ठता सूची और पात्रता सूची का विवरण 23 अक्टूबर तक बेसिक शिक्षा परिषद को ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराना है।
जिन जिलों में वरिष्ठता सूची पर आपत्तियां मांगी जा चुकी हैं लेकिन अभी उनका निस्तारण कर अंतिम सूची तैयार नहीं हुई है, वहां अधिकारियों को निर्धारित अवधि में आपत्तियों का निस्तारण करते हुए अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार करनी होगी।
इसके बाद पूरी पदोन्नति प्रक्रिया 7 नवंबर तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस बार सबसे महत्वपूर्ण बदलाव TET को लेकर है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति के लिए शिक्षक का TET उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा। पात्रता सूची में प्रत्येक शिक्षक के सामने यह दर्ज किया जाएगा कि उसने प्राथमिक स्तर की TET पास की है, उच्च प्राथमिक स्तर की TET उत्तीर्ण की है, दोनों स्तरों की TET पास की है या TET उत्तीर्ण नहीं है।
TET के स्तर के आधार पर ही शिक्षक को पदस्थापन के लिए पात्र माना जाएगा।
जिन शिक्षकों ने केवल प्राथमिक स्तर की TET उत्तीर्ण की है, उन्हें प्राथमिक विद्यालय के संबंधित पद पर पदस्थापन के लिए पात्र माना जाएगा।
जिन शिक्षकों ने केवल उच्च प्राथमिक स्तर की TET उत्तीर्ण की है, वे उच्च प्राथमिक विद्यालय के पदों के लिए पात्र होंगे।
वहीं जिन शिक्षकों ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तरों की TET उत्तीर्ण की है, वे दोनों स्तरों पर उपलब्ध पात्र पदों के लिए विकल्प दे सकेंगे।
पदोन्नति के लिए पात्र शिक्षकों से वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय का विकल्प भी लिया जाएगा। विकल्प देने से पहले शिक्षकों को यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित विद्यालय स्तर के लिए आवश्यक TET उत्तीर्ण होना जरूरी है।
इससे केवल वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति नहीं होगी। शिक्षक को संबंधित पद के लिए निर्धारित अनुभव और TET दोनों शर्तें पूरी करनी होंगी।
यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के अनुरूप लागू की जा रही है जिसमें शिक्षक पात्रता परीक्षा को पदोन्नति के लिए आवश्यक योग्यता माना गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया था कि सेवा में पहले से कार्यरत शिक्षक भी यदि पदोन्नति चाहते हैं तो उन्हें TET उत्तीर्ण करना होगा। यहां तक कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम समय बचा है और जिन्हें सेवा जारी रखने के लिए TET से सीमित राहत मिली है, उन्हें भी पदोन्नति चाहिए तो TET पास करना आवश्यक होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के अपने निर्णय में TET को सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए महत्वपूर्ण न्यूनतम योग्यता माना था। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों की पुनर्विचार याचिकाओं पर 29 मई 2026 को फैसला आया।
शीर्ष अदालत ने मूल सिद्धांत में बदलाव नहीं किया कि पदोन्नति के लिए TET आवश्यक है। हालांकि उन सेवारत शिक्षकों के लिए समय सीमा बढ़ाई गई जिन्हें निर्धारित परिस्थितियों में TET पास करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे पात्र इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET हासिल करने की समय सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई है। इसके साथ राज्यों और संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर TET आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया ताकि पुराने शिक्षकों को योग्यता हासिल करने का उचित अवसर मिल सके।
इसी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पुराने सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष TET की व्यवस्था भी की।
राज्य सरकार ने 2 सितंबर 2026 को विशेष TET से संबंधित आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य उन सेवारत शिक्षकों को TET पास करने का अवसर देना है जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में आते हैं और जिन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर यह योग्यता हासिल करनी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अक्टूबर 2026 में इस व्यवस्था पर विचार करते हुए कहा कि विशेष TET कोई नई भर्ती प्रक्रिया नहीं है और इससे किसी शिक्षक को पदोन्नति का स्वतः अधिकार नहीं मिलता। यह केवल उन सेवारत शिक्षकों को अनिवार्य TET योग्यता हासिल करने का अवसर देने की व्यवस्था है।
यानी विशेष TET पास करने मात्र से पदोन्नति तय नहीं होगी।
पदोन्नति के लिए वरिष्ठता, रिक्त पद, सेवा अनुभव, संबंधित पद की योग्यता और दूसरी निर्धारित शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
उत्तर प्रदेश में वर्तमान पदोन्नति प्रक्रिया के लिए सेवा अनुभव की शर्तें भी तय की गई हैं।
जूनियर बेसिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक और सीनियर बेसिक विद्यालय के सहायक अध्यापक पद पर पदोन्नति के लिए जूनियर बेसिक विद्यालय में स्थायी सहायक अध्यापक के रूप में न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव आवश्यक होगा।
सीनियर बेसिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक पद के लिए जूनियर बेसिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक या सीनियर बेसिक विद्यालय के सहायक अध्यापक पद पर न्यूनतम तीन वर्ष का अनुभव आवश्यक होगा।
वरिष्ठता निर्धारण को लेकर भी परिषद ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।
न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में नए जिला आवंटन के कारण दूसरे जिले में कार्यभार ग्रहण करने वाले शिक्षकों की वरिष्ठता का निर्धारण केवल नए जिले में कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से नहीं बल्कि उनकी पहली नियुक्ति की तारीख के आधार पर किया जाएगा।
इससे उन शिक्षकों को राहत मिल सकती है जिनका जिला आवंटन बाद में बदला गया लेकिन उनकी मूल नियुक्ति पहले की है।
जिला स्तर पर पदोन्नति के लिए चयन समिति बनाई जाएगी।
इस समिति की अध्यक्षता संबंधित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट के प्राचार्य करेंगे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी समिति में सचिव-सदस्य होंगे।
जिला मुख्यालय स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की वरिष्ठ प्रधानाचार्य को भी समिति में शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा जिलाधिकारी की ओर से हिन्दी, उर्दू या अन्य आवश्यक भाषा का एक विशेषज्ञ सदस्य नामित किया जाएगा।
चयन समिति के सामने पात्र शिक्षकों की सूची वरिष्ठता क्रम में रखी जाएगी।
इसके साथ संबंधित शिक्षकों की चरित्र पंजिका और आवश्यक सेवा अभिलेख भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
समिति दस्तावेजों और पात्रता का परीक्षण करने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की सूची तैयार कर नियुक्ति प्राधिकारी को भेजेगी।
इसके बाद अनुपयुक्त पाए गए शिक्षक-शिक्षिकाओं को हटाते हुए उपलब्ध रिक्त पदों के मुकाबले अंतिम पात्रता सूची वरिष्ठता क्रम में तैयार की जाएगी।
वरिष्ठता सूची तैयार करते समय यह भी तय करना होगा कि किन विद्यालयों और किन पदों पर शिक्षकों की तैनाती की जानी है।
इससे पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद पदस्थापन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम करने की कोशिश की गई है।
प्रदेश में परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित रही है।
करीब दस वर्षों के अंतराल के बाद इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होने के कारण वरिष्ठ शिक्षकों में लंबे समय से चली आ रही पदोन्नति की मांग पूरी होने की संभावना बनी है। करीब 70 हजार शिक्षकों को इस प्रक्रिया से लाभ मिलने का अनुमान है, हालांकि अंतिम संख्या प्रत्येक जिले में वास्तविक रिक्त पदों और पात्र शिक्षकों की संख्या के बाद स्पष्ट होगी।
यह संख्या इसलिए अभी अंतिम नहीं मानी जा सकती क्योंकि पदोन्नति प्रत्येक जिले में उपलब्ध पदों के सापेक्ष होगी।
यदि किसी जिले में संबंधित श्रेणी के पद कम रिक्त हैं तो वहां पात्र शिक्षकों की संख्या अधिक होने के बावजूद सभी को तत्काल पदोन्नति नहीं मिल सकेगी।
इसी कारण परिषद ने जिलों से पहले रिक्तियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
23 अक्टूबर तक परिषद को भेजे जाने वाले विवरण में रिक्त पदों के साथ वरिष्ठता और पात्रता सूची की जानकारी भी शामिल होगी।
इसके बाद जिला स्तर पर उपलब्ध पदों और पात्र शिक्षकों का मिलान किया जाएगा।
TET अनिवार्य किए जाने का प्रभाव उन वरिष्ठ शिक्षकों पर सबसे अधिक पड़ेगा जिन्होंने लंबे समय से सेवा तो पूरी कर ली है लेकिन अभी तक आवश्यक शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
ऐसे शिक्षक केवल वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर पदोन्नति का दावा नहीं कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट व्यवस्था के कारण पदोन्नति के लिए TET की योग्यता पूरी करना आवश्यक होगा।
इसका मतलब यह भी है कि किसी शिक्षक की सेवानिवृत्ति में कम समय बचा होने के कारण उसे वर्तमान सेवा जारी रखने की राहत मिल सकती है, लेकिन इससे पदोन्नति के लिए TET की शर्त समाप्त नहीं होगी।
शीर्ष अदालत ने दोनों स्थितियों को अलग-अलग रखा है।
सेवा में बने रहने की पात्रता और पदोन्नति की पात्रता एक ही चीज नहीं हैं।
सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे कुछ शिक्षकों को सेवा जारी रखने की सीमित राहत दी गई है, लेकिन पदोन्नति चाहने वाले प्रत्येक संबंधित शिक्षक के लिए TET अनिवार्य रहने का सिद्धांत कायम है।
प्रदेश सरकार ने इसी न्यायिक स्थिति के बाद विशेष TET की व्यवस्था की है ताकि पुराने शिक्षकों के सामने योग्यता पूरी करने का व्यावहारिक अवसर मौजूद रहे।
पहले से TET या CTET उत्तीर्ण शिक्षकों को विशेष TET दोबारा देने की आवश्यकता नहीं बताई गई है। विशेष परीक्षा मुख्य रूप से उन निर्धारित सेवारत शिक्षकों के लिए अवसर है जिन्होंने अभी तक आवश्यक शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
हालांकि वर्तमान पदोन्नति प्रक्रिया में प्रत्येक शिक्षक का वास्तविक प्रमाणपत्र, उसका स्तर और संबंधित पद की पात्रता जिला स्तर पर जांची जाएगी।
इसलिए किसी शिक्षक के पास केवल TET प्रमाणपत्र होना ही पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि उसने किस स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की है और जिस पद के लिए पदोन्नति या पदस्थापन चाहता है, उसके लिए वह परीक्षा मान्य है या नहीं।
उदाहरण के लिए प्राथमिक स्तर की TET उत्तीर्ण शिक्षक केवल इस आधार पर उच्च प्राथमिक विद्यालय का पद नहीं चुन सकेगा।
इसके लिए उच्च प्राथमिक स्तर की TET की पात्रता आवश्यक होगी।
इसी तरह दोनों स्तर की TET पास शिक्षक के पास प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तरों के उपलब्ध पदों में पात्रतानुसार विकल्प देने की अधिक संभावना होगी।
परिषद ने इस जानकारी को पात्रता सूची में स्पष्ट रूप से दर्ज करने को कहा है ताकि बाद में पदस्थापन के समय विवाद न हो।
शिक्षकों की वरिष्ठता सूची भी इस पूरी प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी है।
यदि वरिष्ठता सूची में नियुक्ति तिथि, जिला आवंटन या सेवा अवधि से जुड़ी गलती रहती है तो उसका सीधा असर पदोन्नति क्रम पर पड़ सकता है।
इसी कारण सूची पर आपत्ति मांगने और आपत्तियों का निस्तारण करने की व्यवस्था की गई है।
अंतिम सूची जारी होने के बाद ही चयन समिति पात्र शिक्षकों की वास्तविक वरिष्ठता के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी।
प्रदेश में इतने लंबे अंतराल के बाद पदोन्नति होने के कारण पुराने सेवा रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
कई शिक्षक वर्षों के दौरान अलग-अलग विद्यालयों या जिलों में कार्यरत रहे हैं।
ऐसे मामलों में नियुक्ति की मूल तारीख, स्थायीकरण, जिला आवंटन, पद और सेवा अवधि का सही रिकॉर्ड आवश्यक होगा।
परिषद के निर्देशों के अनुसार संबंधित अभिलेख चयन समिति के सामने उपलब्ध कराने होंगे।
पदोन्नति का एक महत्वपूर्ण प्रभाव विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ेगा।
कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय लंबे समय से स्थायी प्रधानाध्यापक या पर्याप्त वरिष्ठ शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे हैं।
पदोन्नति के बाद रिक्त पदों पर पात्र शिक्षकों की तैनाती होने से विद्यालय स्तर पर प्रशासन और शैक्षणिक प्रबंधन में बदलाव आ सकता है।
हालांकि वास्तविक असर पदस्थापन के बाद ही स्पष्ट होगा।
इसके साथ एक दूसरी चुनौती भी पैदा हो सकती है।
जब बड़ी संख्या में सहायक अध्यापकों को प्रधानाध्यापक या उच्च पदों पर पदोन्नत किया जाएगा तो उनके मौजूदा सहायक अध्यापक पद रिक्त होंगे।
सरकार को आगे भर्ती, समायोजन या स्थानांतरण की प्रक्रिया में इन नई रिक्तियों को भी ध्यान में रखना पड़ सकता है।
फिलहाल परिषद का प्राथमिक लक्ष्य लंबित पदोन्नति को निर्धारित समय में पूरा करना है।
समयसीमा काफी स्पष्ट रखी गई है।
23 अक्टूबर तक जिलों को वरिष्ठता, पात्रता और रिक्त पदों की जानकारी परिषद को देनी है और 7 नवंबर तक पदोन्नति की कार्रवाई पूरी करनी है।
यदि किसी जिले ने अभी वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप नहीं दिया है तो उसे तेजी से आपत्तियों का निस्तारण करना होगा।
इससे अगले कुछ सप्ताह बेसिक शिक्षा विभाग और जिलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
शिक्षकों को भी अपने सेवा रिकॉर्ड और TET संबंधी प्रमाणपत्र तैयार रखने पड़ सकते हैं ताकि पात्रता जांच के समय किसी दस्तावेज की कमी से उनका मामला प्रभावित न हो।
विशेष रूप से जिन शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड में नियुक्ति की तारीख, स्थानांतरण या जिला आवंटन को लेकर अंतर है, उनके लिए अंतिम वरिष्ठता सूची पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगभग 70 हजार संभावित लाभार्थियों में वास्तविक रूप से कितने शिक्षक इस चरण में पदोन्नत किए जाते हैं।
संख्या जिलेवार रिक्तियों और पात्रता के आधार पर बदल सकती है।
फिलहाल बेसिक शिक्षा परिषद ने राज्यव्यापी प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी बीएसए को 7 नवंबर की समयसीमा दी गई है।
इस बार प्रक्रिया का सबसे बड़ा संदेश साफ है—केवल लंबी सेवा या वरिष्ठता पदोन्नति के लिए पर्याप्त नहीं होगी।
संबंधित शिक्षक को निर्धारित सेवा अनुभव के साथ आवश्यक स्तर की TET भी उत्तीर्ण करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने इस योग्यता को पदोन्नति प्रक्रिया में स्पष्ट रूप से शामिल कर दिया है।
करीब दस वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे परिषदीय शिक्षकों के लिए अब 7 नवंबर महत्वपूर्ण तारीख बन गई है।
यदि परिषद की समयसीमा के अनुसार जिलों में प्रक्रिया पूरी होती है तो नवंबर के पहले सप्ताह तक बड़ी संख्या में पात्र शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता साफ हो जाएगा।